


मण्डी: सुंदरनगर शहर की पेयजल आपूर्ति योजना के नागौण परिसर में स्थापित ट्रांसफार्मर तथा इलेक्ट्रो-मैकेनिकल उपकरणों, विशेषकर स्टार्टर में तकनीकी खराबी आने के कारण पर्याप्त मात्रा में पानी की पंपिंग एवं लिफ्टिंग नहीं हो पा रही है। खराबी का अभी तक स्पष्ट रूप से पता नहीं चल पाया है, जिसके चलते मरम्मत कार्य में कुछ अतिरिक्त समय लगने की संभावना है।
अधिशासी अभियंता, जल शक्ति मंडल सुंदरनगर रजत गर्ग ने बताया कि तकनीकी खराबी के कारण शहर में अगले 4–5 दिनों तक पेयजल आपूर्ति प्रभावित रहने की संभावना है। विभाग द्वारा खराबी का पता लगाने तथा आवश्यक मरम्मत कार्य को जल्द पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि उपलब्ध पानी की मात्रा के अनुसार सुंदरनगर शहर के सभी वार्डों में कम से कम एक बार पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने शहरवासियों से आग्रह किया कि इस अवधि के दौरान पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करें तथा आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त पानी का भंडारण कर रखें।
जल शक्ति विभाग ने नागरिकों को होने वाली असुविधा के लिए खेद व्यक्त करते हुए सभी उपभोक्ताओं से सहयोग बनाए रखने की अपील की है।
शिमला: शिक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि राजकीय डिग्री कॉलेज, देहरा, जिला कांगड़ा के आहरण एवं संवितरण अधिकारी की शक्तियां (डीडीओ पावर्स) राजकीय डिग्री कॉलेज, डाडासीबा, जिला कांगड़ा, की प्रधानाचार्य रजनी सांख्यान को सौंपी गई हैं। यह प्रभार उन्हें अपने वर्तमान दायित्वों के अतिरिक्त सौंपे गए हैं।
यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से आगामी आदेशों तक लागू रहेगी।

शिमला : पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने विधानसभा सत्र के समापन के बाद अपने कार्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि विपक्ष की ओर से हमने संजीदगी के साथ जनहित के मुद्दों को विधानसभा के इस मानसून सत्र में उठाने का प्रयास किया है। भाजपा ने सार्थक विषयों पर चर्चा चाही और प्रस्ताव भी लाये लेकिन हमारी जनता के मुद्दे ईमानदारी से उठाने के बाबजूद सरकार की तरफ से संतोषजनक जवाब सदन में नहीं मिले।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जैसे ही दिल्ली रवाना हुए तो सत्र में बिल्कुल भी गंभीरता नहीं दिखी। अधिकारी दीर्घा खाली रही और केवल एक दो जुनियर अधिकारी ही दिखे और कोई वरिष्ठ अधिकारी सदन में नहीं था। ये हालात बताते हैं कि अब अधिकारी भी समझ गए हैं कि हम चुनावी वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं। सरकार में तो अफरा तफ़री का माहौल बना हुआ ही है लेकिन अधिकारियों में भी अब खलबली मची हुई है। मुख्यमंत्री के बाद मंत्री भी दिल्ली भाग गए लगता है कुछ तो बड़ा होने वाला है। आज तक जितने भी बड़े बिल इस सरकार ने सदन में लाये हैं उन्हें हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है जो सरकार की नालायकी बताने के लिए काफी है। आपदा के बाद करोड़ो रुपए की वन संपदा नदियों नालों से अवैध ढंग से निकाली गई और करोड़ो का राजस्व नुकसान सरकार को हुआ लेकिन ये किसके कहने और करने से हुआ वो बड़ा