स्वयं सहायता समूहों के लिए क्लस्टर स्तर पर स्थापित होंगे प्रोडक्ट सेल आउट हट – उपायुक्त

शिमला: उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने कहा कि जिला शिमला में स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) को स्थायी बाजार उपलब्ध कराने तथा स्थानीय उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने के उद्देश्य से क्लस्टर स्तर पर प्री-फेब्रिकेटेड प्रोडक्ट सेल आउट हट स्थापित किए जाएंगे। यह हट राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway) के किनारे प्रमुख स्थानों पर विकसित किए जाएंगे, ताकि स्थानीय उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा मिल सके और पर्यटकों सहित आम लोगों को एक ही स्थान पर जिला के पारंपरिक उत्पाद उपलब्ध हो सकें।

उपायुक्त आज यहां बचत भवन में आयोजित ग्रामीण विकास विभाग के विकासात्मक कार्यों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस योजना का विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जाए। प्रत्येक क्लस्टर अपने क्षेत्र के श्रेष्ठ एवं विशिष्ट उत्पादों की बिक्री इन हट के माध्यम से करेगा। इस पहल से स्वयं सहायता समूहों की आय में वृद्धि होगी, ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे तथा स्थानीय हस्तशिल्प एवं कृषि आधारित उत्पादों को नया बाजार प्राप्त होगा।
इन सेल आउट हट में शिमला के प्रसिद्ध स्थानीय उत्पाद जैसे सेब, सेब से बने मूल्य वर्धित उत्पाद (जैम, जूस, स्क्वैश, सिरका), राजमा, लाल चावल, हिमाचली देसी घी, शहद, अचार, चटनी, बुरांश (rhododendron) स्क्वैश, मशरूम उत्पाद, अखरोट, प्लम, खुबानी, स्थानीय दालें, ऊनी शॉल, टोपी, मफलर, हस्तनिर्मित ऊनी वस्त्र, बांस एवं लकड़ी के हस्तशिल्प तथा अन्य पारंपरिक उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध रहेंगे।
परियोजना के अंतर्गत प्रत्येक हट के साथ फूड वैन भी स्थापित की जाएगी, जहां स्थानीय व्यंजन एवं पारंपरिक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराए जाएंगे। सभी फूड वैन में खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के निर्धारित मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके।
उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन शिमला के स्थानीय उत्पादों को एक विशिष्ट पहचान दिलाने और “ब्रांड शिमला” को स्थापित करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। यह पहल न केवल स्थानीय उत्पादों के विपणन को सशक्त बनाएगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने, स्वयं सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने तथा जिला की पारंपरिक विरासत और स्थानीय स्वाद को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

जिला शिमला में विभिन्न विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश: उपायुक्त ने कहा कि लंबित योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र शुरू किया जाए तथा कार्यों में आ रही बाधाओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए। अधिकारियों से प्रत्येक योजना की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा प्रगति रिपोर्ट निर्धारित समय पर प्रस्तुत करने को कहा गया, ताकि विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके और योजनाओं का लाभ समय पर आम जनता तक पहुंच सके।

समीक्षा बैठक में सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि पूर्ण हो चुकी योजनाओं के उपयोगिता प्रमाण पत्र निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित विभागों को उपलब्ध करवाए जाएं। साथ ही लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित करने तथा भविष्य में योजनाओं के पूर्ण होते ही उपयोगिता प्रमाण पत्र समय पर प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि विकास कार्यों के वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता एवं गति बनी रहे।

इस दौरान बताया गया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बीते वित्तीय वर्ष में 520 आवास स्वीकृत हुए। इसमें से 486 लाभार्थियों के अकाउंट वेरिफाइड हो चुके है जिनमें से 383 लाभार्थियों को पहली और 103 लाभार्थियों को दूसरी किस्त जारी हो चुकी है।

254 विकास योजनाएं शुरू नहीं हो पाई: जिला शिमला में विभिन्न विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के दौरान यह जानकारी सामने आई कि 31 मार्च 2025 तक कुल 254 योजनाएं प्रारंभ नहीं हो सकी हैं, जबकि 31 मार्च 2023 तक लंबित योजनाओं की संख्या 3 थी। आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक लंबित योजनाएं बीडीओ रामपुर के अंतर्गत 45, बीडीओ मशोबरा में 35, बीडीओ टुटू में 34, बीडीओ नारकंडा में 33 तथा बीडीओ ननखड़ी में 32 हैं। इसके अतिरिक्त बीडीओ चौपाल में 18, बीडीओ ठियोग में 15, बीडीओ कोटखाई में 14, बीडीओ बसंतपुर में 12, बीडीओ कुपवी में 8, बीडीओ छोहारा में 5, बीडीओ जुब्बल में 2 तथा बीडीओ रोहड़ू में 1 योजना अभी तक प्रारंभ नहीं हो सकी है।

पूर्ण हो चुकी 179 योजनाओं की उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश: जिला शिमला में विभिन्न विकास योजनाओं की समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि जिला में कुल 179 योजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं, लेकिन उनका उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificate-UC) अभी तक संबंधित विभागों को प्राप्त नहीं हुआ है। अधिकारियों को लंबित यूसी शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए, ताकि वित्तीय औपचारिकताओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके।

