धर्म/ संस्कृति (Page 7)

दिवाली का पौराणिक महत्व, पंच-पर्वों का त्‍यौहार: दीपावली

दिवाली का पौराणिक महत्व, पंच-पर्वों का त्‍यौहार: दीपावली

“धनतेरस” दीपावली पर्व की शुरुआत का प्रतीक… दीपावली की पूरी रात दीपक प्रज्‍वलित रखते हैं, जिसके संदर्भ में हिन्‍दु धर्म में कई मान्‍यताऐं हैं, जिनमें से कुछ का वर्णन पिछले पोस्‍ट क्‍यों...

प्राकृतिक सौंदर्य से लबालब रामपुर का "सराहन"

रामपुर का “सराहन”

हिमाचल प्राकृतिक सौंदर्य से लबालब है। खूबसूरत हरी-भरी वादियां, ऊंची-ऊंची पहड़ियां। हर तरफ प्रकृति के अद्भुत् व मनमोहक नजारे।  ऐसा ही रामपुर तहसील के बशलकण्डा, थारलूधार, कण्डीधार एवं...

“देव कमरूनाग” ...यहां स्थानीय ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के लोग भी होते हैं नतमस्तक

हिमाचल: देव कमरूनाग का वर्णन महाभारत से…

कमरूनाग झील में समाया है अपार खजाना “देव कमरूनाग” … स्थानीय लोगों के साथ-साथ जहां देश-विदेश के लोग भी होते हैं नतमस्तक परंपरा के कारण सिक्कों और अमूल्य धातुओं का भारी भंडार हिमाचल को देवभूमि...

हिमाचल: किन्नौर जनपद की विवाह परंपरा, शादी में न तो मंडप बनाया जाता है, और न ही अग्नि के लिए जाते हैं फेरे

सतलुज नदी किन्नौर क्षेत्र को दो भागों में बाँटती है। यहाँ का मौसम वर्षभर सुहावना रहता है। हिमाचल की इस पावन भूमि पर हिमाच्छादित पर्वत श्रेणियों से घिरा किन्नौर एक अत्यंत रमणीय क्षेत्र है।...

पितृ पक्ष तिथि, नियम, विधि, भोजन और महत्व श्राद्ध में इन बातों का रखें विशेष ध्यान: आचार्य महिंद्र कृष्ण शर्मा

पितृ पक्ष: “श्राद्ध” जानें- तिथि, नियम, विधि, भोजन और महत्व: आचार्य महिंद्र कृष्ण शर्मा

आइए जानें:- तिथि, नियम, विधि, भोजन और महत्व पितृ पक्ष की शुरुआत भाद्रपद पूर्णिमा तिथि से होती है और समापन आश्विन की अमावस्या पर होता है। इन 16 दिनों में पितरों का श्राद्ध कर उनका तर्पण किया जाता...

"गणेशोत्सव"......गणेश जी को संकट हरता क्यूँ कहा गया ?

“गणेशोत्सव”……गणेश जी को संकट हरता क्यूँ कहा गया? ; आज और कल न करें चंद्र दर्शन- आचार्य महिंद्र कृष्ण शर्मा

“गणेशोत्सव”……गणेश जी को संकट हरता क्यूँ कहा गया? गणेश चतुर्थी के दिन, भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है। यह मान्यता है कि भाद्रपद माह में शुक्ल...

कटने के बाद कहां गया "गणेश जी" का असली मस्तक

“गणेश जी” का असली मस्तक कहां गया?

भगवान गणेश गजमुख, गजानन के नाम से जाने जाते हैं, क्योंकि उनका मुख गज यानी हाथी का है। भगवान गणेश का यह स्वरूप विलक्षण और बड़ा ही मंगलकारी है। आपने भी श्रीगणेश के गजानन बनने से जुड़े पौराणिक...