CM सुक्खू ने स्पीति घाटी में प्रदेश के पहले बैटरी से संचालित सौर ऊर्जा संयंत्र का किया लोकार्पण
CM सुक्खू ने स्पीति घाटी में प्रदेश के पहले बैटरी से संचालित सौर ऊर्जा संयंत्र का किया लोकार्पण
लाहौल-स्पीति में 116.28 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास किए
शिमला:मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज हिमाचल प्रदेश के जिला लाहौल-स्पीति के दुर्गम और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण जनजातीय सीमावर्ती क्षेत्रों में 116.28 करोड़ रुपये लागत की विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास किए। मुख्यमंत्री ने स्पीति घाटी के रोंगटोंग में बैटरी स्टोरेज से संचालित प्रदेश के पहले सौर ऊर्जा संयंत्र का लोकार्पण किया। काजा में 4.42 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस 2 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र के साथ 1 मेगावाट-आवर क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली स्थापित की गई है। समुद्र तल से लगभग 3,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस संयंत्र से प्रतिवर्ष लगभग 36 लाख यूनिट बिजली उत्पादन होने की संभावना है। इस परियोजना का निर्माण कार्य 30 मई, 2023 को शुरू हुआ था और दिसंबर, 2024 में इसका संचालन शुरू हो गया था। वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 तथा वर्तमान वित्त वर्ष में 30 सितंबर, 2026 तक इस संयंत्र से 22,58,752 यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ। यह परियोजना दूरदराज के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सौर ऊर्जा की संभावनाओं को इंगित कर रही है। साथ ही यह हिमालयी क्षेत्रों में उपयुक्त तकनीक एवं प्रभावी संचालन प्रणालियों के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने का सफल उदाहरण भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सौर ऊर्जा परियोजना स्पीति घाटी में विकास की नई परिभाषा स्थापित कर रही है। उन्होंने कहा कि रोंगटोंग जलविद्युत परियोजना को पूरी तरह से कार्यशील बनाया जाएगा, जिसके लिए 6 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। वर्ष 2023 में स्पीति के अपने पहले दौरे का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय क्षेत्र के लोगों ने बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को लेकर चिंताएं व्यक्त की थीं। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा परियोजना का संचालन शुरू होना इन समस्याओं के समाधान और क्षेत्र की विद्युत अधोसंरचना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री ने लाहौल-स्पीति जिला के काजा तथा किन्नौर जिला के समदो में 47.95 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले 66/22 केवी विद्युत उप-केंद्रों की आधारशिला भी रखी। उन्होंने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा से लगभग 100 किलोमीटर के एरियल डिस्टेंस पर स्थित ये उप-केंद्र सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी अधोसंरचना को मजबूत करेंगे और काजा, समदो तथा आसपास के क्षेत्रों में अधिक विश्वसनीय, स्थिर एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद करेंगे। वर्तमान में स्पीति क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति मुख्य रूप से किन्नौर जिले के पूह स्थित 66/22 केवी उप-केंद्र से लगभग 200 किलोमीटर लंबे 22 केवी पूह-काजा फीडर के माध्यम से की जाती है। इस फीडर की अधिक लंबाई और इससे जुड़े कई कनेक्शन के कारण वोल्टेज में उतार-चढ़ाव, तकनीकी बिजली हानि तथा नियमित विद्युत आपूर्ति बनाए रखने जैसी समस्याएं सामने आती हैं और प्रतिकूल मौसम के दौरान ये समस्याएं अधिक गंभीर हो जाती हैं। प्रस्तावित उप-केंद्र विद्युत वितरण नेटवर्क को सुदृढ़ करने, वोल्टेज नियंत्रण में सुधार लाने, तकनीकी हानियों को कम करने और स्थानीय विकास, पर्यटन और आवश्यक सेवाओं के कारण बढ़ रही बिजली की मांग की मांग को पूरा करने में सहायक साबित होंगे। यह परियोजना सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि रक्षा एवं सुरक्षा से संबंधित प्रतिष्ठानों, सीमावर्ती बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षण संस्थानों और अन्य सार्वजनिक सेवाओं के लिए विश्वसनीय बिजली आपूर्ति अत्यंत आवश्यक है। क्षेत्र में बेहतर विद्युत अधोसंरचना के निर्माण से स्पीति और किन्नौर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लोगों को राहत मिलने की सम्भावना है। इन परियोजनाओं से क्षेत्र में प्रतिकूल जलवायु और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बिजली आपूर्ति तथा बुनियादी ढांचे के रखरखाव में आने वाली चुनौतियों से लोगों को निजात मिलेगी। मुख्यमंत्री ने लाहौल-स्पीति जिले की पिन घाटी में 39.55 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित चिदांग-तंगती खर तेलिंग सड़क परियोजना का भी लोकार्पण किया। इस परियोजना से कच्ची सड़क को बेहतर और हर मौसम में उपयोग योग्य सड़क में परिवर्तित किया गया है, इससे दूरदराज के जनजातीय क्षेत्रों के लोगों को सुरक्षित, सुगम और अधिक विश्वसनीय सड़क संपर्क उपलब्ध होगी। सड़क निर्माण में सुरक्षा की दृष्टि से क्रैश बैरियर, पैरापेट, संकेतक और गति अवरोधक जैसी सुविधाएं शामिल की गई हैं। प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण पिन घाटी में बेहतर सड़क सुविधा से पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ गांवों तक पहुंचना आसान होगा और स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित होंगे। इससे विशेष रूप से हरी मटर और बीज आलू सहित कृषि उत्पादों तथा आवश्यक वस्तुओं के परिवहन में भी सुविधा मिलेगी। बेहतर सड़क संपर्क से स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षण संस्थानों, प्रशासनिक कार्यालयों और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच भी आसान होगी। मुख्यमंत्री ने स्पीति घाटी में 24.36 करोड़ रुपये की लागत से 12 किलोमीटर लंबे तांगयुत-हिक्किम सड़क मार्ग के उन्नयन कार्य का भी लोकार्पण किया। यह परियोजना दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और अत्यधिक ठंडे मौसम वाले इस ऊंचाई वाले क्षेत्र में सड़क संपर्क सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। बेहतर सड़क सुविधा से कृषि उत्पादों और आवश्यक वस्तुओं के परिवहन में सुविधा, सुगम्य यात्रा सुविधा तथा आवश्यक सेवाओं तक त्वरित पहुंच सुनिश्चित होगी। इससे उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित डाकघर के लिए प्रसिद्ध हिक्किम गांव तक संपर्क भी बेहतर होगा और पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी। इस परियोजना से स्थानीय आजीविका को विशेष बल मिलेगा तथा पर्यटन और इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर सृजित होंगे जिससे दूरदराज के जनजातीय समुदायों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।