ज्वालामुखी: शक्तिपीठ श्री ज्वालामुखी मंदिर एवं शहर के समग्र विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से आज मंदिर न्यास के सभागार में श्री ज्वालामुखी में मास्टर प्लान को लेकर बैठक आयोजित की गई। संयुक्त आयुक्त (मंदिर) एवं एसडीएम ज्वालामुखी डॉ. संजीव शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में विधायक ज्वालामुखी संजय रत्न विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
बैठक में एनआईटी हमीरपुर के डिपार्टमेंट ऑफ आर्किटेक्चर के आर्किटेक्ट्स के साथ मंदिर क्षेत्र के सुनियोजित विकास, श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने तथा ज्वालामुखी शहर को आकर्षक स्वरूप प्रदान करने से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
विधायक संजय रत्न ने कहा कि शक्तिपीठ श्री ज्वालामुखी मंदिर प्रदेश की महत्वपूर्ण धार्मिक धरोहर है और यहां देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर परिसर के साथ-साथ पूरे शहर का विकास भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध तरीके से किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ज्वालामुखी को एक सुंदर, सुव्यवस्थित एवं सुविधाजनक धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना प्राथमिकता है तथा मास्टर प्लान के माध्यम से इस दिशा में ठोस पहल की जानी चाहिए। उन्होंने विकास से जुड़े कार्यों को शीघ्र आगे बढ़ाने पर बल देते हुए कहा कि योजनाओं को व्यावहारिक स्वरूप देकर समयबद्ध तरीके से कार्यान्वित करने के प्रयास किए जाएं।
विधायक ने कहा कि ज्वालामुखी शहर की सुंदरता ऐसी होनी चाहिए कि बस स्टैंड पहुंचने से ही श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को एक व्यवस्थित और आकर्षक धार्मिक नगरी का अनुभव हो। इसके लिए बस स्टैंड से मंदिर तक जाने वाली सड़क के सौंदर्यीकरण, मार्ग के आसपास की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने तथा शहर को स्वच्छ एवं सुंदर स्वरूप प्रदान करने के लिए प्रभावी योजना तैयार करने की आवश्यकता है। उन्होंने बिजली की तारों को भूमिगत करने की संभावनाओं पर भी विचार करने का सुझाव दिया, ताकि शहर की सुंदरता बढ़ने के साथ-साथ विद्युत तारों के बेतरतीब जाल से भी निजात मिल सके।
बैठक में विधायक ने नगर परिषद एवं मंदिर न्यास के अंतर्गत गेट नंबर-1 से रेन शेल्टर तक स्थित दुकानों को लेकर विस्तृत चर्चा की और प्रभावी रूपरेखा तैयार करने को कहा। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान तैयार करते समय मौजूदा व्यवस्थाओं, उपलब्ध स्थान और व्यावसायिक गतिविधियों का समुचित आकलन किया जाना चाहिए, ताकि विकास कार्यों की योजना वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप बनाई जा सके। उन्होंने क्षेत्र में उपलब्ध स्थान का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए डबल स्टोरी निर्माण की संभावनाओं पर भी विचार करने का सुझाव दिया।
उन्होंने मंदिर क्षेत्र में पेयजल की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा पहाड़ियों से होने वाले पानी के रिसाव की समस्या के समाधान के लिए आवश्यक प्रावधान करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने और मौसम के प्रभाव से बचाव के लिए उपयुक्त स्थानों पर कैनोपी विकसित करने की संभावनाओं को भी मास्टर प्लान में शामिल किया जाना चाहिए। मंदिर परिसर में उपलब्ध स्थान और सुविधाओं को इस प्रकार विकसित किया जाए, जिससे श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।
उन्होंने यह भी कहा कि दिव्यांगजनों, बुजुर्गों तथा चलने-फिरने में असमर्थ श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उन्हें मंदिर तक पहुंचाने के लिए उचित व्यवस्था विकसित करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थल पर आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को सहज एवं सुविधाजनक दर्शन का अवसर मिलना चाहिए। इसके लिए मास्टर प्लान में सुगम आवागमन और आवश्यक सुविधाओं से संबंधित प्रावधानों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।














