सोलन: कीटनाशकों के सुरक्षित एवं विवेकपूर्ण उपयोग को दिया बढ़ावा
सोलन: कीटनाशकों के सुरक्षित एवं विवेकपूर्ण उपयोग को दिया बढ़ावा
सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के कंडाघाट स्थित कृषि विज्ञान केंद्र, सोलन ने आज हिंदुस्तान इंसेक्टिसाइड्स लिमिटेड (एच.आई.एल.) के सहयोग से कीटनाशकों के सुरक्षित एवं विवेकपूर्ण उपयोग तथा एकीकृत कीट प्रबंधन (आई.पी.एम.) को बढ़ावा देने हेतु एक जागरूकता-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में जिला सोलन के किसानों एवं कृषि हितधारकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को कीटनाशकों के सुरक्षित, जिम्मेदार एवं आवश्यकता-आधारित उपयोग के प्रति जागरूक करना तथा टिकाऊ, पर्यावरण अनुकूल और आर्थिक रूप से लाभकारी कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना था।भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले हिंदुस्तान इंसेक्टिसाइड्स लिमिटेड के अतिरिक्त महाप्रबंधक डॉ. राजेंद्र थापर इस अवसर पर मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम के दौरान कृषि रसायनों के विवेकपूर्ण एवं जिम्मेदार उपयोग पर विशेष बल दिया गया। साथ ही, मृदा स्वास्थ्य, पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन एवं एकीकृत कीट प्रबंधन अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
इस अवसर पर डॉ. थापर ने देशभर के किसानों के कल्याण हेतु कंपनी द्वारा संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एचआईएल बीज, कृषि रसायन एवं उर्वरकों के उत्पादन में संलग्न है। उन्होंने किसानों को कीटनाशक खरीदते समय लेबल पर दिए गए निर्देशों को अवश्य पढ़ने की सलाह दी। प्रशिक्षण के दौरान सुरक्षा किट के उपयोग का प्रदर्शन भी किया गया। कीटनाशक सुरक्षा उपायों पर एक वीडियो प्रस्तुति तथा डॉ. थापर एवं केईसी एग्रीटेक प्राइवेट लिमिटेड, दिल्ली के अशोक कुमार जरवाल द्वारा सुरक्षा किट का प्रदर्शन कार्यक्रम का आकर्षण रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत में तकनीकी सहायक पूजा ठाकुर ने मुख्य अतिथि, विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों एवं जिला सोलन के विभिन्न विकास खंडों से आए किसानों का स्वागत किया। वैज्ञानिकों द्वारा विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें कीटनाशकों का सुरक्षित एवं विवेकपूर्ण उपयोग, मृदा स्वास्थ्य का महत्व, सब्जी फसलों में आईपीएम पद्धतियां, पशुधन का वैज्ञानिक प्रबंधन तथा किसानों के लिए उपलब्ध सरकारी वित्तीय योजनाएं शामिल थीं।
कीट वैज्ञानिक डॉ. अनुराग शर्मा एवं डॉ. अजय शर्मा ने फसल-विशिष्ट एवं आवश्यकता-आधारित कीटनाशक उपयोग पर बल दिया। उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक परामर्श का पालन करने, आईपीएम पद्धतियां अपनाने तथा सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया, ताकि कृषि उत्पादकता में वृद्धि के साथ पर्यावरण सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके। किसानों को गैर-रासायनिक कीट प्रबंधन विधियों को अपनाने, लेबल की सही व्याख्या, उचित मात्रा का प्रयोग, स्वास्थ्य संबंधी जोखिम, प्राथमिक उपचार, सुरक्षात्मक उपकरणों का उपयोग, सुरक्षित भंडारण एवं पर्यावरणीय प्रभावों के बारे में जानकारी दी गई।
मृदा वैज्ञानिक डॉ. मीरा देवी ने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मृदा के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में किसानों को अवगत करवाया। उन्होंने मृदा में जैविक कार्बन, रंध्रता एवं जल धारण क्षमता बढ़ाने में एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन की भूमिका को भी विस्तार से समझाया। कंडाघाट की वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मानसी शर्मा ने पशुधन के वैज्ञानिक प्रबंधन पर बल देते हुए विभागीय योजनाओं की जानकारी दी।
कार्यक्रम के अंत में आयोजित संवादात्मक सत्रों ने किसानों को व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त करने एवं क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान पर चर्चा करने का अवसर प्रदान किया। लगभग 200 किसानों ने कार्यक्रम में भाग लेकर अपने अनुभव साझा किए।