बरसात के मौसम में खान-पान पर ज्यादा ध्यान की आवश्यकता रहती है।
- बरसात के मौसम में सबसे अहम दो बातें जिनका ध्यान रखना जरूरी है। पहली, बरसात के मौसम में उतना ही भोजन बनाएं जितनी जरूरत हो। दूसरी, बरसात के मौसम में होने वाली अधिकतर बीमारियां पानी से ही होती हैं। इसलिए पानी की ओर विशेष ध्यान दें।

- सडक़ के किनारे बिकने वाली चीजों जैसे जूस, रस, ठंडाई व चाट-पकौड़ों से मुंह फेर लें। ज्यादा ही मन करे तो साफ हाथों से, साफ बर्तनों में, साफ कटलरी, क्राकरी का प्रयोग कर स्वच्छता से घर में बना कर खाएं। इससे किसी भी प्रकार के कीटाणुओं या बैक्टीरिया का खतरा नहीं रहेगा।
- बरसात के समय हमारी पाचन प्रणाली थोड़ी सुस्त हो जाती है और किसी भी प्रकार का इन्फेक्शन जल्दी हो जाता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता भी क्षीण पड़ जाती है।
- हरी पत्तेदार साग-सब्जियां भी कम से कम खाएं, क्योंकि कीट, कीड़े, जर्म आदि इन पर बैठकर इनको खाने लायक नहीं छोड़ते हैं। किसी पार्टी, समारोह या दावत में हरी साग-सब्जी न लें, क्योंकि वहां ज्यादा तादाद में सब्जियां बनती हैं और घर जैसे सफाई, छंटाई व धुलाई नहीं होती।

- गैस पैदा करने वाली चीजें जैसे-राजमा, सोयाबीन व चनों को कम खाएं और अगर मन न माने तो अदरक, लहसुन, प्याज, हल्दी आदि का उपयोग करके इन्हें बनाएं। ज्यादा तलाभुना, ज्यादा मसाले वाला गरिष्ठ खाना न खाएं बल्कि कम से कम मसालों का उपयोग कर खाएं।
- बरसात में पहले से कटे सलाद व सब्जियां न लें, क्योंकि इन पर जम्र्स की पैदावार बहुत तेजी से होती है। जितना संभव हो, उबली, स्टीम्ड या पूरी पकी सब्जियों को ही लें ताकि वे आराम से पच जाएं।
- ओट्स को नमकीन या मीठा बनाकर खाएं जो शक्ति भी बनाए रखेगा व सुपाच्य भी है।
- शहद का सेवन यों तो साल भर हर रूप में अच्छा ही है, परंतु बरसात में इसका सेवन बहुत ही फायदेमंद है।
- अमरूद, लीची जैसे फलों का सेवन न करें। बरसात में उनमें कीड़े पड़ जाते हैं। खाने में दही, कढ़ी से भी हो सके तो परहेज रखें।














