धर्म/ संस्कृति

स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवा:, स्वस्ति ना पूषा विश्ववेदा:, स्वस्ति न स्तारक्ष्यो अरिष्टनेमि स्वस्ति नो बृहस्पति र्दधातु।

पौराणिक कथा: शिव प्रतिमा के सामने ही क्यों विराजित होते है नंदी ?

भगवान शिव के वाहन नंदी से सम्बंधित कहानी जिससे हमें पता चलेगा की नंदी क्यों और कैसे महादेव की सवारी बनें? और शिव प्रतिमा के सामने ही क्यों विराजित होते है नंदी ?  शिलाद मुनि के ब्रह्मचारी हो...

"सायर उत्सव" खुशहाली और समृद्धि का पर्व

हिमाचल: तीज-त्यौहार हमारी संस्कृति के परिचायक ; “सायर उत्सव” खुशहाली और समृद्धि का पर्व

सायर उत्सव  त्यौहार और मेले हिमाचल के लोगों के सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऋतुओं ने भी त्यौहारों को विशिष्ट स्वरूप देने में भूमिका निभाई है। हरेक ऋतु से जुड़े हुए त्यौहार हैं।...

एक रात के लिए पुनर्जीवित हुए थे महाभारत युद्ध में मारे गए वीर

महाभारत युद्ध में मारे गए वीर, हुए थे एक रात के लिए पुनर्जीवित

आज हम आपको महाभारत से जुडी एक अदभुत घटना के बारे में बता रहे है जब महाभारत युद्ध में मारे गए समस्त शूरवीर जैसे की भीष्म, द्रोणाचार्य, दुर्योधन, अभिमन्यु, द्रौपदी के पुत्र, कर्ण, शिखंडी आदि एक...

रामायण : आखिर क्यों हंसने लगा मेघनाद का कटा सिर?

रामायण : आखिर क्यों हंसने लगा मेघनाद का कटा सिर?

महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित हिंदू धर्मग्रंथ ‘रामायण’ में उल्लेख मिलता है कि रावण के बेटे का नाम मेघनाद था। उसका एक नाम इंद्रजीत भी था। दोनों नाम उसकी बहादुरी के लिए दिए गए थे। दरअसल मेघनाद,...

"किन्नौर" किन्नर कैलाश की विशेष महत्ता के साथ संस्कृति, धर्म-परम्परा, रीति-रिवाज व पर्यटन के लिए भी विख्यात

“किन्नौर” किन्नर कैलाश की विशेष महत्ता के साथ संस्कृति, धर्म-परम्परा, रीति-रिवाज व पर्यटन के लिए भी विख्यात

मान्यता : किन्नर कैलाश केवल भगवान शिव का ही निवास स्थान नहीं, बल्कि यहां पर स्वर्ग का राज है “किन्नौर”  शिव की धरती से जहां विख्यात है वहीं किन्नौर अपनी संस्कृति, धर्म-परम्परा, रीति-रिवाजों,...

हिमाचल : पर्यटन को विकसित करने के लिए 1900 करोड़ स्वीकृत, स्थानीय युवाओं के लिए बढ़ेंगे रोज़गार के अवसर

हिमाचल: ऐतिहासिक, पारम्परिक व सांस्कृतिक पहचान दर्शाती चौपाल की “वेशभूषा”

देश की बात हो या प्रदेश की उसकी जीवन शैली की पहचान वहां के रहने वाले लोगों, वेशभूषा, खानपान व आभूषणों से होती है। हांलाकि काफी समय से हमारे कई पारम्परिक परिधान और आभूषण लुप्त होते जा रहे हैं।...

श्री अयोध्यानाथ मन्दिर रामपुर बुशहर रियासत के शाही मन्दिरों में से एक

रानी अपने मायके से श्री राम की मूर्ति साथ लेकर आईं पुरातात्त्विक महत्त्व की संरचना श्री अयोध्यानाथ मन्दिर भी जिला के रामपुर उपमण्डल मुख्यालय में स्थित है। यह मन्दिर शिमला से 130 किलोमीटर की...