बिलासपुर: जल स्त्रोतों की स्वच्छता और जलीय जीवन के संरक्षण के लिए राज्यव्यापी अभियान

20 सितंबर से शुरू होगा ‘स्वच्छ जल स्रोत-सुरक्षित जलीय जीवन’ अभियान, 31 अक्तूबर तक चलेंगी स्वच्छता एवं जागरूकता गतिविधियां

बिलासपुर:  हिमाचल प्रदेश के जल स्रोतों को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने तथा जलीय जीवन के संरक्षण के लिए मत्स्य विभाग द्वारा 20 सितंबर से 31 अक्तूबर, 2026 तक राज्यव्यापी ‘स्वच्छ जल स्रोत-सुरक्षित जलीय जीवन’ अभियान चलाया जाएगा। विश्व स्वच्छता दिवस के अवसर पर शुरू होने वाले इस अभियान की थीम ‘मेरा जलस्रोत-मेरी जिम्मेदारी’ रखी गई है। अभियान के दौरान जलस्रोतों की स्वच्छता के साथ-साथ लोगों को कचरे के उचित निपटान और जलस्रोतों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा।
मत्स्य विभाग के निदेशक ओम कान्त ठाकुर ने बताया कि अभियान का उद्देश्य जलस्रोतों और इनके आसपास कचरा फेंकने की प्रवृत्ति को रोकना तथा इनके संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि अभियान को केवल स्वच्छता अभियान तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि जलस्रोतों में दोबारा कचरा न पहुंचे, इसके लिए लोगों में जिम्मेदारी की भावना विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।
अभियान के तहत प्रदेश के तालाबों, झीलों, नदियों, नालों, जलाशयों, जल चैनलों, मत्स्य क्षेत्रों, मछली उतारने एवं हैंडलिंग स्थलों, जलग्रहण क्षेत्रों और इनके आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। जल स्रोतों के समीप चिन्हित कचरा डंपिंग स्थलों को भी अभियान में शामिल किया जाएगा। जिला और क्षेत्रीय स्तर पर प्राथमिकता वाले स्थलों को चिन्हित कर वहां चरणबद्ध तरीके से स्वच्छता एवं जागरूकता गतिविधियां संचालित की जाएंगी।
अभियान में मछुआरों एवं मत्स्य जीवी समुदायों के साथ पंचायतों, शहरी स्थानीय निकायों, स्थानीय निवासियों, विद्यार्थियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, युवा समूहों और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। अभियान के प्रभाव को दर्ज करने के लिए चिन्हित स्थलों की स्वच्छता गतिविधियों से पहले और बाद की तस्वीरें एवं वीडियो भी तैयार किए जाएंगे।
स्वच्छता अभियान के दौरान एकत्रित कचरे को यथासंभव प्लास्टिक, कांच, धातु, जैविक, सामान्य तथा खतरनाक या अज्ञात कचरे की श्रेणियों में अलग किया जाएगा और संबंधित स्थानीय निकाय की अधिकृत कचरा प्रबंधन व्यवस्था के माध्यम से उसका उचित निपटान सुनिश्चित किया जाएगा। अभियान में शामिल लोगों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा तथा उन्हें गहरे अथवा तेज बहाव वाले पानी और अन्य जोखिम वाले क्षेत्रों में प्रवेश न करने की सलाह दी जाएगी।
अभियान को जनभागीदारी से जोड़ने के लिए मत्स्य विभाग द्वारा ‘मेरा जलस्रोत-मेरी जिम्मेदारी चैलेंज’ डिजिटल प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी। इसमें मछुआरे, मत्स्य पालक, आम नागरिक, सामुदायिक समूह और विभागीय फील्ड कार्यालय भाग ले सकेंगे। प्रतिभागी स्वच्छता गतिविधियों से संबंधित पहले और बाद की तस्वीरों अथवा 30 से 120 सेकंड की वीडियो/रील के माध्यम से अपनी प्रविष्टियां भेज सकेंगे। प्रविष्टियां जमा करने की अंतिम तिथि 31 अक्तूबर, 2026 निर्धारित की गई है।
प्राप्त प्रविष्टियों की स्क्रीनिंग और सत्यापन 1 से 15 नवंबर तक किया जाएगा तथा चयनित प्रविष्टियों का अंतिम निर्धारण 16 से 20 नवंबर तक किया जाएगा। उत्कृष्ट कार्यों और पहलों को 21 नवंबर को विश्व मत्स्य दिवस के अवसर पर सम्मानित किया जाएगा। विभागीय फील्ड कार्यालयों, मछुआरों एवं मत्स्यजीवी समुदायों के साथ-साथ व्यक्तिगत प्रतिभागियों और सामुदायिक समूहों की उल्लेखनीय पहलों को भी इस दौरान मान्यता दी जाएगी।
अभियान की प्रगति और प्रभाव का आकलन करने के लिए विभाग द्वारा जलस्रोतों की संख्या, आयोजित स्वच्छता गतिविधियों, प्रतिभागियों की संख्या, मछुआरों एवं स्थानीय समुदायों की भागीदारी, एकत्रित एवं उचित तरीके से निस्तारित कचरे की मात्रा, जागरूकता गतिविधियों और डिजिटल प्रतियोगिता में प्राप्त प्रविष्टियों का रिकॉर्ड भी रखा जाएगा।

ओम कान्त ठाकुर ने प्रदेशवासियों से अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि जलस्रोतों को स्वच्छ रखना और जलीय जीवन की रक्षा करना केवल विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से जल स्रोतों और इनके आसपास कचरा न फेंकने तथा दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ‘मेरा जल स्रोत-मेरी जिम्मेदारी’ का संदेश प्रदेश में जल स्रोतों के संरक्षण के लिए सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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