हिम धरोहर व इतिहास (Page 5)

इतिहास: हिमाचल के कांगड़ा राज्य का राजपूती शासन काल…..

नगरकोट मन्दिर की धनराशि और वैभव से आकर्षित होकर महमूद गजनी ने 1009 ई. में कांगड़ा पर किया था आक्रमण  कटोच राजाओं के पास मौजूद वंशावली में राजाओं के नामों का वर्णन है हम आपको इस बार राजपूती शासन...

हिमाचल: रिवालसर का छेश्चू (छेत्शु) मेला व वैशाखी मेला

लोमस ऋषि ने की थी रिवालसर झील के तट पर भगवान शिव की अराधना ‘छेश्चू‘ शब्द में ‘छ‘ का भाव पानी और ‘श्चू‘ का भाव है मेला पूजा में वाद्य यन्त्रों के स्वर के साथ ‘ओम् माने पेमे हूं‘...

शिमला शहर में ब्रिटिश काल के स्कूल…

इस बार हम आपको शिमला शहर के ब्रिटिश समय के इंडिया स्कूलों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। जोकि ब्रिटिश इण्डिया शासनकाल के समय में बनाये गए थे। जो आज भी काफी प्रसिद्ध हैं। स्कूल शिक्षा के...

शिमला का खूबसूरत पर्यटक स्थल “मशोबरा”; ऊँचे पहाड़, हरे भरे पेड़, बर्फ का मनमोहक सौन्दर्य

मशोबरा स्थल को पुराने समय में “मैशियार” के नाम से जाना जाता था मशोबरा- यह हिल स्टेशन शिमला-तत्तापानी सड़क पर शिमला से 15 किलोमीटर की दूरी पर है। मशोबरा स्थल को पुराने समय में “मैशियार” के...

हिमाचल के पहाड़ी रूमाल व हस्तशिल्प-कलाएं…..

जम्मू के बसोहली से चम्बा आई थी रूमाल कला पहाड़ी हस्तकला लोक-शिल्प में ‘पहाड़ी-रूमाल‘ का महत्वपूर्ण स्थान है। ये रूमाल चम्बा, कांगड़ा, मण्डी, बिलासपुर तथा कृत्तु में बनते हैं। यह कला जम्मू...

रामपुर बुशहर में स्थित तिब्बतीयन शैली में निर्मित दुम्ग्युर नामक बौद्ध मंदिर

रामपुर बुशहर में स्थित तिब्बतीयन शैली में निर्मित दुम्ग्युर बौद्ध मंदिर

बुशहर रियासत के टीका रघुनाथ सिंह ने सन 1895 ई. को स्थापित करवाया शिमला जिला के रामपुर उपमंडल में समुद्रतल से 1000 मीटर की ऊंचाई पर बौद्ध मंदिर रामपुर बस स्टैंड के पास स्थित है। रामपुर में तिब्बतीयन...

लाहौल और स्पीति के “भोट” में फलदार वृक्ष नहीं अपितु प्राकृतिक जड़ी-बूटियाँ अधिक पाई जाती हैं

लाहौली एवं स्पीति भोट द्वारा बोली जाने वाली भोटी भाषा  भुटोरियां पंगवाल गांव से काफी दूर लाहौल और स्पीति “भोट” की जीवन शैली उनकी निकटता के कारण समान… ईसा की सातवीं शताब्दी में पहली बार...