ताज़ा समाचार

बागवानों को अपराधी की तरह नोटिस देकर कटघरे में खड़ा कर रही कांग्रेस सरकार, 100 बोरी से अधिक सेब देने वालों की जांच का तुगलकी फरमान तुरंत वापस हो – चेतन बरागटा

शिमला। भाजपा नेता एवं जुब्बल-कोटखाई से प्रत्याशी चेतन बरागटा ने सेब बागवानों के मुद्दों को लेकर प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिस बागवानी अर्थव्यवस्था के बल पर प्रदेश के लाखों परिवारों की आजीविका चलती है, आज उसी बागवान को कांग्रेस सरकार ने अपनी नीतियों और फरमानों से परेशान करके रख दिया है। कम फसल, प्रतिकूल मौसम, बढ़ती उत्पादन लागत और प्राकृतिक चुनौतियों के बीच बागवान सरकार से सहयोग की उम्मीद कर रहा था, लेकिन सरकार उसे राहत देने के बजाय नोटिस थमा रही है। बरागटा ने कहा कि कांग्रेस ने 2022 के विधानसभा चुनाव में अपनी पांचवीं गारंटी में कहा था कि “बागवान अपने फलों की कीमत स्वयं तय करेंगे”, लेकिन सत्ता में आने के बाद कांग्रेस इस वादे को भूल गई। उन्होंने कहा कि सेब उत्पादक क्षेत्रों से कांग्रेस को भारी जनसमर्थन मिला और बड़ी संख्या में उसके विधायक चुनकर आए, इसके बावजूद बागवानों की समस्याओं के समाधान में सरकार पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने बताया कि बागवानों की इन्हीं समस्याओं को लेकर उन्होंने आज महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है और सरकार की नीतियों से पैदा हो रही परेशानियों को उनके समक्ष रखा है।

बागवान है या अपराधी? आधार, जमाबंदी, ततीमा, आढ़ती की पर्ची और बैंक स्टेटमेंट तक मांग रही सरकार: चेतन बरागटा ने कहा कि वर्ष 2025 में एमआईएस के अंतर्गत 100 से अधिक बोरियां देने वाले बागवानों को जांच और सत्यापन के नोटिस भेजे जा रहे हैं। नोटिस में उनसे आधार कार्ड, राजस्व रिकॉर्ड, जमाबंदी, ततीमा, ए एवं बी ग्रेड सेब की बिक्री से संबंधित आढ़तियों की पर्चियां तथा बैंक स्टेटमेंट जैसे दस्तावेज मांगे जा रहे हैं और अधिकारियों के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा जा रहा है। उन्होंने कहा, “क्या बागवान अपराधी है? जब HPMC ने बागवान से सेब खरीदा, तब यह सत्यापन क्यों नहीं किया गया? अब भुगतान का समय आया तो बागवान को दस्तावेज लेकर अधिकारियों के सामने खड़ा किया जा रहा है। हिमाचल में बागवानी के इतिहास में ऐसी व्यवस्था हमने कभी नहीं देखी।” बरागटा ने दावा किया कि वर्ष 2025 में करीब 45 हजार बागवानों ने एमआईएस के तहत सेब दिया था और इनमें 7 हजार से अधिक ऐसे बागवान हैं जिनकी आपूर्ति 100 बोरियों से अधिक थी। उन्होंने कहा कि यदि इतनी बड़ी संख्या में किसानों-बागवानों के भुगतान पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं तो सरकार को पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक करनी चाहिए।

कांग्रेस बताए—अपने प्रभावशाली नेताओं को नोटिस क्यों नहीं? : बरागटा ने सरकार पर चयनात्मक कार्रवाई का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आम बागवानों को नोटिस दिए जा रहे हैं, लेकिन सत्ता के नजदीक बैठे कुछ प्रभावशाली लोगों के मामले में यही सख्ती दिखाई नहीं दे रही। उन्होंने कहा, “मैं किसी व्यक्ति पर व्यक्तिगत आरोप नहीं लगा रहा, लेकिन सरकार श्वेत पत्र जारी करे। सार्वजनिक करे कि 100 बोरियों से अधिक सेब देने वाले कुल कितने बागवान हैं, कितनों को नोटिस भेजे गए, किन आधारों पर नोटिस भेजे गए और किन लोगों को इससे बाहर रखा गया। नियम है तो सबके लिए समान होना चाहिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे मामलों की संख्या हजारों में है और केवल ठियोग क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में नोटिस भेजे जाने की जानकारी सामने आ रही है। सरकार को जिले और विधानसभा क्षेत्रवार पूरा डेटा सार्वजनिक करना चाहिए।

