
जिला हमीरपुर की पांचवीं महिला उपायुक्त हैं वर्ष 2016 बैच की आईएएस अधिकारी
हमीरपुर : जिला हमीरपुर की नवनियुक्त उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ ने बुधवार को अपना कार्यभार संभाल लिया। वर्ष 2016 बैच की आईएएस अधिकारी के रूप में लगभग 6 वर्ष तक पश्चिम बंगाल में कार्य कर चुकी गंधर्वा राठौड़ ने हिमाचल प्रदेश काडर में आने के बाद कांगड़ा जिले में एडीसी के पद से अपनी सेवाएं आरंभ की थीं। इसके बाद उन्होंने हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के प्रबंध निदेशक और महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक के रूप में भी कार्य किया। हमीरपुर की उपायुक्त पर नियुक्ति से पहले वह कार्मिक विभाग के विशेष सचिव और हिमाचल प्रदेश राज्य हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम की प्रबंध निदेशक के रूप में सेवाएं दे रही थीं।
गंधर्वा राठौड़ ने जयपुर में प्रारंभिक एवं सेकंडरी शिक्षा के बाद दिल्ली के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में शामिल श्रीराम कालेज ऑफ कॉमर्स से बीकॉम किया है और वर्ष 2016 में आईएएस की परीक्षा पास करने के बाद उन्हें पश्चिम बंगाल काडर मिला था। कांगड़ा जिले के बैजनाथ क्षेत्र से संबंध रखने वाले हिमाचल प्रदेश काडर के आईएएस अधिकारी अनुराग चंद्र शर्मा से विवाह के बाद गंधर्वा राठौड़ ने हिमाचल प्रदेश काडर में आने का निर्णय लिया। वह जिला हमीरपुर की पांचवीं महिला उपायुक्त हैं। इससे पहले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अनुराधा ठाकुर, नंदिता गुप्ता, डॉ ऋचा वर्मा और देवश्वेता बनिक भी जिला हमीरपुर की उपायुक्त रह चुकी हैं।
कार्यभार संभालने के बाद मीडिया के साथ अनौपचारिक बातचीत में गंधर्वा राठौड़ ने कहा कि प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करना, इनका लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना और आम लोगों को बेहतरीन सुविधाएं प्रदान करना उनकी प्राथमिकता रहेगी। नवनियुक्त उपायुक्त ने बताया कि वह कौशल विकास निगम में कार्य कर चुकी हैं और युवाओं के कौशल विकास तथा महिलाओं को प्रोत्साहित करने पर भी विशेष रूप से फोकस करेंगी।
इससे पहले, हमीरपुर पहुंचने पर जिला के कई वरिष्ठ अधिकारियों और उपायुक्त कार्यालय के कर्मचारियों ने गंधर्वा राठौड़ का स्वागत किया तथा उन्हें जिला की परिस्थितियों एवं विभिन्न गतिविधियों से अवगत करवाया।

करसोग: ऋषि जमदग्नि की तपोभूमि तत्तापानी में मनाए जाने वाला तीन दिवसीय जिला स्तरीय लोहड़ी मकर सक्रांति मेले के दूसरे दिन राजस्व, बागबानी, जनजातीय विकास एवं जन शिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी बतौर मुख्यातिथि उपस्थित हुए।
इस अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने क्षेत्र के लोगों को मेले की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह मेला धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है और यहां पर लोहड़ी मकर संक्रांति के मौके पर स्नान करना शुभ माना जाता है। यहां पर किए जाने वाले दान पुण्य का विशेष महत्व है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश का चहुंमुखी विकास सुनिश्चित कर रही है। केंद्र से अपेक्षित सहयोग न मिलने के बावजूद अपने संसाधनों से राज्य सरकार प्रदेश के विकास को गति प्रदान कर रही है।
