शिमला: उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला खलग में सोमवार को बच्चों से विशेष संवाद किया। उपायुक्त ने कहा कि बच्चों के जीवन में माता-पिता भाई-बहन दादा-दादी की अहम भूमिका होती है। सुबह बच्चों को समय पर तैयार करके स्कूल भेजना अपने आप में एक बड़ी जिम्मेदारी है। आज यहां इतने अनुशासित, स्मार्ट और आत्मविश्वास से भरे बच्चे दिखाई दे रहे हैं, तो इसके पीछे सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निश्चित रूप से आपके माता-पिता और परिवार की है। लेकिन हम माता-पिता और परिजनों के प्रयासों को सामान्य समझकर भूल जाते हैं, लेकिन वास्तव में इनके पीछे बहुत मेहनत और चिंता होती है। उन्होंने कहा कि घर में मां की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। वह आपके लिए भोजन तैयार करती है और आपकी पसंद-नापसंद का ध्यान रखती है। लेकिन कई बार हम उसी भोजन में कमियां निकालने लगते हैं। हमें यह समझना चाहिए कि उस भोजन के पीछे मां की मेहनत, समय और स्नेह जुड़ा हुआ है।
जब हम स्कूल में बैठकर पढ़ाई कर रहे होते हैं, तब हमारे पीछे हमारे परिवार का बहुत बड़ा संघर्ष और त्याग होता है। माता-पिता पूरा दिन मेहनत करते हैं और शाम को आपके घर लौटने की प्रतीक्षा करते हैं। इसलिए हमें उनके प्रयासों को समझना चाहिए, उनका सम्मान करना चाहिए और उनके प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए। बच्चों, जीवन में अनुशासन, मेहनत और परिवार के प्रति सम्मान ही आपको आगे बढ़ने की वास्तविक ताकत देते हैं। इसलिए अपने माता-पिता और परिवार के हर सदस्य के योगदान को पहचानिए और उनके सपनों को पूरा करने के लिए पूरी ईमानदारी और लगन से मेहनत कीजिए।
उन्होंने कहा कि बच्चों आपकी लाईफ का स्टेयरिंग आपके अपने हाथ रहे। आपकी जिंदगी को कोई दूसरा व्यक्ति नियंत्रित नहीं कर सकता। आपके माता-पिता, शिक्षक और मार्गदर्शक आपका मार्गदर्शन कर सकते हैं, आपको सही और गलत की पहचान करना सिखा सकते हैं, लेकिन आपके जीवन की दिशा तय करने का अधिकार आपके अपने हाथ में है। जब हमें यह समझ आ जाती है कि हमारे लिए क्या सही है और क्या गलत, क्या अच्छा है और क्या बुरा, तब हम किसी दूसरे व्यक्ति को अपने जीवन का नियंत्रण नहीं लेने देते। जब तक आपके जीवन का स्टीयरिंग आपके अपने हाथ में है, तब तक कोई भी बच्चा गलत रास्ते पर जाने या किसी गलत काम में शामिल होने से स्वयं को रोक सकता है।
उन्होंने कहा कि जब भी आपके जीवन में कोई ऐसी कमजोर घड़ी आए, जब आपको लगे कि आप परेशान हैं या स्वयं को कमजोर महसूस कर रहे हैं, तब एक बार अपने आप से जरूर पूछिए कि मुझे जो जीवन मिला है, वह कितना अनमोल है। यह जीवन हमें दोबारा नहीं मिलता। इसलिए छोटी-छोटी परेशानियों को अपने ऊपर हावी न होने दें। उन्होंने कहा कि जब हमारा शरीर स्वस्थ रहता है, हम नियमित रूप से व्यायाम करते हैं, खेलते हैं, अपनी ऊर्जा को सकारात्मक कार्यों में लगाते हैं, अच्छी किताबें पढ़ने की आदत विकसित करते हैं और अपने अच्छे विचारों एवं अनुभवों को एक-दूसरे के साथ साझा करते हैं, तब हमारे जीवन में सकारात्मकता और खुशी बनी रहती है। उन्होंने कहा कि अपनी भाषा, अपनी संस्कृति और अपनी पहचान पर गर्व कीजिए और जीवन में सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़िए। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में नशे का प्रचलन एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। आपको अपने जीवन से नशे के लिए जगह ही खत्म कर देनी है। न इस बारे में बात करनी है, न इसे सुनना है और न ही ऐसे लोगों के साथ किसी तरह का संपर्क रखना है, जो आपको गलत रास्ते पर ले जा सकते हैं। अगर आप यह संकल्प लेकर चलेंगे, तो निश्चित रूप से आपको अपने जीवन में बहुत सी परेशानियों से बचने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि अपने सपनों को और ऊंचा रखिए। जब आप ऊंचा सपना देखेंगे, तो उस स्तर तक पहुंचने के लिए उसी स्तर की तैयारी भी करेंगे। जीवन में असफलताएं भी आएंगी लेकिन असफलता जीवन का अंत नहीं है। असफलता हमें यह बताती है कि हमें अपनी मेहनत और तैयारी में कहां सुधार करना है।