केवल बागवान की जांच क्यों, पूरी प्रोक्योरमेंट चेन की जांच हो : बरागटा ने कहा कि यदि सरकार को एमआईएस की खरीद में किसी प्रकार की गड़बड़ी का संदेह है तो जांच केवल बागवान तक सीमित क्यों है? जिन कलेक्शन सेंटरों पर सेब लिया गया, वहां तैनात स्टाफ, HPMC के रिकॉर्ड, परिवहन व्यवस्था और पूरी सरकारी प्रोक्योरमेंट चेन की भी समान रूप से जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि “HPMC भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है।” सरकार बागवान के दस्तावेज खंगालने से पहले अपनी संस्थाओं और प्रोक्योरमेंट व्यवस्था की पारदर्शिता सुनिश्चित करे। उन्होंने पिछले सीजन में बड़ी मात्रा में सेब नष्ट किए जाने के मामले पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार और HPMC सार्वजनिक रूप से बताएं कि वास्तव में कितनी मात्रा में सेब नष्ट किया गया, उसका रिकॉर्ड क्या है और पूरी प्रक्रिया किस आधार पर हुई। इसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

₹100 करोड़ से ज्यादा बकाया—पहले बागवान का हक दो: चेतन बरागटा ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में एमआईएस के तहत बागवानों की ₹100 करोड़ से अधिक की देनदारी लंबित है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि सरकार जांच और कागजी कार्रवाई में बागवानों को उलझाने के बजाय उनका बकाया तत्काल जारी करे। उन्होंने कहा, “सरकार बागवान पर कोई एहसान नहीं कर रही है। यह उसका अपना पैसा और उसका हक है। पहले हमारा ₹100 करोड़ से अधिक का बकाया दीजिए।” उन्होंने एक बुजुर्ग बागवान का उदाहरण देते हुए कहा कि भुगतान के लिए बुजुर्गों तक को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। जिन लोगों ने दशकों की मेहनत से हिमाचल की सेब अर्थव्यवस्था खड़ी की, उन्हें भुगतान के लिए कार्यालयों के चक्कर कटवाना शर्मनाक है।

25 प्रतिशत की शर्त किस आधार पर? सरकार स्पष्ट करे: बरागटा ने सरकार की सेब खरीद संबंधी नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस वर्ष मौसम की मार, फंगल अटैक, ओलावृष्टि और अन्य परिस्थितियों के कारण कई बागवानों के पास बड़ी मात्रा में ऐसा सेब हो सकता है जिसे एमआईएस में देना पड़े। ऐसी स्थिति में यदि सरकार कुल उत्पादन के केवल 25 प्रतिशत तक खरीद जैसी शर्त लगाती है तो उन बागवानों का क्या होगा जिनकी 50, 60 या 80 प्रतिशत तक फसल मौसम की मार के कारण एमआईएस श्रेणी में चली गई?उन्होंने कहा कि सरकार स्पष्ट करे कि यह सीमा किस वैज्ञानिक और व्यावहारिक आधार पर निर्धारित की गई है।

संयुक्त जमीन की जमीनी हकीकत से अनजान सरकार: बरागटा ने कहा कि हिमाचल में बड़ी संख्या में बागवानों की जमीन संयुक्त खातों में है। एक परिवार में माता, पिता, भाई या अन्य सदस्य संयुक्त हिस्सेदार हो सकते हैं जबकि एमआईएस की पर्ची किसी एक सदस्य के नाम बनती है। उन्होंने सवाल किया कि ऐसी परिस्थितियों में जमीन और उत्पादन का अनुपात तय करने का आधार क्या होगा? बिना जमीनी वास्तविकताओं को समझे नई-नई गाइडलाइन जारी करना सरकार और नौकरशाही के बीच बड़े कम्युनिकेशन गैप को दर्शाता है।

सेब सीजन चल रहा है, कलेक्शन सेंटर कहां हैं? ; चेतन बरागटा ने कहा कि सेब की हार्वेस्टिंग शुरू हो चुकी है लेकिन कई क्षेत्रों में बागवानों को अभी तक कलेक्शन सेंटरों को लेकर स्पष्टता नहीं है। उन्होंने कोटखाई का उदाहरण देते हुए कहा कि विरोध के बाद कलेक्शन सेंटर बढ़ाने की बात कही गई, लेकिन धरातल पर बागवानों को यह स्पष्ट नहीं कि कौन से सेंटर चालू हैं और कहां से खरीद शुरू हुई है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि सभी अधिसूचित कलेक्शन सेंटर तत्काल पूर्ण रूप से क्रियाशील किए जाएं और उनकी सूची, स्थान तथा खरीद शुरू होने की तारीख सार्वजनिक की जाए। उन्होंने कहा कि यदि कलेक्शन सेंटर समय पर नहीं खुलेंगे तो बागवान अपना सी-ग्रेड सेब लेकर कहां जाएगा? फल खराब होने पर होने वाले करोड़ों रुपये के नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा?

