किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर सिंचाई, विविधीकृत फसल उत्पादन, प्राकृतिक खेती व सुदृढ़ विपणन व्यवस्था से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता – कृषि मंत्री
किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर सिंचाई, विविधीकृत फसल उत्पादन, प्राकृतिक खेती व सुदृढ़ विपणन व्यवस्था से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता – कृषि मंत्री
शिमला: कृषि मंत्री, हिमाचल प्रदेश प्रो. चंद्र कुमार ने आज कृषि विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए विभागीय योजनाओं एवं हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना चरण-II (जाइका) तथा प्राकृतिक खेती से संबंधित विभिन्न योजनाओं कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने किसानों के हित में संचालित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने, आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने तथा विभागीय सेवाओं का लाभ पात्र किसानों तक समयबद्ध तरीके से पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि विभाग ने एग्रीस्टैक प्रोजैक्ट के अन्तर्गत वर्ष 2025-26 में केन्द्र सरकार से 140 करोड़ प्राप्त किए हैं तथा इस वर्ष 400 करोड़ के लिये योग्य हो गए हैं। मंत्री ने हाल ही में स्थापित किसान हैल्पलाईन सैन्टर का भी दौरा कर इसकी कार्यप्रणाली का जायजा लिया तथा इसके व्यापक प्रसार के निर्देश दिए।
बैठक में कृषि निदेशक डॉ. रविंद्र सिंह जसरोटिया ने विभाग की विभिन्न योजनाओं, उपलब्धियों एवं प्रगति से अवगत करवाया। उन्होंने कृषि क्षेत्र के विकास एवं किसानों के हित में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के अंतर्गत ₹28.31 करोड़ तथा कृषि उन्नति योजना (KY) के अंतर्गत ₹36.51 करोड़, अर्थात कुल ₹64.82 करोड़ की द्वितीय किस्त जारी करवाने के लिए मंत्री जी का आभार व्यक्त किया।
बैठक में प्राकृतिक खेती के अंतर्गत हल्दी उत्पादन की प्रगति की भी समीक्षा की गई। जाइका परियोजना के माध्यम से हमीरपुर, पालमपुर, सोलन और मंडी क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती से उत्पादित हल्दी को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि मंत्री ने प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध करवाने तथा उत्पादों की गुणवत्ता, प्रमाणन और विपणन व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर बल दिया।
बैठक में 5 अक्तूबर, 2026 तक एचपीसीडीपी चरण-II की वित्तीय स्थिति की समीक्षा की गई। इसके अंतर्गत प्रदेश में उच्च मूल्य वाली फसलों, विशेषकर सब्जियों की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य उत्पादन अवसंरचना विकसित करना, किसानों की आय में वृद्धि करना तथा कृषि उत्पादों के विपणन के लिए प्रभावी व्यवस्था तैयार करना है।परियोजना के अंतर्गत प्रदेश में कुल 306 उप-परियोजनाएं संचालित की जाऐगी। अब तक कुल 174 उप-परियोजनाओं का र्निमाण करके 4,462.16 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित की गई है, जबकि 1,323.80 हेक्टेयर क्षेत्र में सब्जियों की खेती के माध्यम से फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया गया है। परियोजना के अंतर्गत 10 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का गठन किया गया है तथा 238 स्वयं सहायता समूह स्थापित किए गए हैं।
परियोजना के पात्र एवं गैर-पात्र घटकों सहित कुल 1,010.60 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रावधान के मुकाबले कुल व्यय 348.26 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। कृषि मंत्री ने अधिकारियों को वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता बनाए रखने, व्यय एवं प्रतिपूर्ति संबंधी प्रक्रियाओं में तेजी लाने तथा परियोजना के अंतर्गत स्वीकृत विकास कार्यों को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर सिंचाई, विविधीकृत फसल उत्पादन, प्राकृतिक खेती तथा सुदृढ़ विपणन व्यवस्था से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। विभागीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर किसानों की उत्पादकता, आय और आजीविका में सुधार लाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।
कृषि मंत्री ने प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध करवाने तथा उत्पादों की गुणवत्ता, प्रमाणन और विपणन व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर बल दिया। कृषि संसाधनों के वैज्ञानिक मानचित्रण और आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विभाग के 50 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान देहरादून में रिमोट सेंसिंग एवं भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया। किसानों की आय बढ़ाने, पारंपरिक कृषि पद्धतियों के संरक्षण तथा कृषि विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बैठक में देशी गायों की खरीद पर सहायता, गौशालाओं में लाइनिंग, हल्दी की खेती को प्रोत्साहन तथा स्थानीय एवं पारंपरिक फसलों के प्रदर्शन आयोजित करने जैसे प्रावधानों पर भी चर्चा की गई, साथ में मंत्री जी ने हल्दी के उत्पादों के विपणन को तलाश करने के भी निर्देश दिये।
कृषि मंत्री ने विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, किसानों के साथ बेहतर संवाद तथा कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के अधिकाधिक उपयोग के माध्यम से प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की आवश्यकता को पूरा करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए।