एफआईआर, पुलिस व प्रशासनिक जांच शुरू, तकनीकी सुरक्षा और पारदर्शिता को और मजबूत करने के कदम
श्रद्धालुओं से भ्रामक सूचनाओं से बचने की अपील
अंब (ऊना): माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर की सुगम दर्शन प्रणाली में संभावित अनियमितता के मामले में मंदिर ट्रस्ट और जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बहुस्तरीय जांच शुरू कर दी है। उपायुक्त जतिन लाल के निर्देशानुसार मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कराई गई। इसके साथ ही उन्होंने मामले की व्यापक प्रशासनिक जांच के साथ-साथ भविष्य के लिए आवश्यक प्रक्रियागत एवं प्रशासनिक सुधार सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त उपायुक्त, ऊना को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। वे सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे । उपमंडलाधिकारी (नागरिक) अंब सहित सभी संबंधित अधिकारी जांच में आवश्यक सहयोग प्रदान करेंगे।
मंदिर ट्रस्ट की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में ट्रस्ट के सहायक आयुक्त एवं एसडीएम अंब पारस अग्रवाल ने कहा कि सुगम दर्शन प्रणाली की तकनीकी सुरक्षा एवं पारदर्शिता को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 19 जुलाई को संभावित अनियमितता ट्रस्ट के संज्ञान में आते ही मामले से उपायुक्त को अवगत कराया गया। उनके निर्देशानुसार तत्काल एफआईआर दर्ज कराई गई। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सुगम दर्शन प्रणाली में कार्यरत कर्मचारियों के स्थान पर नए कर्मचारियों की तैनाती की गई। साथ ही मंदिर ट्रस्ट द्वारा तीन सदस्यीय प्रारंभिक जांच समिति गठित कर मामले की जांच शुरू की गई।
प्रारंभिक तकनीकी जांच के दौरान 19 जुलाई के सॉफ्टवेयर लेन-देन का विश्लेषण किया गया। जांच में पाया गया कि उस दिन वास्तविक रूप से 23 लेन-देन दर्ज हुए थे, जबकि प्रणाली में 88 लेन-देन प्रदर्शित हो रहे थे। प्रथम दृष्टया संभावना व्यक्त की गई है कि अतिरिक्त प्रविष्टियां किसी अनधिकृत व्यक्ति द्वारा सॉफ्टवेयर के लॉगिन आईडी एवं पासवर्ड (सॉफ्टवेयर क्रेडेंशियल्स) के संभावित दुरुपयोग के कारण उत्पन्न हुई हों। हालांकि, ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष विस्तृत तकनीकी जांच और जांच समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही निकाला जाएगा।
प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि वर्ष 2023 में शुरू की गई सुगम दर्शन प्रणाली का उद्देश्य श्रद्धालुओं, विशेषकर बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों एवं दिव्यांगजनों को सुविधाजनक एवं व्यवस्थित दर्शन उपलब्ध कराना है। इस व्यवस्था के माध्यम से अब तक 12 करोड़ रुपये से अधिक का सेवा शुल्क प्राप्त हुआ है, जिसका उपयोग श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विकास तथा जनकल्याण एवं सामाजिक सहायता संबंधी कार्यों में किया जा रहा है।
ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि सुगम दर्शन पास के लिए लिया जाने वाला शुल्क मंदिर का दान अथवा चढ़ावा नहीं है, बल्कि यह सुविधा उपलब्ध कराने के लिए निर्धारित सेवा शुल्क है। मंदिर में प्राप्त दान एवं चढ़ावे का पृथक, पारदर्शी एवं विधिवत लेखा-जोखा रखा जाता है तथा उसका इस सेवा शुल्क से कोई संबंध नहीं है।
सुगम दर्शन प्रणाली की तकनीकी सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ एवं पारदर्शी बनाने के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड के साथ आवश्यक पत्राचार किया जा रहा है, ताकि भविष्य में प्रणाली और अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय एवं पारदर्शी ढंग से संचालित की जा सके।
एफआईआर के आधार पर पुलिस मामले की जांच कर रही है। वहीं, प्रशासनिक जांच के लिए नियुक्त अतिरिक्त उपायुक्त, ऊना पूरे प्रकरण के अभिलेखों का परीक्षण कर तथ्यों का सत्यापन, उत्तरदायित्व निर्धारण, आवश्यक अनुशंसाएं देने तथा भविष्य में ऐसी अनियमितताओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रक्रियागत एवं प्रशासनिक सुधारों संबंधी सुझावों सहित सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।
मंदिर ट्रस्ट एवं जिला प्रशासन ने कहा है कि श्रद्धालुओं की सुविधा, पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी तथा इसकी प्रामाणिक जानकारी समय-समय पर सार्वजनिक की जाएगी। श्रद्धालुओं, नागरिकों एवं मीडिया प्रतिनिधियों से अपील की गई है कि किसी भी अपुष्ट अथवा भ्रामक सूचना पर विश्वास न करें तथा केवल मंदिर ट्रस्ट एवं प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं को ही प्रामाणिक मानें।