राजस्व मंत्री ने कहा प्रदेश में वन अधिकार अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है जिसका लाभ प्रदेश के आम लोगों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने विदेशों से इंपोर्ट किए जाने वाले सेब पर इंपोर्ट ड्यूटी कम कर प्रदेश के बागबानों से अन्याय किया है। इससे प्रदेश की 5 हजार करोड़ रुपए की आर्थिकी को सीधा नुकसान होगा।
करसोग क्षेत्र के लिए घोषणा
राजस्व मंत्री ने करसोग क्षेत्र को 600 करोड़ रुपए के शिवा प्रोजेक्ट में शामिल करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट के लागू होने से करसोग के बागवानों को लाभ मिलेगा।
तत्तापानी में लुप्त हो रहे गर्म पानी के चश्मों को योजना बनाकर पुनः बहाल किया जाएगा। जिसके लिए व्यापक योजना बनाई जाएगी। तत्तापानी क्षेत्र में नया कानून गो सर्कल बनाया जाएगा। इसके अतिरिक्त, राजस्व मंत्री ने मेले के सफल आयोजन के लिए अपनी ऐच्छिक निधि से एक लाख रुपए देने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार तत्तापानी क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए प्रयासरत हैं। इस अवसर पर पूर्व प्रत्याशी कांग्रेस महेश राज ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
ग्राम पंचायत तत्तापानी के प्रधान दिनेश कुमार ने मुख्यातिथि को टोपी और उप प्रधान वीरेंद्र कपिल ने शॉल भेंट कर सम्मानित किया।
नगर पंचायत सुन्नी के अध्यक्ष प्रदीप शर्मा, एसडीम करसोग गौरव महाजन, एसडीएम सुन्नी राजेश वर्मा, मेला समिति के पदाधिकारी, सदस्यों सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।
शिमला: मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में 19 जनवरी यानी सोमवार को कैबिनेट बैठक होगी। यह बैठक सुबह 11 बजे बजे राज्य सचिवालय में शिखर सम्मेलन हाल में होगी। इस बैठक के लिए संबंधित सचिवों को एजेंडा तैयार करने के निर्देश सामान्य प्रशासन विभाग ने दे दिए हैं। बैठक में बजट सत्र के प्रारूपों को तैयार करने पर निर्णय लिया जा सकता है। इसके अलावा बैठक में राज्य सरकार पंचायत चुनाव को लेकर निर्णय ले सकती है।

..एचआरटीसी कार्यशाला में रखा गया वाहन
शिमला: यात्री सुरक्षा सुनिश्चित करने और परिवहन नियमों के कड़ाई से पालन हेतु शिमला क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) शिमला विश्व मोहन देव चौहान के कार्यालय द्वारा चलाए जा रहे विशेष प्रवर्तन अभियान के तहत आज एक बड़ी कार्रवाई की गई। बस संख्या HP-63A-1964 को कई गंभीर उल्लंघनों के आधार पर तत्काल जब्त कर लिया गया है। जब्त किए गए वाहन को आगे के आदेशों तक एचआरटीसी (HRTC) कार्यशाला में खड़ा कर दिया गया है।
जांच के दौरान निम्नलिखित गंभीर अनियमितताएं सामने आईं:
1. वाहन मान्य फिटनेस प्रमाणपत्र तथा वैध परमिट के बिना चल रहा था।
2. चालक अपना वैध ड्राइविंग लाइसेंस तथा वाहन का वैध रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र (आरसी) प्रस्तुत करने में विफल रहा।
3. वाहन का विशेष सड़क कर (Special Road Tax) बकाया पाया गया।
4. यह भी पाया गया कि बस अपने परमिट में निर्धारित मार्ग से बाहर चल रही थी।
यह कार्रवाई मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 207 के अंतर्गत की गई है, जिसे धारा 16(2) के प्रावधानों के साथ पढ़ा जाता है। धारा 16(2) के अनुसार बिना वैध फिटनेस प्रमाणपत्र के किसी वाहन का सार्वजनिक स्थान पर संचालन वर्जित है। धारा 207 के अंतर्गत अधिकारियों को ऐसे वाहनों को, जो अनिवार्य परमिट या फिटनेस प्रमाणपत्र के बिना चल रहे हों, तत्काल जब्त करने का अधिकार है। इसके अतिरिक्त, बकाया सड़क कर एवं परमिट शर्तों के उल्लंघन के लिए भी संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
