विपक्ष राजनीतिक दृष्टिकोण से ऊपर उठकर प्रदेशहित में एकजुट होकर केंद्र के समक्ष अपनी बात रखें – नरेश चौहान
विपक्ष राजनीतिक दृष्टिकोण से ऊपर उठकर प्रदेशहित में एकजुट होकर केंद्र के समक्ष अपनी बात रखें – नरेश चौहान
शिमला: मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने मंगलवार को प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि यह मुख्यमंत्री का चौथा बजट है और इस बार प्रदेश को राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद किए जाने के कारण लगभग 15 प्रतिशत का वित्तीय अंतर झेलना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस विषय को सरल भाषा में समझाने की आवश्यकता है, क्योंकि इसका सीधा प्रभाव प्रदेश के लगभग 75 लाख लोगों पर पड़ेेगा, जिनमें ग्रामीण, किसान, मजदूर और आम नागरिक शामिल है। नरेश चौहान ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत विशेष श्रेणी के राज्यों को सहायता देने का प्रावधान किया गया था, क्योंकि ऐसे राज्य अपने संसाधनों के आधार पर पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं हो सकते। हिमाचल जैसे छोटे और पहाड़ी राज्य के लिए यह सहायता अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने कहा कि 16वें वित्त आयोग द्वारा इस प्रावधान का उल्लेख नहीं किए जाने से प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 10,000 करोड़ रुपये और पांच वर्षों में करीब 50,000 करोड़ रुपये की संभावित सहायता से वंचित होना पड़ सकता है। 15 प्रतिशत का यह बजटीय अंतर राज्य के अपने संसाधनों से पूरा करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि प्रदेश के अधिकार और भविष्य का प्रश्न है। राज्य सरकार ने इस विषय पर सर्वदलीय बैठक बुलाई, विशेष विधानसभा सत्र आयोजित किया और सभी दलों को साथ लेकर केंद्र सरकार के समक्ष प्रदेश का पक्ष रखने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री ने तर्क, तथ्य और संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर इस विषय पर केंद्रीय वित्त मंत्री से विस्तृत चर्चा की है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे राजनीतिक दृष्टिकोण से ऊपर उठकर प्रदेशहित में एकजुट होकर केंद्र के समक्ष अपनी बात रखें। चौहान ने एआई समिट और प्रदर्शन से जुड़े आरोप व इस दौरान हुए प्रदर्शन के संदर्भ में स्पष्ट किया कि युवाओं ने एआई समिट का विरोध नहीं किया था, बल्कि अमेरिका-भारत व्यापार समझौते के संभावित प्रभावों, विशेषकर कृषि और बागवानी क्षेत्र पर पड़ने वाले असर को लेकर अपनी चिंता जताई थी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराना नागरिकों का अधिकार है। इसे देशद्रोह या देश की छवि खराब करने से जोड़ना अनुचित है। उन्होंने यह भी कहा कि समिट के दौरान प्रस्तुत कुछ मॉडलों को लेकर जो विवाद सामने आए, उन पर केंद्र सरकार को स्पष्टता प्रदान करनी चाहिए थी। ऐसे मुद्दों को संतुलित दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस द्वारा हिमाचल प्रदेश में बिना वारंट और स्थानीय पुलिस को सूचित किए बगैर की गई कार्रवाई निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप नहीं थी। नियमों के अनुसार किसी भी राज्य में कार्रवाई करने से पूर्व स्थानीय मजिस्ट्रेट से अनुमति लेना और संबंधित थाने को सूचना देना आवश्यक होता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल सरकार और पुलिस ने संघीय ढांचे और कानून के तहत अपने अधिकारों की रक्षा की। बाद में निर्धारित प्रक्रिया पूरी किए जाने के उपरांत संबंधित युवाओं को ट्रांजिट रिमांड पर ले जाया गया। उन्होंने इस विषय पर कुछ विपक्षी नेताओं द्वारा दिल्ली पुलिस का समर्थन किए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि प्रदेशहित के मामलों में सभी को एकजुट रहना चाहिए। नरेश चौहान ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और खाड़ी देशों में तनाव के बाद यहां रह रहे भारतीयों, विशेषकर हिमाचल प्रदेश के लगभग 40 से 42 हजार नागरिकों को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने बताया कि सरकार एक हेल्पलाइन नंबर और सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क तंत्र स्थापित कर रही है, ताकि विदेश में रह रहे लोगों और उनके परिवार से संपर्क बनाया रखा जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार, केंद्र सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर स्थिति की निरंतर निगरानी कर रही है। जैसे ही अंतरराष्ट्रीय उड़ानें सामान्य होंगी, हिमाचल के लोगों की सहायता को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने प्रदेशवासियों से संयम बनाए रखने और आधिकारिक माध्यमों से संपर्क करने की अपील की। नरेश चौहान ने राज्यसभा चुनाव की स्थिति के संदर्भ में कहा कि प्रदेश में वर्तमान संख्या बल कांग्रेस पार्टी के पक्ष में है और उम्मीदवार का चयन पार्टी हाईकमान द्वारा किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार हिमाचल प्रदेश से ही किसी योग्य व्यक्ति को अवसर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछली बार जो घटनाएं हुईं, वे न तो लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप और न ही प्रदेश के हित में थीं। ऐसी परिस्थितियों से किसी भी दल को वास्तविक लाभ नहीं हुआ, बल्कि राजनीतिक अस्थिरता और अविश्वास का माहौल बना। उन्होंने सभी दलों से लोकतांत्रिक मूल्यों और स्थापित परंपराओं का सम्मान करने की अपील की। नरेश चौहान ने कहा कि प्रदेश के भविष्य, अधिकारों और विकास से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुट होना समय की मांग है। कठिन परिस्थितियों में प्रदेशहित को सर्वोपरि रखना ही सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।