किसे कोसें, किसे पीड़ा बताएं, किससे मदद मांगे..गोलमाल है भाई, सब गोलमाल है

किसे कोसें, किसे पीड़ा बताएं, किससे मदद मांगे..गोलमाल है भाई, सब गोलमाल है

  • … सब किसी न किसी उलझन में उलझे हुए  

  • कुछ यूं चल रही है मेरे देश की विकासात्मक वायदों की धारा….!

गरीबबीसियों कहानियां होंगी 2020 की! जिन्हें सदियों तक याद किया जाएगा। जी हां! 2020 विश्वभर के लिए बहुत ही कड़वी यादें और ढेरों सबक के लिए याद किया जाएगा। “कोरोना महामारी” से बेहिसाब मौतें और अपनों से अंतिम क्षणों में न मिल पाने की टीस तथा गरीबों और मध्यमवर्गीय लोगों के दुःख, परेशानियाँ और दिक्कतों ने जाने कितने ही न भरने वाले जख्म दिए हैं। जाहिर है इस महामारी से ग्रस्त हमारा देश और प्रदेश अछुता नहीं है।

इस घड़ी में जहां हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं वो सबके सामने है। “कोरोना महामारी” का ईलाज अभी तक मिल नहीं पा रहा और ये महामारी आए दिन अपनी गिरफ्त में लोगों को लेने से बाज नहीं आ रही। संख्या 100-50 नहीं, अपितु हजारों और लाखों में जा रही है। बीमारी की मार तो मार ही रही है लेकिन गरीबी, भूख, लाचारी, मजबूरी ने आम आदमी की कमर तोड़ कर रख दी है…जनाब! किसे कोसे, किसे पीड़ा बताएं किसे अपनी बात समझाएं, किससे मदद मांगे सब अपनी ही किसी न किसी मजबूरी में उलझे हुए हैं।

  • सरकारों के करोड़ों पैकेज के ऐलान के बावजूद भी गरीब के हालात कभी सुधर नहीं सकते
  • कोरी घोषणाओं और आर्थिक पैकेज की बातें समझ से परे

गरीबों और मध्मय वर्ग के लोगों के लिए केंद्र  और राज्य सरकारें  करोड़ों रूपये खर्च करतीं हैं मगर गरीबों और मध्मय वर्ग के लोगों के हालात ज्यूँ  के त्यूं  ही बने रहे जाते हैं आखिर करोड़ों खर्च हो कहाँ जाते हैं..!  सरकारों के करोड़ों पैकेज के ऐलान के बावजूद भी गरीब के हालात कभी सुधर नहीं सकते, क्योंकि कोरी घोषणाओं और आर्थिक पैकेज की बातें इनकी समझ से परे हैं। इन्हें सिर्फ इतना पता है कि दिहाड़ी मिलेगी तो घर के परिवार वालों और अपना पेट पालेगा अन्यथा कहां क्या हो रहा है क्या मिल रहा है कोई खबर नहीं…रखते।

  • कुछ दिन लोगों व मित्रों के बीच भड़ास और चर्चाओं का दौर जारी रहेगा… उसके बाद कोई और चर्चा का विषय छिड़ जाएगा

मध्यम वर्ग के लोग जागरूक हैं। सरकार क्या घोषणाएं कर रही हैं कितना मिलेगा कितना घोषणाओं तक कागज़ों में ही सिमटा रहेगा सब हिसाब-किताब बखूबी जानते हैं। कुछ दिन सोशल मीडिया और आस-पास के लोगों व मित्रों के बीच भड़ास और चर्चाओं का दौर जारी रहेगा। उसके बाद कुछ नहीं। क्योंकि तब तक कोई और नया चर्चा का विषय छिड़ जाएगा।

जहां तक उच्च तबके की बात है। बहुत से लोग मिलेंगे अपना फायदा देखने वाले भी और दूसरों के लिए सोचने वाले भी। जो सरकार की घोषणाओं का अपने लिए भरपूर फायदा भी लेंगे और कटाक्ष भी करेंगे, लेकिन कुछ ऐसे भी होंगे जो आम जनता के हितों के लिए सहयोग भी करेंगे। क्योंकि कुछ ऐसे ही लोगों की बदौलत से ईमानदारी जिंदा है।