इस संबंध में श्री विश्व मोहन देव चौहान, आरटीओ शिमला ने बताया कि, “बस HP-63A-1964 का संचालन यात्री सुरक्षा के लिए एक बहु-स्तरीय खतरा था। न केवल वाहन फिटनेस और परमिट विहीन था, बल्कि चालक के पास लाइसेंस और आरसी भी नहीं थे। साथ ही, बकाया सड़क कर और परमिट मार्ग से बाहर चलना यह साबित करता है कि यह एक व्यवस्थित उल्लंघन था। ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जब्त वाहन को एचआरटीसी कार्यशाला में रखा गया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।”
आरटीओ शिमला ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी ऐसे नियमित अभियान चलाए जाते रहेंगे। जनता से भी अनुरोध है कि यदि उन्हें कोई ऐसा वाहन दिखाई दे जो बिना उचित दस्तावेजों के चल रहा हो या असुरक्षित लगे, तो वे आरटीओ कार्यालय, शिमला को सूचित करें।
यह कार्रवाई राज्य की सड़कों पर कानून के शासन, राजस्व की सुरक्षा और नागरिक सुरक्षा के प्रति परिवहन विभाग के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है।
हिमाचल: प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना जताई जा रही है। जिसके चलते मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार राज्य में 15 जनवरी तक मौसम साफ रहने के आसार हैं। 15 जनवरी की रात से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है, जिसके चलते राज्य के मध्य व उच्च पर्वतीय भागों में 16 से 20 जनवरी के मध्य बारिश-बर्फबारी हो सकती है। चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मण्डी, किन्नौर व लाहौल-स्पीति में बारिश-बर्फबारी की संभावना है। मौसम में संभावित इस बदलाव से पहले 14 व 15 जनवरी को प्रदेश के कई क्षेत्रों में शीतलहर का येलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं जलाशयों से सटे जिलों में 15 जनवरी तक सुबह और शाम को घना कोहरा पड़ने का सिलसिला जारी रहने का अलर्ट है।

शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में स्टेट न्यूट्रिशन पॉलिसी बनायेगी। इस पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य बच्चों, किशोरियों, गर्भवती एवं धात्री माताओं सहित सभी संवेदनशील वर्गों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाने के लिए समयबद्ध और प्रभावी कदम उठाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग की कण्डाघाट स्थित कम्पोजिट टेस्टिंग लैब को विश्व स्तरीय हाई-ऐंड टेक्नोलॉजी से लैस किया जाएगा, ताकि सूक्ष्म और सटीक विश्लेषण और दक्षता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के लिए प्रथम चरण में बद्दी, मण्डी, कांगड़ा और शिमला शहर में भी क्षेत्रीय प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। द्वितीय चरण में सभी जिलों में इस तरह की प्रयोगशालाएं खोली जाएंगी।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य में न्यूट्रिशनल सरविलेंस को और सघन किया जाएगा। खाद्य पदार्थों की जांच सुनिश्चित कर उनमें उपलब्ध पोषक तत्वों की प्रोफाइलिंग और मैपिंग की जाएगी। उन्होंने विभाग को सार्वजनिक वितरण प्रणाली, आंगनवाड़ी और मिड-डे-मील सहित अन्य योजनाओं में प्रदान किये जाने वाले खाद्यानांे की भी समय समय पर जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा जांच, जागरूकता क्षमता विकास और प्रशिक्षण के लिए मोबाइल वैन का उपयोग किया जाएगा, ताकि सभी जिलों में विभाग की कार्यप्रणाली को और सुदृढ़ किया जा सके।
