चमियाणा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में हार्ट के दो अहम टेस्ट बंद, टांडा में सुई-सिरिंज तक के लिए मरीज परेशान – राकेश जमवाल

धर्मशाला : भाजपा मुख्य प्रवक्ता एवं सुंदरनगर विधायक राकेश जमवाल ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों और नई स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि चमियाणा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में हृदय रोगियों के दो महत्वपूर्ण टेस्ट—होल्टर मॉनिटरिंग और एंबुलेटरी ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग (एबीपीएम स्टॉफ की कमी के कारण बंद पड़े हैं, जबकि टांडा मेडिकल कॉलेज जैसे प्रमुख संस्थान में मरीजों को सुई, सिरिंज, ग्लव्स और जरूरी दवाइयों तक के लिए परेशान होना पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार चमियाणा में इन दोनों टेस्ट के लिए प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारी उपलब्ध न होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।जमवाल ने कहा कि यह स्थिति सरकार के स्वास्थ्य संबंधी दावों की वास्तविक तस्वीर सामने रखती है। एक तरफ सरकार नए अस्पतालों और नई घोषणाओं की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जिस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल को प्रदेश में अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बताया जा रहा है, वहां हृदय रोगियों के लिए जरूरी जांच तक बंद हो गई हैं। उन्होंने कहा कि ईसीजी या सामान्य ब्लड प्रेशर जांच से स्थिति स्पष्ट न होने पर होल्टर और एबीपीएम जैसे टेस्ट मरीजों की 24 से 48 घंटे की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे टेस्ट बंद होना सीधे मरीजों के उपचार को प्रभावित करता है।

उन्होंने कहा कि चमियाणा में तकनीकी कर्मचारी को स्थानांतरित किए जाने के बाद पैदा हुई स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि सरकार एक अस्पताल में व्यवस्था खड़ी करने के बजाय पहले से उपलब्ध मानव संसाधन को दूसरी जगह भेजकर स्वास्थ्य सेवाओं को कमजोर क्यों कर रही है। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जब मरीजों को इन महत्वपूर्ण जांचों की आवश्यकता है तो प्रशिक्षित स्टाफ की स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं की गई।राकेश जमवाल ने कहा कि दूसरी ओर प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थानों में शामिल टांडा मेडिकल कॉलेज में भी स्थिति चिंताजनक है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार हिमकेयर और आयुष्मान भारत की करीब 85 करोड़ रुपये की लंबित राशि के कारण मेडिकल सामग्री और दवाइयों की खरीद प्रभावित होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में सुई, सिरिंज, ग्लव्स सहित अन्य आवश्यक सामग्री की आपूर्ति प्रभावित होने तथा मरीजों को दवाइयां बाहर से खरीदने की शिकायतों का उल्लेख है।जमवाल ने कहा कि सरकार को समझना होगा कि अस्पताल केवल भवनों से नहीं चलते। अस्पतालों को बेहतर बनाने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर, नर्सिंग एवं तकनीकी स्टाफ, दवाइयां, उपकरण और समय पर भुगतान की व्यवस्था जरूरी है। यदि पहले से स्थापित स्वास्थ्य संस्थानों से डॉक्टरों और कर्मचारियों को हटाकर दूसरी जगह भेजा जाएगा और वहां भी पर्याप्त स्टाफ नहीं होगा, तो इसका खामियाजा अंततः प्रदेश की जनता और मरीजों को ही भुगतना पड़ेगा।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल के उस बयान पर भी राकेश जमवाल ने सवाल उठाया, जिसमें उपचार की लागत और वसूली को लेकर गंभीर बात कही गई है। उन्होंने कहा कि यदि स्वास्थ्य मंत्री स्वयं यह कह रहे हैं कि दो लाख रुपये के इलाज के बदले चार लाख रुपये वसूले जा रहे हैं, तो सरकार और स्वास्थ्य विभाग इस पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं? चार साल से सत्ता में बैठी सरकार में कैबिनेट मंत्री द्वारा ऐसी स्थिति की बात किया जाना पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।उन्होंने कहा कि सरकार को आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर जनता को जवाब देना चाहिए कि टांडा में दवाइयों और मेडिकल सामग्री की उपलब्धता क्यों प्रभावित हुई, हिमकेयर की राशि लंबित क्यों हुई और मरीजों को उपचार के लिए बाजार से जरूरी सामग्री क्यों खरीदनी पड़ रही है। 18 सितंबर को हिमकेयर व्यवस्था में किए गए नए बदलावों के बीच सरकार की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि मरीजों को उपचार में किसी तरह की परेशानी न हो।जमवाल ने कहा कि सरकार को नई घोषणाओं के नाम पर पहले से खड़ी स्वास्थ्य व्यवस्था को कमजोर करने के बजाय उसे मजबूत करना चाहिए। नादौन और हमीरपुर में सुविधाएं बढ़ाने की बात अच्छी है, लेकिन इसकी कीमत टांडा, आईजीएमसी, चमियाणा, नेरचौक और प्रदेश के अन्य स्थापित स्वास्थ्य संस्थानों की व्यवस्थाएं कमजोर करके नहीं चुकाई जा सकती।

उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि क्या हिमाचल में स्वास्थ्य सेवाओं का वास्तविक विस्तार हो रहा है या केवल अस्पतालों के नाम और स्थान बदलकर कागजों में उपलब्धियां गिनाई जा रही हैं? जनता को घोषणाएं नहीं, अस्पतालों में डॉक्टर, दवाइयां, जांच और समय पर उपचार चाहिए। राकेश जमवाल ने कहा कि सरकार यदि वास्तव में प्रदेश की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देना चाहती है तो सबसे पहले टांडा, आईजीएमसी, चमियाणा, नेरचौक और अन्य प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों की मौजूदा कमियों को दूर करे। नई इमारतें और नई घोषणाएं बाद में भी हो सकती हैं, लेकिन मरीजों का इलाज आज चाहिए। पहले से खड़ी स्वास्थ्य व्यवस्था को कमजोर करना हिमाचल की जनता के साथ अन्याय है।

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