हिम धरोहर व इतिहास (Page 3)

शिवालिक पर्वत श्रृंखलाओं के आंचल में बसा, स्वर्ण कलशों से सुसज्जित मंदिर “माँ चिंतपूर्णी”

शिवालिक पर्वत श्रृंखलाओं के आंचल में बसा, स्वर्ण कलशों से सुसज्जित मंदिर “माँ चिंतपूर्णी”

त्रिर्गत के तीन शक्तिपीठों में ज्वालाजी, वज्रेश्वरी और चिंतपूर्णी उल्लेखनीय शक्तिपीठ पहला स्थान माता वैष्णों देवी को दिया जाता है, जो जम्मू-कश्मीर में पड़ता है स्वर्ण कलशों से सजा...

पारम्परिक परिधानों व आभूषणों से सुशोभित हिमाचल की छटा बिखेरता पहाड़ी लोकनृत्य

हिमाचल की संस्कृति को संजोये प्रदेश के हर जिले के अनूठे लोकनृत्य

हिमाचल का विश्व विख्यात “पहाड़ी लोकनृत्य” हिमाचल प्रदेश के लोक नृत्य हिमाचल में लोकनृत्य की अपनी ही एक अनोखी परम्परा है। प्रदेश के हर जिले में अलग-अलग भाषाएं, संस्कृति, त्यौहार, मेले,...

प्राकृतिक सौंदर्य से लबालब रामपुर का "सराहन"

रामपुर का “सराहन”

हिमाचल प्राकृतिक सौंदर्य से लबालब है। खूबसूरत हरी-भरी वादियां, ऊंची-ऊंची पहड़ियां। हर तरफ प्रकृति के अद्भुत् व मनमोहक नजारे।  ऐसा ही रामपुर तहसील के बशलकण्डा, थारलूधार, कण्डीधार एवं...

“देव कमरूनाग” ...यहां स्थानीय ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के लोग भी होते हैं नतमस्तक

हिमाचल: देव कमरूनाग का वर्णन महाभारत से…

कमरूनाग झील में समाया है अपार खजाना “देव कमरूनाग” … स्थानीय लोगों के साथ-साथ जहां देश-विदेश के लोग भी होते हैं नतमस्तक परंपरा के कारण सिक्कों और अमूल्य धातुओं का भारी भंडार हिमाचल को देवभूमि...

हिमाचल: किन्नौर जनपद की विवाह परंपरा, शादी में न तो मंडप बनाया जाता है, और न ही अग्नि के लिए जाते हैं फेरे

सतलुज नदी किन्नौर क्षेत्र को दो भागों में बाँटती है। यहाँ का मौसम वर्षभर सुहावना रहता है। हिमाचल की इस पावन भूमि पर हिमाच्छादित पर्वत श्रेणियों से घिरा किन्नौर एक अत्यंत रमणीय क्षेत्र है।...

हिमाचल: प्राचीन काल से चली आ रही देव-ध्वज की परम्परा..शहतीर मात्र लकड़ी के खम्बे नहीं देवी-देवता के इतिहास के द्योतक

शहतीर मात्र लकड़ी के खम्बे नहीं देवता के इतिहास के द्योतक मंदिर की शुद्धि तथा पुनः प्रतिष्ठा का भी प्रतीक  कुल्लू घाटी की यात्रा के दौरान देखने में आया है कि अनेक गाँवों के एक छोर के विशाल...

हिमाचल: रियासत काल से “सतधार कहलूर” के नाम से विख्यात बिलासपुर जिले की पहाड़ियां

सात पहाड़ियों में नैना देवी, कोट, झझियार, तिऊन, बांदला, बहादुरपुर और रतनपुर शामिल बिलासपुर जिले की पहाड़ियां रियासतीकाल से “सतधार कहलूर” के नाम से विख्यात  रही है। इसका तात्पर्य बिलासपुर...