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महाशिवरात्रि: इस शुभ मुहूर्त करें भगवान शिव की पूजा..

महाशिवरात्रि के दिन की गई शिव की उपासना से कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है – आचार्य महिंद्र कृष्ण शर्मा

जानें शिवरात्रि की पूजा विधान

महाशिवरात्रि: इस शुभ मुहूर्त करें भगवान शिव की पूजा..

महाशिवरात्रि: इस शुभ मुहूर्त करें भगवान शिव की पूजा..

महाशिवरात्रिहिन्‍दू धर्म के प्रमुख त्‍योहरों में से एक है। इस दिन शिवालयों में शिवलिंग पर जल, दूध और बेल पत्र चढ़ाकर भक्‍त शिव शंकर को प्रसन्‍न करने की कोशिश करते हैं। मान्‍यता है कि महाशिवरात्रि के दिन जो भी भक्‍त सच्‍चे मन से शिविलंग का अभिषेक या जल चढ़ाते हैं उन्‍हें महादेव की विशेष कृपा मिलती है। कहते हैं कि शिव इतने भोले हैं कि अगर कोई अनायास भी शिवलिंग की पूजा कर दे तो भी उसे शिव कृपा प्राप्‍त हो जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि का त्योहार फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती

है। आचार्य महिंद्र कृष्ण शर्मा केअनुसार पूजा का शुभ मुहूर्त

पहले प्रहर की पूजा का समय- 26 फरवरी शाम को 6 बजकर 29 मिनट से रात 9 बजकर 34 मिनट तक है

आचार्य महिंद्र कृष्ण शर्मा

    दूसरे प्रहर की पूजा का समय- 26 फरवरी रात 9 बजकर 34 मिनट से 27 फरवरी 12 बजकर 39 मिनट तक रहेगा।

    तीसरे प्रहर की पूजा का समय -26 फरवरी की रात 12 बजकर 39 मिनट से 3 बजकर 45 मिनट तक है।

    चौथे प्रहर की पूजा का समय- 27 फरवरी सुबह 3 बजकर 45 मिनट से 6 बजकर 50 मिनट तक है।

महाशिवरात्रि पर शुभ योग

आचार्य महिंद्र कृष्ण शर्मा के अनुसार इस वर्ष 1965 के बाद यह दूसरा मौका है, जब महाशिवरात्रि 26 फरवरी को धनिष्ठा नक्षत्र, परिघ योग, शकुनी करण और मकर राशि के चंद्रमा की उपस्थिति में आ रही है। इस दिन चार प्रहर की साधना से शिव की कृपा प्राप्त होगी। यह एक विशिष्ट संयोग है, जो लगभग एक शताब्दी में एक बार बनता है। वर्ष 1965 में जब महाशिवरात्रि का पर्व आया था तब सूर्य, बुध और शनि कुंभ राशि में गोचर कर रहे थे। महाशिवरात्रि के दिन की गई शिव की उपासना से कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है।

जानें शिवरात्रि की पूजा विधान

जानें शिवरात्रि की पूजा विधान

शिवरात्रि की पूजा विधि-

– शिव रात्रि के दिन सबसे पहले सुबह स्नान करके भगवान शंकर को पंचामृत से स्नान करवाएं।

– उसके बाद भगवान शंकर को केसर के 8 लोटे जल चढ़ाएं।

– इस दिन पूरी रात दीपक जलाकर रखें।

– भगवान शंकर को चंदन का तिलक लगाएं।

– तीन बेलपत्र, भांग धतूर, तुलसी, जायफल, कमल गट्टे, फल, मिष्ठान, मीठा पान, इत्र व दक्षिणा चढ़ाएं। सबसे बाद में केसर युक्त खीर का भोग लगा कर प्रसाद बांटें।

 – पूजा में सभी उपचार चढ़ाते हुए ॐ नमो भगवते रूद्राय, ॐ नमः शिवाय रूद्राय् शम्भवाय् भवानीपतये नमो नमः मंत्र का जाप करें।

पूजन सामग्री : महाशिवरात्रि के व्रत से एक दिन पहले ही पूजन सामग्री एकत्रित कर लें, जो इस प्रकार है: शमी के पत्ते, सुगंधित पुष्‍प, बेल पत्र, धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बालें, तुलसी दल, गाय का कच्चा दूध, गन्‍ने का रस, दही, शुद्ध देसी घी, शहद, गंगा जल, पवित्र जल, कपूर, धूप, दीप, रूई, चंदन, पंच फल, पंच मेवा, पंच रस, इत्र, रोली, मौली, जनेऊ, पंच मिष्‍ठान, शिव व मां पार्वती की श्रृंगार की सामग्री, दक्षिणा, पूजा के बर्तन आदि।

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