HPMC और HIMFED के बीच संतुलन बनाए सरकार: बरागटा ने कहा कि पिछले वर्ष HIMFED को खरीद प्रक्रिया से लगभग बाहर करने को लेकर भाजपा ने सवाल उठाए थे। इस बार भी बागवान चाहते हैं कि HPMC के साथ HIMFED को पर्याप्त संख्या में कलेक्शन सेंटर दिए जाएं। उन्होंने कहा कि बागवानों का HIMFED के साथ अच्छा अनुभव रहा है, इसलिए सरकार दोनों संस्थाओं के बीच संतुलन बनाए और खरीद की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करे।

स्प्रे खत्म होने के बाद सामग्री देने का क्या फायदा?: चेतन बरागटा ने आरोप लगाया कि बागवानों को खाद, स्प्रे ऑयल और अन्य जरूरी सामग्री उस समय उपलब्ध नहीं हुई जब वास्तव में उसकी आवश्यकता थी। बाद में सामग्री उपलब्ध कराने का कोई लाभ नहीं जब संबंधित स्प्रे शेड्यूल ही समाप्त हो चुका हो। उन्होंने कहा कि कई मामलों में सामग्री बाजार भाव से महंगी होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। सरकार बताए कि बागवानों के नाम पर बनाई गई व्यवस्था आखिर बागवान के काम कब आएगी?

एंटी हेलनेट, स्प्रे मशीन और पावर टिलर की सब्सिडी बहाल करे सरकार: बरागटा ने कहा कि केंद्र सरकार नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड, MIDH और अन्य योजनाओं के माध्यम से बागवानी क्षेत्र को सहायता प्रदान कर रही है, लेकिन प्रदेश में बागवान एंटी हेलनेट, स्प्रे मशीन, पावर टिलर सहित विभिन्न मदों की सब्सिडी के लिए परेशान हैं। उन्होंने मांग की कि लंबित सब्सिडी तत्काल जारी की जाए और बंद पड़ी सहायता योजनाओं को फिर से प्रभावी तरीके से लागू किया जाए। उन्होंने अपने पिता स्वर्गीय नरेंद्र बरागटा का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्व भाजपा सरकार के समय पीपी सेंटरों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण दवाइयां उपलब्ध करवाने की व्यवस्था को मजबूत किया गया था। वर्तमान सरकार इन केंद्रों में पर्याप्त एवं गुणवत्तापूर्ण दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करे।

सरकार नहीं जागी तो सड़कों पर उतरेगी भाजपा: चेतन बरागटा ने कांग्रेस सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि भाजपा पहले भी ठियोग, कोटखाई, रोहड़ू सहित सेब उत्पादक क्षेत्रों में बागवानों के मुद्दों को लेकर आवाज उठा चुकी है। सरकार को अभी लोकतांत्रिक तरीके से चेताया जा रहा है, लेकिन यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा, “100 बोरियों से अधिक सेब देने वाले बागवानों को जारी नोटिस वापस किए जाएं, चयनात्मक कार्रवाई बंद हो, पूरी प्रोक्योरमेंट चेन की जांच हो, एमआईएस का ₹100 करोड़ से अधिक बकाया तत्काल जारी हो, सभी अधिसूचित कलेक्शन सेंटर खोले जाएं, HPMC-HIMFED के बीच संतुलन बनाया जाए, सी-ग्रेड सेब की पर्याप्त खरीद हो, पीपी सेंटरों में दवाइयां उपलब्ध हों और बागवानों की सब्सिडी बहाल की जाए।” बरागटा ने कहा, “यह कोई खैरात नहीं है, यह हिमाचल के बागवान का हक है। सरकार बागवान का हक उसे दे। यदि कांग्रेस सरकार नहीं जागी तो भाजपा बागवानों के साथ सड़कों पर उतरेगी और सरकार के खिलाफ भयंकर आंदोलन खड़ा किया जाएगा।”

सम्बंधित समाचार

Comments are closed