नौणी: उत्तराखंड के किसानों के लिए औद्यानिकी एवं प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण कार्यक्रम

नौणी: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय (यूएचएफ), नौणी के विस्तार शिक्षा निदेशालय द्वारा उत्तराखंड के 57 किसानों के लिए बागवानी एवं टिकाऊ खेती के विभिन्न पहलुओं पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को कीवी की खेती, मशरूम उत्पादन, प्राकृतिक खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली तथा शीतोष्ण फलों की फसलों के प्रबंधन के बारे में तकनीकी एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल प्रबंधन, पौधों की देखभाल, मशरूम उत्पादन, प्राकृतिक खेती की तकनीकों तथा शीतकालीन फलों के पौधों के वैज्ञानिक प्रबंधन से संबंधित तकनीकी जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान टिकाऊ खेती, फसल विविधीकरण, कृषि संसाधनों के कुशल उपयोग तथा एकीकृत रोग एवं कीट प्रबंधन पर भी विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम के तहत किसानों को विश्वविद्यालय के विभिन्न प्रक्षेत्रों एवं प्रदर्शन इकाइयों का भ्रमण करवाया गया, जहां उन्होंने विभिन्न बागवानी फसलों, उन्नत उत्पादन तकनीकों और वैज्ञानिक खेती की पद्धतियों का अवलोकन किया। प्रतिभागी किसानों ने कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), सोलन तथा क्षेत्रीय औद्यानिकी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, मशोबरा का भी दौरा किया। यहां उन्होंने विशेषज्ञों के साथ संवाद किया तथा आधुनिक औद्यानिकी तकनीकों के बारे में व्यावहारिक जानकारी प्राप्त की। समापन सत्र के दौरान प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए संयुक्त निदेशक (प्रशिक्षण) डॉ. अमित विक्रम ने किसानों से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान एवं कौशल को अपने खेतों और गांवों में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने किसानों से अपने अनुभव एवं सीख को अन्य किसानों के साथ साझा करने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर तकनीकी ज्ञान का प्रसार करने से अधिक से अधिक किसान उन्नत औद्यानिकी तकनीकों और टिकाऊ कृषि पद्धतियों का लाभ उठा सकेंगे।

प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं एक्सपोजर विजिट के माध्यम से किसानों को उन्नत उत्पादन तकनीकों और टिकाऊ कृषि पद्धतियों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ, जिन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाकर औद्यानिकी उत्पादन तथा कृषि आधारित आजीविका को मजबूत किया जा सकता है।

कार्यक्रम का समन्वय डॉ. अजय शर्मा एवं डॉ. दिव्या चौधरी ने किया, जबकि विस्तार शिक्षा निदेशालय के वैज्ञानिक स्टाफ ने विभिन्न प्रशिक्षण सत्रों एवं गतिविधियों के संचालन में सहयोग प्रदान किया।

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