मुख्यमंत्री सुक्खू हिमाचल की सरकारी मशीनरी, संसाधन कांग्रेस हाईकमान को खुश करने के लिए नहीं : राकेश जम्वाल

शिमला : भाजपा विधायक राकेश जम्वाल ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर निशाना साधते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरी अब खुलकर सामने आने लगी है। प्रदेश कांग्रेस का संगठन इतना कमजोर हो चुका है कि मुख्यमंत्री को ही हर विरोध प्रदर्शन में उतरकर मोर्चा संभालना पड़ रहा है। सवाल यह है कि क्या कांग्रेस संगठन अपने राजनीतिक कार्यक्रमों का नेतृत्व करने में असमर्थ है, या फिर मुख्यमंत्री पर हाईकमान को खुश करने और अपने राजनीतिक रिपोर्ट कार्ड में नंबर बढ़वाने का दबाव है?

राकेश जम्वाल ने कहा कि मुख्यमंत्री का पद किसी सामान्य राजनीतिक कार्यकर्ता की भूमिका तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण संवैधानिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री पूरे प्रदेश का नेतृत्व करते हैं और उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति और जनता की समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करें। लेकिन मुख्यमंत्री सुक्खू अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों और पद की गरिमा को दरकिनार कर बार-बार राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों में शामिल हो रहे हैं। मुख्यमंत्री का इस तरह छात्र संगठन के नेता की तरह हर राजनीतिक मोर्चे पर उतरना उनकी प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध करना लोकतंत्र का अधिकार है, लेकिन मुख्यमंत्री और एक सामान्य राजनीतिक कार्यकर्ता की भूमिका में अंतर होता है। यदि प्रदेश कांग्रेस का संगठन मजबूत है, तो उसे अपने आंदोलनों और राजनीतिक कार्यक्रमों का नेतृत्व स्वयं करना चाहिए। हर मुद्दे पर मुख्यमंत्री का आगे आना यह सवाल पैदा करता है कि प्रदेश में सरकार और संगठन की जिम्मेदारी आखिर कौन निभा रहा है। क्या मुख्यमंत्री हिमाचल की जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं या कांग्रेस हाईकमान के सामने अपनी राजनीतिक सक्रियता साबित करने में लगे हैं?

राकेश जम्वाल ने दिल्ली में राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल होने के लिए सरकारी हेलीकॉप्टर के कथित इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है और सरकार स्वयं सीमित संसाधनों की बात करती है। ऐसे में जनता को यह जानने का अधिकार है कि सरकारी हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया, यात्रा का खर्च किस मद से वहन हुआ और क्या इसके लिए निर्धारित नियमों का पालन किया गया।

उन्होंने कहा कि हिमाचल के संसाधन प्रदेश की जनता की अमानत हैं, किसी राजनीतिक दल या उसके हाईकमान की निजी संपत्ति नहीं। यदि सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल पार्टी के राजनीतिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए किया गया है, तो सरकार को संबंधित खर्च और नियमों के अनुपालन की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। सरकारी मशीनरी का उपयोग जनहित को प्राथमिकता देकर होना चाहिए, न कि राजनीतिक हित साधने के लिए। पारदर्शिता और जवाबदेही किसी भी सरकार की बुनियादी जिम्मेदारी है।

राकेश जम्वाल ने संवैधानिक पदों की गरिमा के विषय पर कहा कि मुख्यमंत्री को अपने पद की मर्यादा के साथ-साथ दूसरे संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों और संस्थाओं का सम्मान भी बनाए रखना चाहिए। राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन संवैधानिक पदों के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा नहीं है। संवैधानिक पद पर बैठकर दूसरे संवैधानिक पदों की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली बयानबाजी उचित नहीं ठहराई जा सकती। लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है, लेकिन उसके साथ मर्यादा और जिम्मेदारी भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को यह समझना चाहिए कि प्रदेश की जनता ने उन्हें हिमाचल चलाने की जिम्मेदारी दी है, न कि हर राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल होकर हाईकमान के सामने अपनी सक्रियता साबित करने की। हिमाचल के संसाधनों, सरकारी मशीनरी और संवैधानिक पद की गरिमा को राजनीतिक हितों से ऊपर रखना मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी है। राकेश जम्वाल ने मांग की कि सरकारी हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल से जुड़े तथ्यों और खर्च का विवरण सार्वजनिक किया जाए तथा मुख्यमंत्री प्रदेश की जनता के सामने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करें।

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