उन्होंने विभाग की कार्यप्रणाली को सुगम एवं समयबद्ध बनाने के लिए नवीनतम सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग सुनिश्चित करने और सारी प्रक्रियाओं का डिजिटाइजेशन करने के निर्देश भी दिए। विभाग द्वारा खाद्य पदार्थों के सैंपल लेने तथा इसकी जांच के नतीजों सहित सभी प्रक्रियाओं के डिजिटल निष्पादन के लिए स्टेट पोर्टल विकसित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने स्टेट न्यूट्रिशन डेटाबेस भी तैयार करने को कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खाद्य पदार्थों में पोषक तत्वों की कमी तथा कीटनाशकों के कारण लोगों में बीमारियों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। प्रदेश सरकार इन दोनों विषयों पर गम्भीरता से विचार कर समाधान के लिए प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि इसी के दृष्टिगत प्रदेश सरकार राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है और इससे जुड़े किसानों को प्रोत्साहित कर विभिन्न योजनाओं के तहत लाभान्वित किया जा रहा है।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र को निरन्तर सुदुढ़ कर रही है। स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में विश्व स्तरीय मापदण्डों को अपनाया जा रहा है। हर चिकित्सा महाविद्यालय में आईसीयू स्थापित किये जा रहे हैं तथा अस्पतालों में विश्वस्तरीय डॉक्टर-पेशेंट अनुपात दर को अपनाया जा रहा है।
बैठक में निदेशक डीडीटीजी डॉ. निपुण जिंदल, विशेष सचिव स्वास्थ्य अश्वनी शर्मा, निदेशक स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन जितेन्द्र सांजटा एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
शिमला: युवा सेवा एवं खेल विभाग के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि विभाग द्वारा इंदिरा स्टेडियम, ऊना में हिमाचल प्रदेश की जनजातीय खिलाड़ियों की एथलैटिक्स, स्वीमिंग, भारोत्तोलन, कुश्ती, हॉकी व फुटबाल (महिला व पुरूष) खेल स्पर्धाओं की टीमों के लिए 16 जनवरी, 2026 निर्धारित ट्रायल प्रशासनिक कारणों से स्थगित कर दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि इन टीमों का छत्तीसगढ़ में 14 फरवरी, 2026 को खेलों इंडिया ट्राईबल गेम्ज़-2026 में भाग लेना प्रस्तावित था।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में ट्रायल की पुनः तिथि अब बढ़ाकर 19 जनवरी, 2026 निर्धारित की गई है।
प्रवक्ता ने बताया कि ट्रायल के लिए खिलाड़ियों का पंजीकरण 19 जनवरी, 2026 को प्रातः 10 बजे से आरम्भ होगा। सभी इच्छुक खिलाड़ी अपना हिमाचली प्रमाण-पत्र, जनजातीय प्रमाण-पत्र (अनिवार्य) तथा दो पासपोर्ट फोटो सहित परीक्षण केन्द्र में रिपोर्ट करना सुनिश्चित करें। अधिक जानकारी के लिए दूरभाष नंबर 98160-96296 तथा 98168-72218 पर सम्पर्क कर सकते हैं।

