शासन का मूल जन केंद्रित प्रशासन होना चाहिए – राज्यपाल

राज्यपाल ने लोक भवन में हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा (एचएएस) बैच 2025 के 15 परिवीक्षाधीन अधिकारियों से की बातचीत 

शिमला: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज लोक भवन में हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा (एचएएस) बैच 2025 के 15 परिवीक्षाधीन अधिकारियों के साथ संवाद किया। उन्होंने अधिकारियों को ईमानदारी, समर्पण और जनसेवा की भावना को सर्वोपरि रखते हुए अपने दायित्व का निर्वहन करने के लिए प्रेरित किया। ये अधिकारी वर्तमान में शिमला स्थित डॉ. मनमोहन सिंह लोक प्रशासन संस्थान (हिपा), फेयरलॉन्स में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

हिपा की निदेशक रुपाली ठाकुर ने राज्यपाल को प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में अवगत करवाते हुए फील्ड एक्सपोजर, संस्थागत शिक्षा और जमीनी स्तर पर प्रशासन से संवाद के दौरान प्राप्त व्यावहारिक समझ की जानकारी दी।
इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज और कोर्स निदेशक संदीप शर्मा भी उपस्थित थे। 

इस अवसर पर राज्यपाल ने सुशासन को मजबूत करने और जन सेवाओं से संबंधित योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू करने में सिविल सेवकों की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से दूरदराज़ के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के कल्याण के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिक आचरण के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहने तथा प्रशासन में जन-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया।
सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल देते हुए राज्यपाल ने अधिकारियों से कल्याणकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए ‘परिपूर्ण दृष्टिकोण’ अपनाने का आहवान किया। उन्होंने अधिकारियों को बदलाव के संवाहक बनने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि सक्रिय एवं उत्तरदायी प्रशासन ही नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की कुंजी है।
नवाचार, प्रौद्योगिकी-आधारित शासन और निरंतर क्षमता निर्माण के महत्त्व को रेखांकित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इनके उपयोग से चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है। उन्होंने नशे की बढ़ती समस्या, जलवायु परिवर्तन और जैविक खेती को बढ़ावा देने जैसे महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद करते हुए अधिकारियों से जमीनी स्तर पर सक्रिय कदम उठाने, जागरूकता फैलाने और सतत विकास एवं समाधान के दृष्टिगत कार्य करने का आग्रह किया।
विभिन्न क्षेत्रों में हिमाचल प्रदेश की अपार संभावनाओं का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने युवा अधिकारियों से कृषि, पर्यटन और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में अवसरों को बढ़ावा देने तथा राज्य की पूरी क्षमता को विकसित करने में कार्य करने की दिशा में अग्रसर होने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि लोगों की सिविल सेवकों से बहुत अपेक्षाएं होती हैं और उन्हें टीम भावना के साथ कार्य करना चाहिए, इस सिद्धांत से प्रेरित होकर कि हम मिलकर सभी लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।
एक विकसित और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल ने कहा कि राज्य के भविष्य को आकार देने और समावेशी एवं सतत विकास सुनिश्चित करने में युवा अधिकारियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने निर्णय लेते समय हमेशा जनहित को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
राज्यपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशिक्षु अधिकारी ईमानदारी और समर्पण के साथ जनसेवा और अपने कर्तव्य का निर्वहन तथा प्रशासनिक दक्षता और शासन में जनविश्वास को मजबूत करने में महत्त्वपूर्ण योगदान देंगे।
उन्होंने युवा अधिकारियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। 

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