हिम धरोहर व इतिहास

मृकुला-प्राचीन मन्दिर बौद्ध तांत्रिक देवी वज्रवराह को समर्पित रहा है

सातवीं शताब्दी से लाहौल-स्पीति के उदयपुर गांव में बसा “मृकुला देवी मंदिर”

“मृकुला मंदिर” में कलकत्ते वाली मां काली हुई थीं अवतरित कश्मीरी कन्नौज शैली में बना है माँ मृकुला का मंदिर मंदिर में लकड़ी की दीवारों पर एक ओर महाभारत के दृश्य, दूसरी तरफ रामायण के प्रसंग...

देव स्थली व प्राकृतिक सौंदर्य से विभोर “किन्नौर”

“किन्नौर” का प्राचीन इतिहास किन्नौरों को ‘खुनु-पा’ कहते हैं तिब्बती लोग किन्नौर को कनौर, कनावर, कुनावुर, कुनावर तथा कनौरिंङ भी कहते हैं। स्थानीय बोली में इसे कनौरिंङ कहा जाता है।...

पुरानी पहाड़ी रियासत के आपसी संबंध और सीमा विवाद "बुशैहर"

हिमाचल इतिहास: पुरानी पहाड़ी रियासत के आपसी संबंध और सीमा विवाद “बुशैहर”

शिमला की पहाड़ी रियासतों में सबसे बड़ी रियासत बुशैहर ”बशहर” हिमाचल प्रदेश का अपना प्राचीन इतिहास रहा है। वहीं अगर पुरानी पहाड़ी रियासतों  के आपसी संबंध और सीमा विवाद की बात की जाए तो वो भी...

हिमाचल "बौद्ध धर्म" इतिहास, गलेशियर में छिपी नदी की तरह

हिमाचल: बौद्ध धर्म के पुनरूत्थान के सम्बंध में गुगे राज्य का अभूतपूर्व योगदान

हिमाचल प्रदेश में बौद्ध धर्म की इतिहासिक श्रृंखला साक्ष्य के अभाव में बहुत अस्पष्ट है। चीनी यात्री ह्यूनत्सांग ने ने जो बौद्धमठ कुल्लू और कांगड़ा में देखे, उनके अवशेष अब विद्यमान नहीं हैं,...

हिन्दू इतिहास की कई कहानियां अपने में समेटे हुए है कांगड़ा किला

इतिहास की कई कहानियां अपने में समेटे हुए “कांगड़ा किला”

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा घाटी में स्थित कांगड़ा किला और कांगड़ा राज्य की सीमाओं के नजदीक सुजानपुर किला अपनी ख़ास अहमियत लिए हुए है। कांगड़ा हिमाचल प्रदेश का ऐतिहासिक नगर व जिला है। प्राचीन...

पारम्परिक परिधानों व आभूषणों से सुशोभित हिमाचल की छटा बिखेरता पहाड़ी लोकनृत्य

हिमाचल की संस्कृति को संजोये प्रदेश के हर जिले के अनूठे लोकनृत्य

हिमाचल का विश्व विख्यात “पहाड़ी लोकनृत्य” हिमाचल प्रदेश के लोक नृत्य हिमाचल में लोकनृत्य की अपनी ही एक अनोखी परम्परा है। प्रदेश के हर जिले में अलग-अलग भाषाएं, संस्कृति, त्यौहार, मेले,...

प्रदेश की आर्थिकी में पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका

विशिष्ट वेशभूषा का अलग अस्तित्व “गद्दी” जनजाति

गद्दी जनजाति हिमाचल प्रदेश की पश्चिमी सीमा पर पाई जाती है। इनकी क़द-काठी राजस्थान की मरुभूति के राजपूत समाज से मिलती है। यह भी अपने आप को राजस्थान के ‘गढवी’ शासकों के वंशज बातते हैं। इस...