डॉ. शांडिल ने केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में वर्चुअल माध्यम से लिया भाग
डॉ. शांडिल ने केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में वर्चुअल माध्यम से लिया भाग
शिमला: स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने आज केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार की अध्यक्षता में आयोजित दो दिवसीय विभागीय शिखर सम्मेलन ‘समावेशी नीति संकल्प’ की तैयारियों को लेकर आयोजित बैठक में वर्चुअल माध्यम से भाग लिया। भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा 18-19 नवंबर, 2026 को सुषमा स्वराज भवन, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली में इस शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता क्षेत्र की प्रमुख प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श करने के लिए एक साझा मंच प्रदान करना तथा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों की पहुंच, कवरेज और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए ठोस उपायों की पहचान करना है। बैठक के दौरान डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन हिमाचल प्रदेश को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता के क्षेत्र में अपनी अग्रणी पहलों और नवोन्मेषी प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा। प्रदेश की इन पहलों से जमीनी स्तर पर सकारात्मक एवं सार्थक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन के माध्यम से प्रदेश को न केवल अपने अनुभवों, उपलब्धियों और नवाचारों को अन्य राज्यों के साथ साझा करने का अवसर मिलेगा, बल्कि केंद्र सरकार तथा अन्य राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपनाई जा रही श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों से सीखने का भी अवसर प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि ज्ञान एवं अनुभवों का यह आदान-प्रदान नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन को मजबूत बनाने, सेवाओं की बेहतर आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लक्षित पात्र व्यक्तियों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगा। शिखर सम्मेलन में चार प्रमुख विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा। इनमें नशा मुक्त भारत के लिए रोकथाम एवं नशे की मांग में कमी लाने की रणनीतियों का पुनर्निर्धारण, सुलभ छात्रवृत्तियां एवं सशक्त विद्यार्थी, दिव्यांगता के बोझ को कम करने के लिए प्रारंभिक हस्तक्षेप तथा ‘विकसित भारत के लिए सुगम्य भारत’ शामिल हैं। इसके अंतर्गत दिव्यांगजनों के लिए सुगम्यता, समावेशिता और बाधारहित वातावरण के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह शिखर सम्मेलन केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को और सुदृढ़ करेगा, आपसी अनुभवों एवं श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करेगा तथा समावेशी विकास और सामाजिक सशक्तिकरण सुनिश्चित करने के लिए नवोन्मेषी एवं प्रभावी दृष्टिकोण अपनाने में सहायक होगा।