सवाल है। मुख्यमंत्री जिम्मेवारी लेने से भाग रहे हैं। मन्त्रियों से जवाब देते नहीं बन रहा है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री और उद्योग मंत्री के बीच तालमेल नहीं है। ये पहली बार हुआ है कि मुख्यमंत्री विपक्ष की आवाज़ दबाने के लिए खुद संवैधानिक पद पर होने के बावजूद धरने प्रदर्शन में तख्ती लेकर उतर आये। हम भी पांच साल मुख्यमंत्री रहे लेकिन मैंने कभी ऐसे सड़क पर बैठकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारे और गालियाँ नहीं निकाली। मुख्यमंत्री को अपने पद के अनुरूप ऐसा करने से बचना चाहिए था। सदन में रोजगार से संबंधित विषय को लेकर सरकार बिल्कुल भी गंभीर नहीं दिखी। कहा था हम पांच साल में पांच लाख सरकारी और पक्की पेंशन वाली नौकरी देंगे लेकिन सरकारी आंकड़े इसके गवाह हैं कि हिमाचल में 1.91 में से अब केवल एक लाख 75 हजार ही नौकरी रह गई है। नए रोजगार के अवसर खत्म कर दिए गए हैं। हिम केयर, सहारा, गृहणी और स्वावलम्बन जैसी भाजपा सरकार के समय की लोकप्रिय योजनाएं राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से बंद कर दी हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि ऋण लेने के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये हैं और सदन में भी झूठे आंकड़े पेश किए जा रहे हैं जबकि सच्चाई ये है कि आजादी के बाद अब तक जितनी सरकारें रही उन्होंने मेरे पांच साल कार्यकाल पूर्ण करने के बाद 2022 तक 69600 करोड़ ऋण कुल मिलाकर लिया लेकिन इन्होंने तो चार साल में ही 48 हजार करोड़ ऋण ले लिया है। अगर अगले एक वर्ष और सरकार रही तो ये अब तक ऋण लेने के सारे रिकॉर्ड तोड़ देगी। आज की तारीख में सुक्खू सरकार 1 लाख 18 हज़ार करोड़ का ऋण ले चुकी है। बाबजूद इसके विकास धरातल पर शून्य है। कर्मचारी और पेंशनर धरने पर हैं। सरकार बदले की भावना से काम कर रही है। हमारे विधायकों के खिलाफ़ लगातार एफआईआर दर्ज कर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि ये जो भी राजनीतिक मंशा से जांच हो रही है भाजपा सरकार आते ही इनकी जांच की भी जांच होगी।

शिमला: शिमला जिले के उपमंडल चौपाल के तहत शंठा (झाड़ी) गांव के पास गुरुवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक स्कूली छात्रा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सात अन्य बच्चे घायल हो गए। हादसा शाम करीब 5:33 पर हुआ। पुलिस से मिली जानकारी अनुसार चौपाल में एक वाहन दुर्घटना आज शाम करीब 5:33 बजे पुलिस थाना चौपाल में एक वाहन दुर्घटना के संबंध में सूचना प्राप्त हुई। सूचना देने वाले शिकायतकर्ता ने बताया कि एक फॉर्च्यूनर वाहन, पंजीकरण संख्या HP 08B 3131, स्थान झाड़ी में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। उक्त वाहन में GSSS देवत के कुल 8 विद्यार्थी सवार थे। इस दुर्घटना में8 विद्यार्थियों में से एक छात्रा साक्षी पुत्री रमेश, गांव शंठा, डाकघर देवत, तहसील चौपाल, आयु 11 वर्ष की मौत हो गई तथा अन्य 7 बच्चे घायल हुए हैं। घायल 7 बच्चों में से एक बच्चे आयु 10 वर्ष को उपचार के लिए IGMC शिमला रेफर किया गया है। आगामी कार्रवाई जारी है।

