मुख्यमंत्री को जल्दी निर्णय लेकर रेत बजरी की कीमतें तय कर आम जनता को देनी चाहिये राहत : सुधीर शर्मा

ब्यास ड्रेजिंग में बेस वैल्यू जमा नहीं, बैंक गारंटी भी नहीं; सरकार को करोड़ों का नुकसान – सुधीर शर्मा

शिमला: भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने कुल्लू में ब्यास नदी में ड्रेजिंग के नाम पर हो रहे कार्य को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि खनन से संबंधित कार्य खनन विभाग के बजाय वन विभाग के माध्यम से करवाया गया और इससे प्रदेश सरकार को मिलने वाले राजस्व एवं रॉयल्टी का भारी नुकसान हुआ है।

सुधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में बेस वैल्यू प्राइस सरकार के पास जमा नहीं करवाया गया और आवश्यक बैंक गारंटी भी जमा नहीं हुई। यदि यह सही है तो सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इन वित्तीय औपचारिकताओं के बिना कार्य को आगे बढ़ाने की अनुमति किस आधार पर और किस अधिकारी के स्तर पर दी गई।

उन्होंने कहा कि इससे भी गंभीर सवाल यह है कि वन विभाग के माध्यम से माइनिंग करवाने की कैबिनेट मंजूरी कथित रूप से जल्दबाजी में वाया सर्कुलेशन करवाई गई। सरकार को कैबिनेट के इस निर्णय से संबंधित पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करना चाहिए और बताना चाहिए कि ऐसी क्या आपात स्थिति थी जिसके कारण नियमित प्रक्रिया के बजाय सर्कुलेशन के माध्यम से फैसला लेना पड़ा।

सुधीर शर्मा ने दावा किया कि भारत सरकार के लागू नियमों के अनुसार वन विभाग माइनिंग करवाने के लिए अधिकृत एजेंसी नहीं है। उन्होंने सरकार से संबंधित केंद्रीय नियम, अनुमति और वैधानिक आधार सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा कि यदि कोई विशेष अनुमति ली गई थी तो उसे भी जनता के सामने रखा जाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे घटनाक्रम के पीछे कुल्लू के एक प्रभावशाली नेता की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल हैं और उसी के प्रभाव में खनन विभाग से काम लेकर वन विभाग को दिए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि यह फैसला किसकी सिफारिश पर हुआ और इससे किसे आर्थिक लाभ पहुंचा।

सुधीर शर्मा ने कहा कि इस मामले में एक कांग्रेस नेत्री को ₹20 करोड़ दिए जाने की चर्चा भी सामने आ रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कथित लेन-देन की सत्यता स्वतंत्र जांच से ही स्थापित हो सकती है, इसलिए सरकार को आरोपों को खारिज करने मात्र के बजाय पूरे वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष जांच करवानी चाहिए। यदि आरोप गलत हैं तो जांच से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और यदि कोई अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि नदी से कितनी खनिज सामग्री निकाली गई, उसका बेस वैल्यू प्राइस कितना था, सरकार को कितनी रॉयल्टी मिलनी थी, कितनी राशि वास्तव में जमा हुई, बैंक गारंटी क्यों नहीं ली गई और निकाली गई सामग्री कहां गई—इन सभी सवालों का दस्तावेजी जवाब सरकार को देना चाहिए।

सुधीर शर्मा ने कहा कि मामले में सरकारी राजस्व, खनिज संपदा और कथित वित्तीय लेन-देन से जुड़े गंभीर आरोप होने के कारण इसकी जांच केवल विभागीय स्तर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा, “यह मामला ED जांच के लिए फिट केस है। पूरे वित्तीय लेन-देन और लाभार्थियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए और यदि मनी लॉन्ड्रिंग अथवा अन्य अनुसूचित अपराध से जुड़े तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित एजेंसियां कानून के अनुसार कार्रवाई करें।”

उन्होंने कहा कि ब्यास नदी और प्रदेश की प्राकृतिक एवं खनिज संपदा जनता की संपत्ति है। किसी प्रभावशाली व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों से समझौता करने और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। सरकार पूरे मामले से संबंधित कैबिनेट निर्णय, अनुमतियां, बेस वैल्यू, बैंक गारंटी, रॉयल्टी और निकाली गई सामग्री का रिकॉर्ड सार्वजनिक करे तथा स्वतंत्र जांच करवाए।

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