हिमाचल: प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र को नई पहचान देने की दिशा में वर्तमान प्रदेश सरकार ने एक समग्र और दूरदर्शी पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार ‘व्यवस्था परिवर्तन’ की अवधारणा को साकार करते हुए पर्यटन को केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय आजीविका और सतत आर्थिक विकास से जोड़ रही है। यह दृष्टिकोण राज्य के प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित और जिम्मेदार प्रयासों पर आधारित है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व बीजेपी सरकार केे कार्यकाल के दौरान हिमाचल प्रदेश में पर्यटन की अपार संभावनाओं को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। सत्ता में रहते हुए बीजेपी न तो कोई ठोस पर्यटन नीति बना सकी और न ही प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक व सतत उपयोग की दिशा में कोई गंभीर प्रयास किया। विशेष रूप से राज्य के विशाल जल संसाधन बीजेपी सरकारों की उदासीनता और दूरदृष्टि के अभाव के कारण उपेक्षित पड़े रहे।
वर्तमान कांग्रेस सरकार ने इन विफलताओं को स्वीकार करते हुए और उनसे सबक लेते हुए जल-पर्यटन और इको-पर्यटन को विकास के प्रमुख स्तंभ के रूप में अपनाया है, जो यह दर्शाता है कि जो काम बीजेपी वर्षों में नहीं कर पाई, उसे वर्तमान प्रदेश सरकार ने स्पष्ट नीति और इच्छाशक्ति के साथ आगे बढ़ाया है।
पोंग डैम झील, जो एक अंतरराष्ट्रीय महत्त्व का ‘रामसर वेटलैंड’ क्षेत्र है, बीजेपी के शासनकाल में न तो संरक्षण के लिहाज से प्राथमिकता में रही और न ही पर्यटन विकास के मानचित्र पर। कांग्रेस सरकार ने इस ऐतिहासिक उपेक्षा को समाप्त करते हुए पोंग डैम को भारत के प्रमुख पक्षी-दर्शन स्थलों में विकसित करने की ठोस पहल की है।
हर वर्ष नवंबर से फरवरी के बीच साइबेरिया और मंगोलिया से हजारों प्रवासी पक्षी यहां आते हैं, लेकिन पूर्व सरकार ने कभी इस वैश्विक संभावना को स्थानीय रोजगार और पर्यावरणीय शिक्षा से जोड़ने का प्रयास नहीं किया। वर्तमान प्रदेश सरकार शिकारों की सवारी, तैरते हुए पक्षी-दर्शन मंच और गाइडेड बर्ड-वॉचिंग टूर जैसी सुविधाएं विकसित कर यह सिद्ध कर रही है कि पर्यटन और पारिस्थितिकी साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।
गोबिंद सागर झील (बिलासपुर) और तत्तापानी जैसे स्थल दशकों तक बीजेपी सरकार की फाइलों में ही सिमटे रहे। न बुनियादी ढांचा विकसित किया गया, न स्थानीय युवाओं को जोड़ा गया। कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही इन क्षेत्रों को आधुनिक जल-पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित कर यह स्पष्ट कर दिया कि विकास की राह इच्छाशक्ति से होकर गुजरती है, केवल घोषणाओं से नहीं।
आज शिकारा, स्पीड बोटिंग, हाउसबोट, जेट-स्की और वॉटर स्कूटर जैसी गतिविधियां इन क्षेत्रों में न केवल पर्यटन बढ़ा रही हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही हैं जो बीजेपी के शासन में संभव नहीं हो सका।
बीजेपी सरकार ने अपने कार्यकाल में इको-पर्यटन के नाम पर केवल योजनाएं गिनाईं, लेकिन धरातल पर कोई प्रभावी नीति लागू नहीं की। इसके विपरीत, कांग्रेस सरकार की इको-पर्यटन नीति के अंतर्गत विभिन्न वन मंडलों में 77 नए इको-पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है।
यह पहल न केवल राजस्व सृजन करेगी, बल्कि हिमाचल प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदार पर्यटन का उदाहरण बनाएगी। बीजेपी शासन में पर्यटन क्षेत्र युवाओं के लिए रोजगार का साधन बनने के बजाय ठहराव का शिकार रहा। कांग्रेस सरकार ने इस स्थिति को बदलने के लिए मुख्यमंत्री पर्यटन स्टार्ट-अप योजना शुरू की है, जिसके तहत होम-स्टे, होटल और फूड वैन जैसे उद्यमों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