शिमला: हिमाचल विधानसभा मॉनसून सत्र की समाप्ति के पश्चात हि.प्र. विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि चौदहवीं विधान सभा का 12वां सत्र अपेक्षा अनुरूप पूर्ण सफलता के साथ सम्पन्न हुआ है। यह सत्र 21 अगस्त से आरम्भ हुआ तथा 3 सितम्बर तक चला। इस सत्र में कुल 10 बैठकों का आयोजन किया गया जिसकी कार्यवाही लगभग 45 घण्टे 30 मिनट तक चली। इस तरह सत्र की उत्पादकता 91 प्रतिशत रही। सत्र के पहले दिन पूर्व विधायक स्व. विजयेन्द्र सिंह, राम चन्द भाटिया, ज्ञान चन्द तथा राम रत्न शर्मा के प्रति शोकोदगार प्रकट कर समूचे सदन द्वारा श्रद्वांजली अर्पित की गई। इस सत्र के दौरान कुल 786 (514 तारांकित तथा 272 अतारांकित) प्रश्नों की सूचनाओं पर सरकार द्वारा उत्तर उपलब्ध करवाए गए।
पठानिया ने कहा कि सत्र में नियम 62 के तहत 14, , नियम 101 के तहत 05 तथा नियम 130 के तहत 02 विषयों तथा नियम 324 के तहत 11 विषयों पर चर्चा की गई तथा माननीय सदस्यों ने बहुमुल्य सुझाव दिए। शून्यकाल के दौरान 34 विषयों को सदन में उठाया गया। सत्र में दिनाँक 27 अगस्त, 2026 का दिन गैर सरकारी सदस्य कार्य दिवस के लिए निर्धारित था। उन्होने कहा कि इसके अतिरिक्त 7 सरकारी विधेयकों को सभा में पुर: स्थापित एंव चर्चा उपरान्त पारित किया गया। सदन में समितियों के 44 प्रतिवेदन उपस्थापित किए गए। सत्र के दौरान प्रदेश के सरकारी तथा गैर सरकारी शिक्षण संस्थानों के लगभग 1908 बच्चों ने सदन की कार्यवाही को देखा है जो आज के युवा की लोकतान्त्रिक प्रणाली के प्रति श्रद्वा व उत्सुकता को दर्शाता है। पठानिया ने कहा कि पिछले सत्र में 16 बैठकों का आयोजन किया गया था जिसकी कार्यवाही लगभग 84 घण्टे 49 मिनट चली थी व उसकी उत्पादकता 103 प्रतिशत रही थी तथा उस सत्र में 617 सूचनाएं माननीय सदस्यों से प्रश्नों के माध्यम से प्राप्त हुई थी। उन्होने सहयोग के लिए पक्ष तथा विपक्ष के सदस्यों का धन्यवाद किया जिस वजह से वह सत्र का सुचारू रूप से संचालन कर सके। इस अवसर पर उन्होने सदन के नेता ठाकुर सुखविन्दर सिंह सुक्खू, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर तथा संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान तथा सभापति तालिका के सभी सदस्यों का भी धन्यवाद किया।
पठानियां ने इस अवसर पर सभी को श्री कृष्ण जन्माष्टमी तथा आने वाले शारदीय नवरात्रो की अग्रिम बधाई व शुभकामनाएं भी दी।


कुल्लू: राष्ट्रीय राजमार्ग-305 पर धामण में स्थापित 170 फीट लंबे टीडीआर बैली ब्रिज को हटाने/डिस्मेंटल करने का कार्य 4 सितंबर से 24 सितंबर 2026 तक किया जाएगा। इस दौरान आम जनता की सुविधा एवं यातायात सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला दंडाधिकारी कुल्लू सुरजीत सिंह राठौर ने यातायात विनियमन के आदेश जारी किए हैं। जिला दंडाधिकारी ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 115 के तहत जारी आदेश में कहा है कि बैली ब्रिज को हटाने का कार्य पर्यटकों की आवाजाही के ऑफ-सीजन के दौरान किया जा रहा है, जब एनएच -305 पर यातायात का दबाव अपेक्षाकृत कम रहता है। इससे कार्य को सुरक्षित एवं समयबद्ध तरीके से पूरा करने के साथ-साथ आम जनता और पर्यटकों को होने वाली असुविधा को न्यूनतम किया जा सकेगा। जारी आदेश के अनुसार सुबह 8 से 9 बजे, 10 से 11 बजे, दोपहर 12 से 1 बजे, 2 से 3 बजे, शाम 4 से 5 बजे तथा 6 से 7 बजे तक धामण में बैली ब्रिज के स्थान पर वन-वे ट्रैफिक डायवर्जन रहेगा। प्रत्येक निर्धारित वन-वे अवधि के बीच सड़क मार्ग दोनों दिशाओं में यातायात की आवाजाही के लिए खुला रहेगा।
