शिमला: IGMC पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग ने की सफ़ल रोबोटिक्स सर्जरी..
शिमला: IGMC पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग ने की सफ़ल रोबोटिक्स सर्जरी..
शिमला: शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग ने बाल चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विभाग ने हाल ही में 2 से 5 वर्ष की आयु के पांच बच्चों की रोबोटिक सर्जरी सफलतापूर्वक की। इन सभी ऑपरेशनों की सफलता दर 100 प्रतिशत रही। सर्जरी के माध्यम से बच्चों में किडनी में ब्लॉकेज और आंतों से जुड़ी जटिलताओं का उपचार किया गया।
आईजीएमसी के एमएस डॉ. राहुल राव ने बताया कि करीब पांच महीने पहले मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आईजीएमसी में रोबोटिक सर्जरी कार्यक्रम का शुभारंभ किया था। इसके बाद अस्पताल में अब तक करीब 112 रोबोटिक सर्जरी की जा चुकी हैं। इनमें अलग-अलग विभागों के मरीज शामिल हैं और पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग ने भी रोबोटिक तकनीक के जरिए बच्चों के जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल में अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध होने से प्रदेश के मरीजों को इलाज के लिए बाहर जाने की जरूरत कम होगी। वहीं पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के डॉ. राजकुमार ठाकुर ने बताया कि आम लोगों में यह धारणा है कि रोबोटिक सर्जरी केवल वयस्क मरीजों के लिए होती है, जबकि दुनिया में बच्चों की सर्जरी भी इस तकनीक से लंबे समय से की जा रही है। आईजीएमसी में 2 से 5 वर्ष तक के पांच बच्चों की सफल रोबोटिक सर्जरी की गई है। इनमें किडनी में ब्लॉकेज, पित्ताशय की पथरी और हर्निया जैसी समस्याओं के मामले शामिल हैं। उन्होंने बताया कि रोबोटिक तकनीक से सर्जन को बेहतर विजुअलाइजेशन और सूक्ष्म स्तर पर काम करने की सुविधा मिलती है। हालांकि बच्चों की सर्जरी के लिए विशेष प्रशिक्षण और विशेषज्ञता जरूरी है।
पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के डॉ. राजकुमार ठाकुर और रोबोटिक सर्जरी के मेंटर डॉ. पुनीत महाजन ने जानकारी देते हुए कहा कि आईजीएमसी का पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग करीब 30 वर्ष पुराना है और यहां लंबे समय से बच्चों की जटिल सर्जरी की जा रही है। रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और प्रदेश सरकार के सहयोग से अब आईजीएमसी में बच्चों को भी अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी की सुविधा मिल रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में अन्य विभाग भी रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाएंगे और मरीजों को एक ही संस्थान में आधुनिक उपचार की अधिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। डॉक्टरों के अनुसार रोबोटिक सर्जरी में छोटे चीरे लगाए जाते हैं, जिससे ऑपरेशन के बाद बच्चों को अपेक्षाकृत कम दर्द होता है और रिकवरी भी तेजी से होती है। रोबोटिक प्रणाली सर्जन को शरीर के अंदर के हिस्सों को अधिक स्पष्टता और सूक्ष्मता से देखने में मदद करती है। इससे जटिल ऑपरेशन अधिक सटीकता के साथ किए जा सकते हैं।
विभाग के अनुसार आवश्यकता और बीमारी के आधार पर 1 से 18 वर्ष तक के बच्चों में रोबोटिक सर्जरी की जा सकती है।हालांकि, हर बच्चे के लिए यह प्रक्रिया आवश्यक नहीं होती और इसका निर्णय विशेषज्ञ चिकित्सक बच्चे की स्थिति के आधार पर करते हैं।
आईजीएमसी में रोबोटिक सर्जरी की लागत निजी अस्पतालों की तुलना में कम रखने का प्रयास किया गया है। जानकारी अनुसार यहां रोबोटिक सर्जरी की लागत करीब 30 हजार रुपये से शुरू होती है। बीमारी, ऑपरेशन की जटिलता और आवश्यक उपचार के अनुसार खर्च अलग-अलग हो सकता है। सरकारी संस्थान में आधुनिक रोबोटिक तकनीक की उपलब्धता से प्रदेश के मरीजों को अपेक्षाकृत कम लागत में अत्याधुनिक उपचार की सुविधा मिलने की उम्मीद है।