उपायुक्त किरण भड़ाना ने रिबन काटकर जनता को समर्पित किया नया पुल, घाटी के किसानों, बागवानों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों को मिली बड़ी राहत
केलांग: जिला लाहौल-स्पीति के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में संसारीनाला–किलाड़–थिरोट–तांदी सड़क पर जाहलमा नाला के ऊपर निर्मित 120 फुट लंबे स्थायी बैली ब्रिज का पिछले कल (शुक्रवार) को विधिवत लोकार्पण किया गया। उपायुक्त लाहौल-स्पीति किरण भड़ाना ने रिबन काटकर लगभग 2 करोड़ 50 लाख रुपये की लागत से निर्मित इस पुल को आमजन को समर्पित किया तथा नए पुल पर वाहनों की आवाजाही का शुभारंभ करवाया। फिलहाल तकनीकी दृष्टि से हल्के वाहनों के लिए यातायात प्रारंभ कर दिया गया है, जबकि लगभग एक सप्ताह बाद भारी वाहनों की आवाजाही भी शुरू कर दी जाएगी।
इस अवसर पर उपायुक्त किरण भड़ाना ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के अधिकारियों, अभियंताओं, कर्मचारियों एवं श्रमिकों को रिकॉर्ड समय में पुल निर्माण कार्य पूर्ण करने पर हार्दिक बधाई देते हुए उनके समर्पण, परिश्रम और कार्यकुशलता की सराहना की। उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, प्रतिकूल मौसम और चुनौतीपूर्ण हालात के बावजूद जिस गति और गुणवत्ता के साथ इस पुल का निर्माण किया गया है, वह इंजीनियरिंग दक्षता, सेवा भावना और कर्तव्यनिष्ठा का उत्कृष्ट उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि 26 मई 2026 को जिले में हुई भारी वर्षा एवं भूस्खलन के कारण जाहलमा नाला में आई भीषण बाढ़ से यहां स्थित पुल बह गया था। इसके चलते स्थानीय लोगों, पर्यटकों तथा विशेष रूप से क्षेत्र के किसानों और बागवानों को अपनी उपज समय पर मंडियों तक पहुंचाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। नए पुल के निर्माण के साथ अब क्षेत्र की यातायात व्यवस्था पुनः सुचारु हो गई है और कृषि एवं बागवानी उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में लगने वाला समय भी काफी कम हो जाएगा।
उपायुक्त ने बताया कि लगभग 2 करोड़ 50 लाख रुपये की लागत से निर्मित इस 120 फुट लंबे बैली ब्रिज का निर्माण सीमा सड़क संगठन द्वारा दिन-रात निरंतर कार्य करते हुए रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया। उन्होंने कहा कि यह पुल केवल दो स्थानों को जोड़ने वाला ढांचा नहीं, बल्कि लोगों की आशाओं, आजीविका और विकास को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण माध्यम है।
इस दौरान उपायुक्त ने पुल निर्माण में उल्लेखनीय योगदान देने वाले मजदूरों तथा कनिष्ठ अभियंताओं को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि इन कर्मयोगियों ने कठिनतम परिस्थितियों में साहस, समर्पण और अथक परिश्रम का परिचय देते हुए न केवल पुल का निर्माण किया, बल्कि निर्माण अवधि के दौरान वैकल्पिक अस्थायी मार्ग को भी निरंतर संचालित रखा, जिससे आमजन को न्यूनतम असुविधा हुई।