आंकड़ों के अनुसार, बीडीओ टुटू के अंतर्गत सर्वाधिक 66, बीडीओ मशोबरा में 43, बीडीओ ठियोग में 19, बीडीओ छोहारा एवं बीडीओ कोटखाई में 16-16, बीडीओ चौपाल में 7, बीडीओ बसंतपुर, बीडीओ कुपवी तथा बीडीओ ननखड़ी में 3-3, बीडीओ रोहड़ू में 2 तथा बीडीओ जुब्बल में 1 योजना का उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित है। वहीं बीडीओ नारकंडा और बीडीओ रामपुर के अंतर्गत कोई भी यूसी लंबित नहीं है।

सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) में 351 योजनाएं अधूरी: जिला शिमला में लोकसभा सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS)  के अंतर्गत विभिन्न वर्षों में स्वीकृत कुल 351 योजनाएं अभी तक अधूरी हैं। इन योजनाओं पर कुल 5 करोड़ 73 लाख 15 हजार रुपये की राशि व्यय की जानी है। समीक्षा बैठक में सभी संबंधित विभागों को लंबित कार्यों में तेजी लाने तथा निर्धारित समय सीमा के भीतर इन्हें पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। 

आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 की सर्वाधिक 160 योजनाएं लंबित हैं, जिन पर 3 करोड़ 11 लाख 60 हजार रुपये की राशि व्यय की जानी है। इसके बाद वर्ष 2023 की 108 योजनाएं (1 करोड़ 34 लाख 75 हजार रुपये), वर्ष 2024 की 32 योजनाएं (59 लाख 50 हजार रुपये), वर्ष 2017 की 14 योजनाएं (14 लाख 5 हजार रुपये), वर्ष 2021 की 10 योजनाएं (9 लाख 60 हजार रुपये), वर्ष 2015 की 8 योजनाएं (12 लाख 25 हजार रुपये), वर्ष 2018 की 7 योजनाएं (11 लाख रुपये), वर्ष 2022 की 4 योजनाएं (2 लाख 60 हजार रुपये), वर्ष 2014 की 3 योजनाएं (4 लाख 50 हजार रुपये), वर्ष 2019 एवं 2026 की 2-2 योजनाएं तथा वर्ष 2013 की 1 योजना अभी तक अधूरी है।

राज्यसभा सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के अधूरे कार्यों की समीक्षा: राज्यसभा सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के अंतर्गत विभिन्न वर्षों में स्वीकृत लेकिन अभी तक अधूरे पड़े विकास कार्यों की समीक्षा में सामने आया है कि वर्ष 2010 से 2026 तक कुल 123 योजनाएं अभी पूर्ण नहीं हो सकी हैं। इन योजनाओं पर लगभग 3 करोड़ 31 लाख 5 हजार रुपये (3,31,05,000) की राशि व्यय अथवा लंबित है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में सर्वाधिक 59 अधूरी योजनाएं दर्ज की गई हैं, जिनकी कुल लागत 1 करोड़ 11 लाख 40 हजार रुपये है। इसके बाद वर्ष 2023 में 16 योजनाएं (83.10 लाख) तथा वर्ष 2024 में 14 योजनाएं (47.80 लाख) अधूरी हैं। वर्ष 2019 में 7 योजनाएं, 2026 में 6 योजनाएं, 2018 में 5 योजनाएं तथा 2022 में 4 योजनाएं लंबित हैं। वहीं वर्ष 2013 और 2014 में 3-3 योजनाएं तथा वर्ष 2010, 2012, 2015, 2016, 2017 और 2021 में एक-एक योजना अधूरी दर्ज की गई है।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत एनएच के किनारे स्थापित होंगे सार्वजनिक शौचालय: स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत जिला प्रशासन द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) के किनारे सार्वजनिक शौचालय स्थापित किए जाएंगे। इस संबंध में सभी खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इन सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण के लिए आवश्यक बजट जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध करवाया जाएगा।

जिला प्रशासन का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों से गुजरने वाले यात्रियों, स्थानीय नागरिकों तथा पर्यटकों को स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक शौचालय उपलब्ध कराना है। इससे खुले में शौच की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण के साथ-साथ स्वच्छता को भी बढ़ावा मिलेगा।

खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे उपयुक्त स्थानों की पहचान कर शीघ्र प्रस्ताव तैयार करें, ताकि निर्माण कार्य समयबद्ध तरीके से शुरू किया जा सके। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि इन शौचालयों का नियमित रखरखाव और स्वच्छता बनी रहे।

जिला में बीपीएल परिवारों की e-KYC प्रक्रिया समीक्षा: जिला शिमला में बीपीएल (BPL) परिवारों की e-KYC प्रक्रिया में तेजी से कार्य किया जा रहा है। 4 अगस्त 2026 तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जिला के कुल 2,751 बीपीएल परिवारों में से 2,358 परिवारों की e-KYC पूर्ण कर ली गई है, जबकि 393 परिवारों की e-KYC लंबित है। जिला में 12,733 सदस्यों में से 12,105 सदस्यों का सत्यापन (Verified) किया जा चुका है तथा 628 सदस्यों का सत्यापन शेष है।

विकास खंडवार स्थिति में चौपाल में सर्वाधिक 885 परिवारों की e-KYC पूरी की गई है। इसके अतिरिक्त रामपुर में 326, छोहारा में 271, कुपवी में 126, ठियोग में 125 तथा अन्य विकास खंडों में भी संतोषजनक प्रगति दर्ज की गई है। वहीं ननखड़ी विकास खंड में कुल 29 परिवार हैं, जिनमें अभी e-KYC कार्य प्रारंभ होना शेष है।

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