शिमला: मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने प्रदेश के भाजपा सांसदों व नेताओं से पूछा है कि वह राजस्व घाटा अनुदान बंद करने के पक्ष में है या विरोध में। उन्होंने कहा है कि उन्हें प्रदेश के समक्ष अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, क्योंकि इसके बंद होने से प्रदेश के विकास पर अंकुश लगेगा। उन्होंने कहा है कि राजस्व घाटा अनुदान बंद होना पहाड़ी राज्यों के साथ बहुत बड़ा अन्याय है।
आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए नरेश चौहान ने कहा कि देश के आजादी के बाद से ही प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए तत्कालीन वित्त आयोग ने ऐसे पहाड़ी राज्यों के विकास को धार देने के लिये राजस्व घाटा अनुदान देने की व्यवस्था की थी जिसे वित्त आयोग निर्धारित करते हुए इसमें बढ़ोतरी करता था। उन्होंने कहा कि यह पैसा प्रदेश के विकास पर खर्च होता था। उन्होंने कहा कि अब इसके बंद होने से प्रदेश को 40 से 50 हजार करोड़ का नुकसान होगा।
नरेश चौहान ने कहा कि यह लड़ाई केवल सरकार की ही नही है,प्रदेश हित के लिये सभी को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 16बें वित्त आयोग के समक्ष मजबूती के साथ प्रदेश का पक्ष रखा था। प्रदेश की उम्मीद थी कि इस बार इस अनुदान में बढ़ोतरी होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश बारे सांसद अनुराग ठाकुर जो तथ्य व आंकड़े मीडिया में दे रहें है वह पूरी तरफ गुमराह करने वाले है। उन्होंने कहा कि हर साल टेक्स का पूरा पैसा केंद्र सरकार जीएसटी के तौर पर लेती है और उसका 40 प्रतिशत हिस्सा प्रदेशों को जारी किया जाता है। इसलिए उनके तथ्य केवल राजनीति से प्रेरित है।
नरेश चौहान ने पूर्व भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि उनकी कारगुजारियों से आज प्रदेश की वित्तीय स्थिति संकट में है। प्रदेश को 12 हजार करोड़ से अधिक की देनदारियां व 75 हजार करोड़ से अधिक का ऋण प्रदेश की कांग्रेस सरकार को विरासत में मिला है। उन्होंने कहा कि यह समय राजनीति या किसी पर दोषारोपण करने का नही है। उन्होंने कहा कि यह समय प्रदेश के अधिकारों को बचाने का है। उन्होंने कहा कि वह भाजपा से भी इस मुद्दे पर आग्रह कर रहें है कि सब एक साथ इकठ्ठे होकर प्रदेश को इस संकट से उभारने के लिये केंद्र सरकार से बात करें व इस राजस्व घाटा अनुदान को बहाल करने में प्रदेश सरकार का सहयोग करें।