रिकांग पिओ: जिला किन्नौर में क्षेत्र की समृद्ध प्राकृतिक विरासत के संरक्षण एवं उत्सव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 8 से 10 मई तक पहली बार कल्पा कंडे के ‘गोली’ नामक स्थान पर ‘किन्नौर बर्ड फेस्टिवल’ का आयोजन किया जाएगा। यह उत्सव 9 मई को आयोजित होने वाले ‘ग्लोबल बिग डे’ एवं ‘हिमालयन बर्ड काउंट’ के साथ समन्वित रहेगा।
उपायुक्त किन्नौर, डॉ. अमित कुमार शर्मा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इस फेस्टिवल का उद्देश्य किन्नौर एवं हिमालयी क्षेत्र की अद्वितीय जैव विविधता को उजागर करना तथा स्थानीय समुदायों और प्रकृति के बीच गहरे संबंध को सुदृढ़ करना है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन संरक्षण एवं सतत विकास के सिद्धांतों पर आधारित होगा तथा ‘स्लो टूरिज्म’ को बढ़ावा देगा, जिससे पर्यावरण, स्थानीय संस्कृति और पारिस्थितिकी का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने बताया कि फेस्टिवल के दौरान युवाओं के सशक्तिकरण एवं क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अंतर्गत 20 चयनित प्रतिभागियों को ‘नेचर गाइड प्रशिक्षण कार्यशाला’ के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे वे जैव विविधता के स्थानीय दूत बन सकें। इसके अतिरिक्त 30 विद्यार्थियों को इंटरैक्टिव एवं रोचक शिक्षण सत्रों में शामिल किया जाएगा, जिससे उनमें प्रकृति के प्रति जागरूकता एवं जिज्ञासा विकसित हो।
उपायुक्त ने बताया कि इस आयोजन में हिमाचल प्रदेश भर से शोधकर्ता, लेखक एवं प्रकृति विशेषज्ञ भाग लेंगे, जो विभिन्न सत्रों, कार्यशालाओं एवं फील्ड आधारित गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान करेंगे।
उन्होंने कहा कि फेस्टिवल के दौरान किन्नौर की सांस्कृतिक समृद्धि को भी प्रदर्शित किया जाएगा। स्थानीय कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों एवं लोक परंपराओं को मंच प्रदान कर क्षेत्र की पारंपरिक पहचान को सशक्त किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस आयोजन को सफल बनाने में जिला प्रशासन, किन्नौर, ए यू एम किन्नौर (स्थानीय संस्था), हिमाचल प्रदेश पर्यटन विभाग, वन विभाग तथा नेचर कंजरवेशन फाउंडेशन का सहयोग रहेगा।
डॉ. अमित कुमार शर्मा ने कहा कि यह पहल किन्नौर में संरक्षण, समुदाय एवं संस्कृति के समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है