सोलन: नौणी और इटरनल यूनिवर्सिटी के बीच शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग को मजबूत करने के लिए समझौता
सोलन: नौणी और इटरनल यूनिवर्सिटी के बीच शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग को मजबूत करने के लिए समझौता
सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी और इटरनल यूनिवर्सिटी, बड़ू साहिब, हिमाचल प्रदेश ने दोनों विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक, अनुसंधान, शिक्षा एवं संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस एमओयू का उद्देश्य ज्ञान, विशेषज्ञता एवं संस्थागत सुविधाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के साथ-साथ दोनों संस्थानों के विद्यार्थियों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों और अन्य हितधारकों के लिए नए अवसर उपलब्ध करवाना है।एमओयू पर नौणी विवि के कुलपति प्रो. एचएस बवेजा और डॉ. नीलम कौर, कुलपति, इटरनल यूनिवर्सिटी ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर डॉ. केके रैना, वैज्ञानिक सलाहकार, यूएचएफ नौणी तथा डॉ. अनिल हांडा, ओएसडी, यूएचएफ नौणी भी उपस्थित रहे।
यह सहयोग औद्यानिकी, वानिकी, कृषि एवं संबद्ध विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, औषधीय एवं सुगंधित पौधों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवीकरणीय ऊर्जा, भारतीय ज्ञान प्रणाली, मूल्य आधारित शिक्षा तथा अन्य उभरते क्षेत्रों में पारस्परिक हित के विषयों पर केंद्रित होगा। समझौते के तहत दोनों विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप, प्रायोगिक अधिगम कार्यक्रम (ELP) और ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (RAWE) के अवसर उपलब्ध करवाने के साथ-साथ शैक्षणिक, अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियों के लिए विद्यार्थियों और शिक्षकों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देंगे। दोनों संस्थान संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं के विकास एवं क्रियान्वयन की दिशा में भी कार्य करेंगे।
एमओयू के अंतर्गत सम्मेलनों, संगोष्ठियों, कार्यशालाओं एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संयुक्त आयोजन तथा संबंधित संस्थागत नियमों और लाइसेंसिंग शर्तों के अधीन पुस्तकालय सुविधाओं, वैज्ञानिक साहित्य, ज्ञान संसाधनों एवं अन्य शैक्षणिक सूचनाओं को साझा करने की व्यवस्था भी की जाएगी।
दोनों विश्वविद्यालय कृषि, औद्यानिकी, वानिकी, स्वास्थ्य, पर्यावरण एवं सतत विकास से संबंधित पर्यावरण विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाशेंगे। हर्बेरियम एवं औषधीय पौधों से संबंधित सुविधाओं के शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक भ्रमण को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके साथ ही औषधीय एवं सुगंधित पौधों के पहचान, संरक्षण, लक्षण वर्णन, दस्तावेजीकरण एवं सतत उपयोग से संबंधित संयुक्त गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
सहयोग के एक अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में शिक्षा, अनुसंधान, कृषि, औद्यानिकी, वानिकी एवं संबद्ध विषयों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा विज्ञान, डिजिटल प्रौद्योगिकियों तथा निर्णय-सहायक प्रणालियों के अनुप्रयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
यह साझेदारी मूल्य आधारित शिक्षा, नैतिक विकास, समग्र अधिगम एवं आध्यात्मिक जागरूकता के क्षेत्र में अनुभवों के आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित करेगी। यह सहयोग दोनों विश्वविद्यालयों के बीच संस्थागत संबंधों को मजबूत करने तथा विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के लिए शैक्षणिक आदान-प्रदान, अंतर्विषयक अनुसंधान, कौशल विकास एवं नवाचार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।