ताज़ा समाचार

सोलन: नौणी विश्वविद्यालय ने विकास के नए चरण की ओर बढ़ाए कदम; आत्मनिर्भरता, नवाचार और वैश्विक विस्तार पर जोर

उद्यमिता, अनुसंधान और व्यवसायीकरण से जुड़ी नई सुविधाओं का उद्घाटन; उत्कृष्टता केंद्रों सहित कई भावी परियोजनाओं की आधारशिला रखी

नौणी: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी ने संस्थागत विकास के नए चरण की ओर कदम बढ़ाते हुए अपनी अनुसंधान क्षमताओं को सुदृढ़ करने, आय सृजन के नए स्रोत विकसित करने, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और शैक्षणिक गतिविधियों का विस्तार करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। विश्वविद्यालय को अधिक आत्मनिर्भर और भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम बनाने की दीर्घकालिक सोच के तहत बुधवार को कई नई सुविधाओं का उद्घाटन किया गया तथा महत्वपूर्ण अनुसंधान, शैक्षणिक और संस्थागत परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई। कुलपति प्रो. हरमिंदर सिंह बवेजा ने विश्वविद्यालय के वैधानिक अधिकारियों, विभागाध्यक्षों और वैज्ञानिकों की उपस्थिति में इन पहलों का शुभारंभ किया।उद्यमिता और अनुसंधान के व्यवसायीकरण को बढ़ावा देते हुए कुलपति ने भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के वित्तीय सहयोग से विश्वविद्यालय में स्थापित मशरूम, सब्जियों, फलों, मसालों और औषधीय जड़ी-बूटियों के प्रसंस्करण हेतु कॉमन इनक्यूबेशन सेंटर के प्रसंस्करण केंद्र का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया। यह केंद्र उत्पाद विकास, मूल्य संवर्धन, कौशल विकास और खाद्य प्रसंस्करण आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करेगा। इससे विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, किसानों और नए उद्यम स्थापित करने के इच्छुक युवाओं को लाभ मिलेगा।

इसके अतिरिक्त, वाइन निर्माण और संबंधित तकनीकों में अनुसंधान, व्यावहारिक प्रशिक्षण तथा तकनीकी विकास को सुदृढ़ करने के लिए एनोलॉजी प्रयोगशाला का भी उद्घाटन किया गया। इन सुविधाओं से अनुसंधान और उसके व्यावसायिक उपयोग के बीच की दूरी कम करने के साथ-साथ उद्यमिता और आय सृजन के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है।

इस अवसर पर हर्बल उत्पाद विकास एवं विक्रय केंद्र का भी उद्घाटन किया गया, जिसका उद्देश्य औषधीय एवं अन्य उपयोगी वनस्पतियों से तैयार उत्पादों के विकास, मूल्य संवर्द्धन और विपणन को बढ़ावा देना है। विश्वविद्यालय के हर्बेरियम (पादप संग्रहालय) के डिजिटलीकरण की सुविधा का भी शुभारंभ किया गया। यह पहल बहुमूल्य पादप नमूनों और उनसे संबंधित वैज्ञानिक जानकारी के संरक्षण तथा उनकी सुलभता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।

हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा वित्तपोषित कैनबिस (भांग) अनुसंधान केंद्र का भी उद्घाटन किया गया। यह केंद्र औषधीय प्रयोजनों के लिए कैनबिस के वैज्ञानिक अध्ययन, गुणवत्ता मूल्यांकन, संरक्षण और सतत उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित अनुसंधान एवं विकास सुविधा के रूप में कार्य करेगा।

कुलपति ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) नीति केंद्र का भी उद्घाटन किया। यह केंद्र नीतिगत अनुसंधान को प्रोत्साहित करने तथा सार्वजनिक संस्थानों और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में कार्य करेगा।

विद्यार्थियों के समग्र विकास की दिशा में एक नई पहल करते हुए सत्यनंद स्टोक्स पुस्तकालय में ब्रह्माकुमारी संस्थान के सहयोग से स्थापित ‘थॉट लैब’ का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी की सिस्टर सुषमा एवं लोग उपस्थित रहें। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को चिंतन, सकारात्मक सोच, विचारों के आदान-प्रदान और व्यक्तित्व के समग्र विकास के लिए एक उपयुक्त मंच उपलब्ध करवाना है।