यह योजना स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि जहां बीजेपी सरकार युवाओं को अवसर देने में असफल रही, वहीं वर्तमान सरकार उन्हें आत्मनिर्भर उद्यमी बना रही है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के अनुसार, आज हिमाचल प्रदेश में जो परिवर्तन दिखाई दे रहा है, वह इसलिए संभव हो पाया क्योंकि वर्तमान सरकार ने पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार की निष्क्रियता और विफल नीतियों से स्पष्ट रूप से अलग रास्ता चुना।
आज पर्यटन केवल राजस्व का साधन नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सशक्तिकरण और सतत विकास का मजबूत मॉडल बन रहा है। यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि जब सरकार ईमानदार नीयत और स्पष्ट दृष्टि के साथ काम करती है, तो व्यवस्था परिवर्तन केवल नारा नहीं, बल्कि साकार वास्तविकता बन जाता है।

हिमाचल: प्रदेश पुलिस के प्रवक्ता ने आज बताया कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू द्वारा शुरू किए गए राज्यव्यापी एंटी-चिट्टा जन आंदोलन के तहत ‘चिट्टा-मुक्त हिमाचल’ के लक्ष्य को और मजबूत करने के लिए एक अहम कदम उठाया गया है। इसी क्रम में हिमाचल प्रदेश पुलिस ने आज पूरे राज्य में एक विशेष और सुनियोजित जांच अभियान चलाया।
इस अभियान का मुख्य उददेश्य कूरियर सेवाओं के माध्यम से नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकना था। इसके तहत राज्यभर में कूरियर कंपनियों के वेयरहाउस और गोदामों की गहन जांच और ऑडिट किया गया।
प्रवक्ता ने बताया कि इस राज्य स्तरीय विशेष अभियान के दौरान कुल 433 कूरियर सेवा प्रदाताओं की जांच की गई। इनमें सोलन में 43, किन्नौर में 13, सिरमौर में 31, बददी में 40, मंडी में 69, कुल्लू में 34, लाहौल-स्पीति में एक, हमीरपुर में 37, बिलासपुर में 23, कांगड़ा में 69, नूरपुर में 17, देहरा में 18, चंबा में 22 और ऊना में 16 कूरियर केंद्र शामिल थे।
उन्होंने बताया कि जांच के दौरान पार्सल बुकिंग, भंडारण, परिवहन और अंतिम डिलीवरी तक पूरी कार्य प्रणाली को बारीकी से जांचा गया। कूरियर केंद्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की स्थिति, कर्मचारियों की पहचान, रिकॉर्ड के रखरखाव और मानक संचालन प्रक्रियाओं के पालन पर विशेष ध्यान दिया गया। संदिग्ध पार्सलों की गहन जांच की गई और कर्मचारियों को एनडीपीएस एक्ट तथा अन्य संबंधित कानूनों की जानकारी दी गई।
उन्होंने बताया कि यह विशेष अभियान राज्य के सभी पुलिस रेंज में आपसी समन्वय के साथ एक साथ चलाया गया, जहां भी प्रक्रियागत कमियां पाई गईं, वहां संबंधित कूरियर सेवा प्रदाताओं को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए और तय समय सीमा में सुधार करने के आदेश जारी किए गए। साथ ही नशा तस्करी से जुड़े संभावित खतरों के बारे में भी उन्हें अवगत करवाया गया।
प्रवक्ता ने बताया कि यह विशेष जांच अभियान कूरियर माध्यम से होने वाली नशा तस्करी को रोकने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा और अधिक मजबूत होगी।
हिमाचल प्रदेश पुलिस ने आम नागरिकों, विशेषकर युवाओं से मुख्यमंत्री की इस मुहिम का समर्थन करने की अपील की है। यदि किसी को चिट्टा या नशीले पदार्थों से जुड़ी किसी भी गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत 112 पर कॉल करने या नजदीकी पुलिस थाना से संपर्क करने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।