केंद्र के नए पेट्रोल-डीजल नियंत्रण आदेश से प्रदेश के बागवान परेशान, राहत दे सरकार – कुलदीप राठौर
केंद्र के नए पेट्रोल-डीजल नियंत्रण आदेश से प्रदेश के बागवान परेशान, राहत दे सरकार – कुलदीप राठौर
शिमला: पेट्रोल पंपों पर कैन और बोतलों में पेट्रोल-डीजल देने पर लगी पाबंदी को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए है। साथ ही उन्होंने प्रदेश सरकार से इस मुद्दे को केंद्र के समक्ष मजबूती से रखने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस फैसले का सबसे अधिक असर हिमाचल प्रदेश के किसान और बागवानों पर पड़ रहा है, जो पहले ही बढ़ती लागत, मौसम की मार और अन्य चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। राठौर ने सोमवार को शिमला में मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि हिमाचल की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा कृषि और बागवानी पर आधारित है। प्रदेश के लाखों परिवार खेती-बागवानी से अपनी आजीविका चलाते हैं। आधुनिक समय में खेती और बागवानी के अधिकांश कार्य मशीनों के माध्यम से किए जाते हैं। स्प्रे मशीन, पावर टिलर, घास काटने की मशीन, लकड़ी काटने के उपकरण, पानी की मोटरें और कई अन्य कृषि यंत्र पेट्रोल व डीजल से संचालित होते हैं। ऐसे में यदि किसानों और बागवानों को कैन या अन्य पात्रों में ईंधन उपलब्ध नहीं होगा तो उनके लिए इन मशीनों का उपयोग करना कठिन हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पहाड़ी प्रदेश होने के कारण हिमाचल की परिस्थितियां मैदानी राज्यों से अलग हैं। प्रदेश के अधिकांश बाग और खेत दूरदराज तथा दुर्गम क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां तक वाहन या मशीनें सीधे पेट्रोल पंपों तक नहीं पहुंच सकतीं। किसान आमतौर पर कैन में पेट्रोल या डीजल भरवाकर अपने खेतों और बागानों तक ले जाते हैं। अब यदि उन्हें यह सुविधा नहीं मिलेगी तो कृषि और बागवानी कार्यों पर सीधा असर पड़ेगा। विशेष रूप से सेब सीजन और अन्य फसलों के महत्वपूर्ण समय में इस तरह की पाबंदियां किसानों की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। राठौर ने बताया कि प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के समक्ष भी इस विषय को उठाया है और जिलाधीश शिमला से भी इस संबंध में चर्चा हुई है। राठौर ने कहा कि यह केवल एक विभाग या राज्य का मामला नहीं है, बल्कि किसानों और बागवानों के हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। इसलिए प्रदेश सरकार को केंद्र सरकार के समक्ष इस विषय को प्राथमिकता से उठाना चाहिए और किसानों के लिए राहत सुनिश्चित करनी चाहिए।
राठौर ने कहा कि बागवानों को नियमित रूप से स्प्रे करना पड़ता है, जबकि खेतों में जुताई और अन्य कार्यों के लिए पावर टिलर जैसे उपकरणों का उपयोग किया जाता है। यदि इन मशीनों के लिए समय पर ईंधन नहीं मिलेगा तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि खेती और बागवानी पहले ही महंगी होती जा रही है, ऐसे में अतिरिक्त प्रशासनिक प्रतिबंध किसानों की परेशानी को और बढ़ाने का काम कर रहे हैं।
राठौर ने केंद्र सरकार से भी सवाल किया कि जब बार-बार यह कहा जा रहा है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है तथा पर्याप्त भंडार उपलब्ध है, तो फिर ऐसी पाबंदियां लगाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। उन्होंने कहा कि यदि ईंधन की उपलब्धता सामान्य है तो किसानों और बागवानों को कैन में ईंधन लेने से रोकना समझ से परे है। इससे लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में चिंता बढ़ रही है।
राठौर ने कहा कि हिमाचल और पंजाब जैसे कृषि एवं बागवानी प्रधान राज्यों में इस प्रकार के फैसलों का असर सीधे किसानों की आय और उत्पादन पर पड़ता है। इसलिए केंद्र सरकार को जमीनी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपने निर्णय की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि किसानों और बागवानों के लिए विशेष व्यवस्था की।