शिमला : प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने कहा है कि प्रदेश में भाजपा का कोई भी झूठ अब चलने वाला नहीं। उन्होंने कहा है कि पूर्व में डबल इंजन सरकार का दावा करने वाली पूर्व भाजपा सरकार ने प्रदेश के लोगों को ठगा। प्रदेश पर 70 हजार करोड़ से अधिक का ऋण 10 हजार करोड़ से अधिक की कर्मचारियों की देनदारियां प्रदेश की कांग्रेस सरकार को विरासत में छोड़ कर गई। विनय कुमार ने मंडी में आयोजित भाजपा कार्यसमिति में पारित संकल्पों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा का कोई भी षड्यंत्र अब चलने वाला नही। भाजपा का जनविरोधी चेहरा प्रदेश के लोगों ने देखा है। उन्होंने कहा कि आज भाजपा प्रदेश हितेषी होने का ढोंग रच रही है,जबकि उसके कार्यकाल में जब कर्मचारियों ने पेंशन व अपनी अन्य मांगे पूरी करने को कहा था तो तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने उनकी मांगों पर नकारात्मक रवैया अपनाते हुए कर्मचारियों से पेंशन के लिये चुनाव लड़ने तक की बात कही थी। विनय कुमार ने कहा कि आज प्रदेश में कांग्रेस सरकार कर्मचारियों को ओल्ड पेंशन दे रही है। कर्मचारियों की देन देनदारियों को भी चरणबद्ध ढंग से पूरा किया जा रहा है। विनय कुमार ने कहा कि कांग्रेस की नीतियां प्रदेशहित में है। प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प के साथ सरकार आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के भाजपा नेता केंद्र में अपने नेताओं से मिल कर प्रदेश के हितों पर कुठाराघात कर रहें है। प्रदेश की आरडीजी बंद करना भी भाजपा की एक सोची समझी रणनीति है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा के समय भी भाजपा ने प्रदेश की कोई भी मदद नही की। केंद्र सरकार ने इसी के इशारे पर कोई राहत जारी नही की। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो प्रदेश को अपना दूसरा घर बताते हैं उन्होंने भी प्रदेश के लोगों को झूठ बोल कर गुमराह ही किया। 1500 करोड़ की आपदा राहत राशि आज दिन तक प्रदेश को नही मिली। विनय कुमार ने भाजपा की आलोचना करते हुए कहा है कि उसका कोई भी षड्यंत्र अब सफल होने वाला नही। प्रदेश में पूर्ण बहुमत वाली कांग्रेस सरकार को जिस प्रकार से अस्थिर करने की कोशिश भाजपा द्वारा की गई थी,उसमें उसे मुंह की खानी पड़ी थी।अब पंचायत चुनावों में उसे कोई सफलता मिलने वाली नही। उसका धनबल भी धरा का धरा रह जायेगा। प्रदेश के लोग मजबूती से कांग्रेस के साथ खड़े है और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के साथ ही खड़े होंगे।