  •  बड़े-बड़े शहरों और विदेशों के चकाचौंध में जो अपना घर-परिवार, अपना गांव भुला बैठे थे उन्हें घर आने की खुशनसीबी जरुर हासिल हुई

2020 जो शुरुआती दौर में ही हम सबको चकित कर देने वाला रहा। कुदरत का कहर, लोगों की निःस्वार्थ सेवा, जो बड़े-बड़े शहरों और विदेशों के चकाचौंध में जो अपना घर अपने गांव अपने परिवार को भुला बैठे थे उन्हें घर आने की खुशनसीबी जरुर हासिल हुई। कोरोना ने उन्हें ये एहसास दिला दिया कि अपनी धरती अपने घर-परिवार से बढ़कर कुछ भी नहीं।कलम

  • महामारी के दौर में भी भ्रष्टाचार बढ़ रहा है…

जिंदगी और मौत के बीच बहुत कम फासला है, कब क्या हो जाए कुछ नहीं पता। लेकिन हम “सबक” कहां ले रहे हैं। इस महामारी के दौर में भी भ्रष्टाचार बढ़ रहा है, सामाजिक कार्यों का दिखावा रोजाना सोशल मीडिया पर देखने को मिल रहा, देश की सेवा में जो निस्वार्थ भाव से दिन रात अपनी सेवाएं दे रहे हैं उन्हें फुर्सत ही नहीं कि वो लोगों से अपने किये कामों की वाह-वाही बटोरे।

लोग विदेशों से  हवाई जहाजों  में अपने घर पहुंच गये लेकिन देश में ही रहने वालों को न बसें मिली न ट्रेनें नसीब हुईं। मिलों दूर का लंबा सफर पैदल तय कर लिया, लेकिन किन हालातों में परिवार छोटे-छोटे बच्चों और सामान के साथ कैसे कहाँ कितने घर पहुंचे कोई हिसाब नहीं…! गरीब लोग पैदल अपने घर पहुंचने की जदो-जहद में अपने छोटे-छोटे मासूम बच्चों के साथ भूखे व नंगे पांव दिन-रात चल रहे हैं। कहां करोड़ों के पैकेज की बात होती है कहां एक गरीब कई-कई मीलों लंबा सफर पैदल तय करके कहीं थकान से सड़कों पर ही मर रहा है, जो कि बेहद दुःखद और दिल को हिला देने वाला है।

देश और प्रदेश के अस्पतालों की बात करें! तो अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं डॉक्टर्स को उपलब्ध नहीं मरीजों को क्या होंगी। बड़ी-बड़ी घोषणाओं का क्या फायदा जब बिजली, पानी और स्कूलों तक की पूरी फ़ीस सरकार माफ नहीं कर सकती, काहे के करोड़ों का पैकेज …!किसानों और बागवानों की फसलें तबाह हो रही हैं  और तो और कोरोना वायरस की इस महामारी से जाने कितने लोगों की नौकरी पर खतरा मंडराने लगा है।

  • जो अधिकारी ईमानदारी से काम कर रहे हैं उन्हें तबादलों और राजनीतिक दबाव से कर रहे खामोश

केंद्र सरकार दवारा देश की राज्य सरकारों को करोड़ों का पैकेज दिया जा रहा है लेकिन उसके बावजूद भी हालात क्यों खराब होते जा रहे हैं ये बात समझ से परे है…! घोटाले बढ़ रहे हैं, आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति चल रही है। जो अधिकारी ईमानदारी से काम करना चाहते हैं और कर रहे हैं उन्हें तबादलों और राजनीतिक दबाव के चलते खामोश कर दिया जाता है। ये आज से नहीं होता आ रहा है ये सालों पुराना वही आलाप है। बस फर्क इतना है कि इस बार महामारी कोरोना ने सबकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं, दिया तो सबक है लेकिन सबक से सीख कौन रहा है..!

आज भी सब कागजी.. है। धरातल पर किसे क्या मिलेगा और क्या मिलता आया है। यह मुझसे बेहतर आप जानते हैं। मेरे ख्याल से तो कुछ यूं चल रही है मेरे देश की विकासात्मक वायदों की धारा….! किसे कोसें, किसे पीड़ा बताएं, किससे मदद मांगे..गोलमाल है भाई, सब गोलमाल है।

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