रैंप कार्यक्रम के तहत हिमाचल प्रदेश की उल्लेखनीय प्रगति, केंद्र ने सराहे प्रयास

शिमला: हिमाचल प्रदेश में राइजिंग एंड एक्सेलेरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस (रैंप) कार्यक्रम के क्रियान्वयन की व्यापक समीक्षा बैठक आज उद्योग निदेशालय में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं विकास आयुक्त डॉ. रजनीश ने की। बैठक में आयुक्त उद्योग डॉ. यूनुस और  अशोक गौतम, सहायक निदेशक, एमएसएमई विकास एवं सुविधा कार्यालय (DFO), सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमओएमएसएमई), सोलन, संयुक्त निदेशक, उद्योग विभाग उद्योग विभाग, अनिल ठाकुर, तथा संयुक्त निदेशक उद्योग विभाग  रमेश वर्मा सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में मंत्रालय द्वारा स्वीकृत विभिन्न हस्तक्षेपों के तहत राज्य में हुई प्रगति की समीक्षा की गई। उद्योग आयुक्त ने बताया कि रैंप कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। एमएसएमई स्मार्ट पहल के तहत 1,080 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों का डिजिटल तत्परता आकलन पूरा किया गया है। वहीं एमएसएमई ग्रीनिंग पहल के अंतर्गत 890 इकाइयों में संसाधन दक्षता एवं स्वच्छ उत्पादन अध्ययन कर पर्यावरण अनुकूल औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया है।
उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए राज्य में 48 प्री-इन्क्यूबेशन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनसे औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और पॉलिटेक्निक संस्थानों के लगभग 19 हजार युवा जुड़े हैं। यह पहल नवाचार को बढ़ावा देने और भावी उद्यमियों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
एमएसएमई इकाइयों की वित्तीय पहुंच को बेहतर बनाने के लिए इनवॉइस मार्ट और आरएक्सआईएल के साथ समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किए गए हैं। इसके माध्यम से एमएसएमई, राज्य सार्वजनिक उपक्रमों, बोर्डों एवं निगमों को व्यापार देयक छूट प्रणाली मंच से जोड़ा जा रहा है, जिससे भुगतान में देरी की समस्या का समाधान होगा। बैठक में बताया गया कि सामाजिक समावेशन रैंप कार्यक्रम का प्रमुख आधार है, जिसके तहत महिला एवं वंचित वर्गों द्वारा संचालित उद्यमों को वित्तीय और व्यावसायिक अवसरों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 1,325 ग्रामीण महिला उद्यमियों को हिमाचल प्रदेश राज्य हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम तथा हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। कार्यक्रम के तहत 60 महिला उद्यमियों की पहचान कर उनमें से 20 के लिए विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। इसके अतिरिक्त 16 वित्तीय एवं नेटवर्किंग बैठकों के माध्यम से 257 महिला उद्यमियों को लाभ पहुंचाया गया।
प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य किया गया है। जिला उद्योग केंद्रों, एकल खिड़की स्वीकृति प्राधिकरणों तथा उद्योग निदेशालय में 7,492 पुराने अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया गया है।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की प्रगति पर भी विस्तृत चर्चा हुई। डॉ. रजनीश ने योजना के विभिन्न घटकों की समीक्षा करते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने वित्तीय संस्थानों से योजना के सभी पात्र कारीगरों को ऋण सुविधा उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि देशभर में लाभार्थियों को टूलकिट उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा रही है तथा शेष पात्र कारीगरों को भी शीघ्र टूलकिट उपलब्ध करा दिए जाएंगे। समीक्षा के दौरान योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाने और अधिक से अधिक पारंपरिक कारीगरों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया।
डॉ. रजनीश ने रैंप कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए हिमाचल प्रदेश के प्रयासों की सराहना करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में हासिल उपलब्धियों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि राज्य ने कार्यक्रम के उद्देश्यों को धरातल पर उतारने में उल्लेखनीय कार्य किया है। बैठक में यह भी बताया गया कि उद्योग निदेशालय भविष्य में अंतरराष्ट्रीय अध्ययन एवं अनुभव यात्राओं का आयोजन करेगा, ताकि एमएसएमई विकास के वैश्विक सर्वोत्तम मॉडल अपनाकर राज्य के उद्यमिता तंत्र को और मजबूत किया जा सके।

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