नशा न करने का दृढ़ संकल्प लें बच्चे – गौरव सिंह
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने बच्चों से संवाद करते हुए कहा कि आज के बच्चों के सामने नशा और मोबाइल दो बड़ी चुनौतियां बन गए हैं। नशे के कारण बच्चे अपना जीवन समाप्त करने की राह पर पहुंच रहे हैं, वहीं मोबाईल के कारण बच्चों में विकर्षण, मानसिक रोग आदि बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि एक बात विशेष रूप से ध्यान रखिए यदि आपको अपने आसपास नशे या किसी गलत गतिविधि से जुड़ी कोई बात दिखाई देती है, तो उसे अपने तक सीमित मत रखिए। अपने प्राचार्य, शिक्षक या कक्षा अध्यापक से इस विषय पर खुलकर चर्चा कीजिए। यदि आपको लगता है कि आपके आसपास का वातावरण ठीक नहीं है या कोई व्यक्ति बच्चों को गलत दिशा में ले जाने का प्रयास कर रहा है, तो इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाए। पुलिस प्रशासन आपकी सुरक्षा और सहायता के लिए हमेशा तत्पर है। इसलिए किसी भी ऐसी समस्या को लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। सही समय पर सही जानकारी देना ही समस्या के समाधान की दिशा में पहला कदम है। उन्होंने कहा कि सभी बच्चें ये संकल्प लें कि हमें नशा करना ही नहीं है और न ही ऐसी जगह पर जाना है जहां पर नशे से जुड़े लोग या फिर दोस्त हो। अगर आप स्वंय दृढ़ संकल्पित होंगे तो कोई भी चुनौती आपको तोड़ नहीं सकती।
अतिरिक्ति जिला दंडाधिकारी प्रोटोकाॅल ज्ञान सागर नेगी ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में जो भी बनना चाहते हैं उसके बारे में सपने देखें और उसे पाने के लिए मेहनत करें। अगर सपने नहीं देखेंगे तो जीवन में अपने संकल्पों को तय नहीं कर पाएंगे।
एसडीएम शिमला ग्रामीण मंजीत शर्मा ने कहा कि अब सरकारी स्कूलों में निजी स्कूलों की तरह बेहतर सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही है। सरकारी स्कूलों में सीबीएसई बोर्ड की सुविधा हो गई है। सरकारी स्कूलों के पास आधारभूत ढांचा मजबूत हुआ है। ऐसे में बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ सर्वागींण विकास पर ध्यान देना चाहिए।
डीएसपी गुलशन नेगी ने कहा कि बच्चे अपने साथ जब भी कोई गलत हो तो सहना न सीखे। बल्कि उसका विरोध करना सीखे और तुरंत शिकायत परिजनों, शिक्षकों को दें। क्योंकि अगर आप ने एक बार गलत पर मौन रहना सीख लिया तो सामने वाला आपके मौन का फायदा उठा सकता है। आजकल बच्चों, लड़कियों के खिलाफ आए दिन अपराध की घटनाएं होती रहती है।
इस अवसर पर स्कूल प्राधानाचार्य कुलभूषण शर्मा सहित स्कूल स्टाफ और बच्चे विशेष तौर पर मौजूद रहे।
स्टेट मेरिट में आने पर मिलेंगे 50 हजार
उपायुक्त अनुपम कश्यप विशेष संवाद के दौरान घोषणा करते हुए कहा कि मार्च 2027 में होने वाली दसवीं और जमा दो की वार्षिक परीक्षा में जो बच्चे स्टेट की मेरिट लिस्ट में आएंगे, उन्हें 50 हजार हजार रुपए की मेधावी प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके साथ ही जो बच्चे इन दोनों बोर्ड की परीक्षाओं में 90 प्रतिशत से अधिक अंक लाएंगे। उनमें से प्रथम स्थान पर 25 हजार द्वितीय स्थान पर 20 हजार और तृतीय स्थान हासिल करने पर 15 हजार रूपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यह सभी प्रोत्साहन राशि उपायुक्त अपने वेतन से बच्चों को देंगे। इस तरह प्रोत्साहन राशि मशोबरा स्कूल के विद्यार्थियों को भी मिल चुकी है। उपायुक्त ने स्कूल परिसर के विस्तारीकरण के लिए 05 लाख रूपये खंड विकास कार्यालय की ओर से मुहैया करवाने का आश्वासन दिया। इसके साथ ही स्कूल की लाइब्रेरी के लिए प्रतियोगी परिक्षाओं से जुड़ी नई किताबों की खरीद के लिए बजट दिया जाएगा।















