दयानंद पब्लिक स्कूल शिमला में आपदा प्रबंधन पर एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित

शिमला: दयानंद पब्लिक स्कूल, दि मॉल, शिमला में सीबीएसई के पंचकुला क्षेत्रीय कार्यालय (COE Panchkula) के सौजन्य से ‘आपदा प्रबंधन’ (Disaster Management) विषय पर एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम का शानदार आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि और रिसोर्स पर्सन अनुपम शर्मा एवं  कृति शर्मा द्वारा स्कूल की प्रधानाचार्या अनुपम के साथ पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ‘बाल सुरक्षा’ (Children Safety) को सुनिश्चित करना और किसी भी अप्रत्याशित आपदा के लिए सदैव तैयार रहने (Be Prepared) की भावना को विकसित करना था। सत्र के दौरान वक्ताओं ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) और मानव हानि को बचाने (मानव हानि बचाना) पर विशेष जोर दिया। कार्यशाला के प्रथम सत्र में  अनुपम शर्मा ने आपदा प्रबंधन चक्र (Disaster Management Cycle) के चार मुख्य स्तंभों- तैयारी (Preparedness), प्रतिक्रिया (Response), सुधार (Recovery) और सामाजिक नेटवर्क (Social Network) के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि उचित योजना (Proper Planning), नियमित मॉक ड्रिल (Drill), ‘सचेत ऐप’ (Sachet App) के उपयोग और आपदा हेल्पलाइन नंबर ‘1930’ की जानकारी से संकट के समय बहुमूल्य जानें बचाई जा सकती हैं। इन सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को विभिन्न रोचक गतिविधियों द्वारा अध्यापकों को बेहद सरल ढंग से समझाया गया।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कृति शर्मा ने कमान संभाली, जिसमें अध्यापकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस सत्र में शिक्षकों द्वारा रोल-प्ले (Roll Play) के माध्यम से विभिन्न आपदा परिस्थितियों का जीवंत प्रदर्शन किया गया और यह दर्शाया गया कि संकट के समय किस प्रकार सूझबूझ से परिस्थितियों का सामना करना चाहिए।

कार्यशाला में स्कूल में पर्याप्त सुरक्षा संसाधनों की उपलब्धता और एक सक्रिय ‘स्कूल आपदा प्रबंधन कमेटी’ के निर्माण की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। दोनों सत्रों के अंत में सीखे गए कार्यों की पुनरावृत्ति (Revision) के लिए ‘तम्बोला’ (Tambola) खेल का सहारा लिया गया, जिसके माध्यम से शिक्षकों ने खेल-खेल में आपदा प्रबंधन से जुड़े तकनीकी शब्दों को दोहराया। इस प्रकार, सभी शिक्षकों ने ज्ञानवर्धन के साथ-साथ इस ज्ञानवर्धक कार्यशाला का भरपूर आनंद लिया, जो भविष्य में सुरक्षित स्कूली वातावरण तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगी।

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