सोलन: नौणी विश्वविद्यालय–समग्र शिक्षा साझेदारी से कृषि व्यावसायिक शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा
सोलन: नौणी विश्वविद्यालय–समग्र शिक्षा साझेदारी से कृषि व्यावसायिक शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा
सोलन: कृषि व्यावसायिक शिक्षा को सुदृढ़ बनाने की दिशा में बढ़ते हुए डॉ यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में नैशनल स्किल्स क्वालफकैशन फ्रैम्वर्क के अंतर्गत स्थापित इन्क्यूबेशन सेंटर की गतिविधियों पर हितधारकों से सुझाव प्राप्त करने हेतु एक दिवसीय कार्यशाला एवं संवाद सत्र का आयोजन किया गया।यह कार्यशाला विश्वविद्यालय और समग्र शिक्षा, हिमाचल प्रदेश के मध्य हुए समझौता ज्ञापन के अंतर्गत आयोजित की गई। यह पहल भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की विश्व बैंक समर्थित STARS परियोजना के अंतर्गत संचालित की जा रही है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय में परियोजना के नोडल अधिकारी डॉ. इंदर देव ने कहा कि विश्वविद्यालय में इन्क्यूबेशन सुविधा विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप है। उन्होंने बताया कि परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु विश्वविद्यालय कृषि विशेषज्ञता, आधारभूत संरचना तथा डाटा प्रबंधन के क्षेत्र में अपना योगदान देगा। उन्होंने दोहराया कि इन्क्यूबेशन सेंटर का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त करने हेतु आवश्यक ज्ञान, व्यावहारिक कौशल तथा पेशेवर दृष्टिकोण से सुसज्जित करना है। उन्होंने यह भी बताया कि यह परियोजना नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप है, जो शिक्षा की गुणवत्ता एवं व्यावसायिक दक्षता को सुदृढ़ करने हेतु अकादमिक संस्थानों और उद्योग के बीच की दूरी को कम करने पर बल देती है।
परियोजना की सह-समन्वयक डॉ. आशु चंदेल ने परियोजना की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसे एक परिवर्तनकारी साझेदारी बताया, जिसका उद्देश्य कृषि व्यावसायिक शिक्षा ग्रहण कर रहे विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना तथा उनमें उद्यमिता कौशल विकसित करना है। उन्होंने जानकारी दी कि इस परियोजना से प्रदेश के लगभग 227 विद्यालयों के 5,000 से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित होंगे।
समग्र शिक्षा के नोडल अधिकारी सुरेंद्र रंगटा ने हिमाचल प्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य युवाओं में उद्यमशीलता की भावना विकसित करना तथा उनकी रोजगार क्षमता को बढ़ाना है। उन्होंने भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की युवा आबादी की क्षमता का समुचित उपयोग करने के लिए कौशल विकास पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। यह परियोजना विद्यार्थियों की ऊर्जा और आकांक्षाओं को सकारात्मक दिशा प्रदान करेगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के 1,700 से अधिक विद्यालयों में लगभग 2,800 व्यावसायिक प्रयोगशालाएं संचालित हैं, जिनमें लगभग 16 ट्रेड पढ़ाए जा रहे हैं।
कॉलेज ऑफ हॉर्टिकल्चर के अधिष्ठाता डॉ. मनीष शर्मा ने कहा कि यह परियोजना विद्यार्थियों को पारंपरिक व्हाइट कॉलर नौकरियों से हटाकर उद्यमिता की ओर प्रेरित करने का प्रयास है। उन्होंने बल देते हुए कहा कि शिक्षा को राष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषि देश का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जिसमें व्यावसायिक अनुप्रयोग की व्यापक संभावनाएं हैं। इस दिशा में व्यावसायिक शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की क्षमता निर्माण में विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
परियोजना के सह-समन्वयक डॉ. सुधीर वर्मा ने इन्क्यूबेशन कार्यक्रम की कार्य योजना एवं प्रस्तावित पाठ्यक्रम प्रस्तुत किया, जबकि हितेश श्योराण ने इन्क्यूबेशन सेंटर में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी। कार्यशाला में सोलन एवं आसपास के क्षेत्रों के वोकेशनल शिक्षक, परियोजना से जुड़े विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य तथा समग्र शिक्षा के अधिकारी उपस्थित रहे। प्रतिभागियों ने इन्क्यूबेशन सेंटर तथा जैव अपशिष्ट प्रबंधन इकाई का भी दौरा किया। विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करते हुए हितधारकों से महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त किए गए, ताकि परियोजना को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।