मौजूदा सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ विश्वविद्यालय ने भविष्य की अनुसंधान एवं शैक्षणिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी।

इनमें जैव प्रौद्योगिकी विभाग में प्लांट टिश्यू कल्चर सुविधा, बीज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग में हिमालयी पारंपरिक बीज विरासत केंद्र तथा सिल्वीकल्चर एवं कृषि वानिकी विभाग में अपशिष्ट से संपदा (वेस्ट टू वेल्थ) उत्कृष्टता केंद्र शामिल हैं। इन परियोजनाओं से जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा, पारंपरिक बीज संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित होगा तथा अपशिष्ट पदार्थों के वैज्ञानिक उपयोग से मूल्यवान उत्पाद विकसित करने की संभावनाएं बढ़ेंगी। कीट विज्ञान विभाग में मधुमक्खी अनुसंधान उत्कृष्टता केंद्र की भी आधारशिला रखी गई। यह केंद्र मधुमक्खी पालन और संबंधित क्षेत्रों में अनुसंधान, प्रशिक्षण तथा तकनीकी विकास को नई दिशा देगा।

विश्वविद्यालय की शैक्षणिक पहुंच का विस्तार करने की दिशा में दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षण केंद्र की आधारशिला रखना भी एक महत्वपूर्ण कदम रहा। इस केंद्र का उद्देश्य विश्वविद्यालय के विशिष्ट शैक्षणिक कार्यक्रमों, विशेषज्ञता और ज्ञान को भौगोलिक सीमाओं से परे पहुंचाना है, ताकि देश-विदेश के विद्यार्थियों और पेशेवरों को ऑनलाइन तथा दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से अध्ययन के अवसर उपलब्ध हो सकें।

विश्वविद्यालय के औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, नेरी, हमीरपुर में प्रशिक्षण, प्लेसमेंट एवं वैश्विक संपर्क उत्कृष्टता केंद्र की भी आधारशिला रखी गई। इस केंद्र का उद्देश्य उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाना, विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता में सुधार करना तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करियर के अवसर उपलब्ध करवाना है।

इसके अतिरिक्त, कृषि संग्रहालय की भी आधारशिला रखी गई। इस संग्रहालय के माध्यम से कृषि, बागवानी और वानिकी के विकासक्रम तथा समाज और अर्थव्यवस्था में इनके योगदान को प्रदर्शित किया जाएगा।

विद्यार्थियों के लिए बेहतर अध्ययन वातावरण उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण संगठन के अंतर्गत प्रत्येक छात्रावास में स्थापित समर्पित ‘सुख-संसार रीडिंग एंड स्टडी लाउंज’ का भी उद्घाटन किया गया। इन सुविधाओं से विद्यार्थियों को पठन-पाठन, और बौद्धिक विकास के लिए बेहतर वातावरण मिलेगा।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. हरमिंदर सिंह बवेजा ने कहा कि ये सभी पहल केवल नए भवनों और भौतिक सुविधाओं के निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विश्वविद्यालय के समग्र विकास की व्यापक सोच को दर्शाती हैं। इनक्यूबेशन एवं प्रसंस्करण सुविधाओं, विशिष्ट अनुसंधान केंद्रों, डिजिटल शिक्षा, उद्योगों के साथ साझेदारी और विद्यार्थी विकास में निवेश के माध्यम से विश्वविद्यालय अपनी गतिविधियों में विविधता लाने, अतिरिक्त संसाधन जुटाने, शैक्षणिक प्रतिष्ठा को सुदृढ़ करने तथा वित्तपोषण के पारंपरिक स्रोतों पर निर्भरता कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि ये पहल विश्वविद्यालय को अधिक आत्मनिर्भर, नवाचार आधारित और वैश्विक स्तर पर जुड़ी हुई संस्था बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इससे बागवानी, वानिकी और संबद्ध क्षेत्रों के विकास में विश्वविद्यालय का योगदान और अधिक सशक्त होगा।

सम्बंधित समाचार

Comments are closed