जारी आदेश में लोक निर्माण विभाग के मैकेनिकल डिवीजन, कुल्लू के अधिशासी अभियंता को कार्यस्थल एवं आसपास पर्याप्त साइन बोर्ड, चेतावनी सूचनाएं, बैरिकेडिंग तथा अन्य आवश्यक यातायात प्रबंधन उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वाहन चालकों एवं आम जनता को यातायात व्यवस्था की जानकारी मिल सके। पुलिस अधीक्षक कुल्लू को आवश्यक पुलिस बल की तैनाती कर प्रभावी यातायात विनियमन, जन सुरक्षा तथा आदेश के तहत लगाए गए प्रतिबंधों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन ने वाहन चालकों एवं आम जनता से अपील की है कि निर्धारित समय के दौरान यातायात विनियमन में सहयोग करें तथा मौके पर तैनात पुलिस एवं विभागीय कर्मियों के निर्देशों का पालन करें।

5.45 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है आधुनिक बस स्टैंड का निर्माण
हमीरपुर : हिमाचल प्रदेश के ऐतिहासिक कस्बे सुजानपुर में लगभग 50 वर्ष के लंबे इंतजार के बाद आधुनिक बस स्टैंड का निर्माण संभव हो पा रहा है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देशों के अनुसार आजकल इस नए बस स्टैंड का कार्य काफी तेजी से चल रहा है। हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े मैदान, ऐतिहासिक किलों एवं मंदिरों और सैनिक स्कूल के कारण देश भर में प्रसिद्ध सुजानपुर कस्बे में कई दशकों से बस स्टैंड की जरुरत महसूस की जा रही थी, क्योंकि यहां से सिर्फ जिला हमीरपुर ही नहीं, बल्कि जिला कांगड़ा के जयसिंहपुर, धीरा, नगरोटा, पालमपुर, बैजनाथ और मंडी जिले के जोगिंद्रनगर एवं धर्मपुर उपमंडल के कई इलाकों के लिए भी प्रतिदिन बड़ी संख्या में अंतर्राज्यीय एवं लोकल बसों की आवाजाही होती है। इसके बावजूद यहां बस स्टैंड के निर्माण स्थल को लेकर सहमति नहीं बन पाई और इस महत्वपूर्ण कस्बे में कई दशकों से अस्थायी बस स्टैंड से ही बसों की आवाजाही संचालित होती रही।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने जब प्रदेश की कमान संभाली तो उन्होंने अधिकारियों को सुजानपुर में बस स्टैंड के निर्माण की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार स्थानीय विधायक कैप्टन रणजीत सिंह द्वारा स्थानीय निवासियों एवं व्यापारियों के साथ व्यापक चर्चा के बाद सुजानपुर में डोली नामक स्थान पर बस स्टैंड के निर्माण का निर्णय लिया गया। इसके निर्माण पर सहमति बनने के बाद मुख्यमंत्री ने 12 मार्च 2025 को सुजानपुर के राष्ट्र स्तरीय होली उत्सव के शुभारंभ के दिन ही इस बस स्टैंड का शिलान्यास भी कर दिया।
आजकल इस बहुप्रतिक्षित बस स्टैंड का निर्माण कार्य तेजी से जारी है, जिस पर लगभग 5.45 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। अब वह दिन दूर नहीं हैं, जब सुजानपुर में एक सुंदर अंतर्राज्यीय बस स्टैंड बनकर तैयार हो जाएगा। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के दृढ़ संकल्प और दूरदर्शी सोच के कारण ही यह संभव हो पाया है।




