RAMP कार्यक्रम के तहत 80 से अधिक उद्यमी एवं स्वयं सहायता समूह सदस्य हुए लाभान्वित

उद्यमियों ने जानी डिजिटल साक्षरता और जेम पोर्टल की बारीकियां

सिरमौर: उद्योग विभाग द्वारा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय के रेजिंग एंड एक्सेलरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस (रैम्प) कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) तथा एमएसएमई इकाइयों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने और सरकारी खरीद प्रक्रियाओं से जोड़ने के उद्देश्य से बिलासपुर और सिरमौर जिलों में दो महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यशालाओं का सफल आयोजन किया गया। इन कार्यशालाओं में कुल 82 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें महिला उद्यमी, स्वयं सहायता समूहों की

सदस्याएं, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमी तथा विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधि शामिल रहे। डिजिटल साक्षरता एवं जेम पोर्टल पर प्रशिक्षण बिलासपुर जिले के सरकारी विश्राम गृह, स्वारघाट में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में 30 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य एमएसएमई एवं एसएचजी की डिजिटल साक्षरता बढ़ाना, वित्तीय प्रबंधन को सुदृढ़ करना तथा गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) के माध्यम से सरकारी खरीद प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ाना था। कार्यशाला के प्रथम सत्र में प्रतिभागियों को डिजिटल युग में व्यवसाय संचालन, सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप बिजनेस, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन विपणन उपकरणों तथा वित्तीय प्रबंधन से संबंधित व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। विशेषज्ञों ने बजट निर्माण, नकदी प्रवाह प्रबंधन, बैंकिंग सुविधाओं के उपयोग तथा सरकारी ऋण योजनाओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।

द्वितीय सत्र में गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) पोर्टल के सीपीपी मॉड्यूल पर विस्तृत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रतिभागियों को जेम पोर्टल के माध्यम से सरकारी विभागों को उत्पाद एवं सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया, पंजीकरण, विपणन तथा उपलब्ध व्यावसायिक अवसरों के बारे में अवगत कराया गया। कार्यशाला के दौरान ऑन-द-स्पॉट जेम पंजीकरण एवं ऑनबोर्डिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई, जिसके माध्यम से कई महिला उद्यमियों एवं स्वयं सहायता समूहों ने मौके पर ही विक्रेता के रूप में अपना पंजीकरण कराया। विभागीय अधिकारियों ने तकनीकी सहायता प्रदान करते हुए प्रतिभागियों की समस्याओं का समाधान भी किया।

इसके साथ ही सिरमौर जिले के गोंदपुर, पांवटा साहिब स्थित हिमाचल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एचसीसीआई) में “मार्केटिंग एंड डिजिटल लिटरेसी एंड डिजिटल टूल्स फॉर ब्रांड बिल्डिंग” तथा जेम पोर्टल विषयों पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें 52 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री गुरप्यारा राम, सदस्य सचिव, सिंगल विंडो क्लीयरेंस एजेंसी (एसडब्ल्यूसीए), पांवटा साहिब रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि डिजिटल तकनीकों को अपनाकर उद्यमी अपने व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं तथा सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग कर प्रतिस्पर्धात्मक बाजार में अपनी पहचान मजबूत बना सकते हैं।कार्यक्रम में सतीश गोयल, अध्यक्ष, हिमाचल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, बाल मुकंद अग्रवाल, औद्योगिक प्रोत्साहन अधिकारी (आईपीओ), काकू राम, आर्थिक अन्वेषक (ईआई) तथा श्री मनजीत कुमार, विस्तार अधिकारी (ईओ) विशेष रूप से उपस्थित रहे।

प्रथम तकनीकी सत्र में प्रोफेसर पंकज यादव ने डिजिटल मार्केटिंग, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के प्रभावी उपयोग, ऑनलाइन ब्रांड निर्माण, ग्राहक सहभागिता, डिजिटल विज्ञापन तथा आधुनिक डिजिटल उपकरणों के माध्यम से व्यवसाय विस्तार की संभावनाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। द्वितीय सत्र में अनुराग प्रतीक ने गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) पोर्टल पर पंजीकरण प्रक्रिया, उत्पाद सूचीकरण, सरकारी खरीद में भागीदारी तथा एमएसएमई इकाइयों के लिए उपलब्ध व्यावसायिक अवसरों के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की। कार्यशाला का संचालन मातवर ठाकुर, परामर्शदाता, एसडब्ल्यूसीए पांवटा साहिब द्वारा किया गया। इस अवसर पर अमित चंद्र, सहायक परामर्शदाता, रैम्प, जिला उद्योग केंद्र (डीआईसी), नाहन तथा श्री कुलदीप जी, स्मार्ट एमएसएमई ने भी प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। स्थानीय उद्यमियों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल उद्योग विभाग के अधिकारियों ने कहा कि रैम्प कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित ऐसी क्षेत्रीय कार्यशालाएं ग्रामीण एवं छोटे उद्यमियों को डिजिटल अर्थव्यवस्था और सरकारी खरीद प्रणाली से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं। डिजिटल साक्षरता, वित्तीय प्रबंधन, डिजिटल मार्केटिंग तथा जेम जैसे ई-प्रोक्योरमेंट प्लेटफॉर्म से जुड़कर स्थानीय उद्यमी और स्वयं सहायता समूह अपने उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा सकते हैं। प्रतिभागियों ने कार्यशालाओं को अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताते हुए कहा कि इन कार्यक्रमों से उन्हें अपने व्यवसाय को डिजिटल रूप से विकसित करने, नए बाजारों तक पहुंच बनाने तथा सरकारी खरीद प्रक्रियाओं मे भागीदारी बढ़ाने के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है। उद्योग विभाग ने विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों से प्रदेश के एमएसएमई, महिला उद्यमी तथा स्वयं सहायता समूह आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त होंगे तथा राज्य में उद्यमिता और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।

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