गौमांस घर में खाने की पैरवी करने वाले हिमंत बिस्वा सरमा का देव भूमि में भाजपा द्वारा स्वागत करना भाजपा की कथनी और करनी के अंतर को उजागर करता है – कौशल मूंगटा
गौमांस घर में खाने की पैरवी करने वाले हिमंत बिस्वा सरमा का देव भूमि में भाजपा द्वारा स्वागत करना भाजपा की कथनी और करनी के अंतर को उजागर करता है – कौशल मूंगटा
शिमल: हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता कौशल मूंगटा ने आज शिमला स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में भाजपा की ‘अराजकता हटाओ’ पदयात्रा और उसमें असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की भागीदारी पर सवाल उठाए। मूंगटा ने कहा कि भाजपा स्वयं को सनातन संस्कृति और गौ संरक्षण का सबसे बड़ा पैरोकार बताती है, लेकिन उसी पार्टी के नेता ऐसे बयान देने वाले असम के मुख्यमंत्री का देवभूमि हिमाचल में स्वागत कर रहे हैं। उन्होंने हिमंत बिस्वा सरमा के 8 अप्रैल 2026 के उस बयान का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि गौमांस खाने पर रोक नहीं लगा रहे हैं, लेकिन इसे घर के भीतर ही खाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि हिमाचल के भाजपा नेताओं को ऐसे व्यक्ति के साथ मंच साझा करने की आवश्यकता क्यों पड़ी, जो गौमांस को घर में खाने की पैरवी करता है और फिर शिमला आकर हिंदुत्व की राजनीति करता है। भाजपा नेताओं को प्रदेश की जनता को बताना चाहिए कि उनके लिए गौ संरक्षण और धार्मिक आस्था के मुद्दे वास्तव में सिद्धांत हैं या केवल राजनीतिक भाषणों तक सीमित हैं। मूंगटा ने कहा कि भाजपा नेताओं द्वारा हिंदुत्व और राम मंदिर के विषय पर भाषण देना तभी सार्थक होगा, जब वे अपने राजनीतिक आचरण और सार्वजनिक बयानों में भी समानता रखें। धार्मिक भावनाओं को राजनीतिक मंचों पर इस्तेमाल करने के बजाय जनता के वास्तविक मुद्दों पर बात होनी चाहिए। घुसपैठ के मुद्दे पर भाजपा को अपने कार्यकाल का हिसाब देना चाहिए मूंगटा ने कहा कि भाजपा नेता लगातार घुसपैठ का मुद्दा उठाते हैं, लेकिन उन्हें केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संसद में प्रस्तुत आंकड़ों का भी जवाब देना चाहिए। गृह मंत्रालय के 14 मार्च 2018 के राज्यसभा जवाब के अनुसार वर्ष 2013 में 5,234 बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजा गया था, जबकि भाजपा शासन के शुरुआती वर्षों में यह संख्या वर्ष 2015 में 474, 2016 में 308 और 2017 में केवल 51 रही। उन्होंने कहा कि भाजपा को बताना चाहिए कि घुसपैठ रोकने के बड़े-बड़े दावों के बावजूद इन आंकड़ों में इतनी गिरावट क्यों आई। वर्ष 2014 से केंद्र में भाजपा की सरकार है। यदि घुसपैठ का मुद्दा इतना गंभीर है, तो सरकार को अपने कार्यकाल की ठोस उपलब्धियां और कार्रवाई का विवरण भी जनता के सामने रखना चाहिए। हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में असम पर बढ़ते कर्ज का भी जवाब दे भाजपा मूंगटा ने कहा कि हिमंत बिस्वा सरमा और भाजपा नेता दूसरे राज्यों की सरकारों पर सवाल उठाने से पहले असम में अपने शासन का वित्तीय हिसाब भी जनता के सामने रखें। उन्होंने कहा कि उपलब्ध वित्तीय आंकड़ों के अनुसार असम की कुल बकाया देनदारियां वर्ष 2019-20 में लगभग 72,256 करोड़ रुपये थीं। वहीं 31 मार्च 2025 तक असम सरकार द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार कुल बकाया कर्ज लगभग 1,61,761 करोड़ रुपये पहुंच गया था। इसमें 18,582 करोड़ रुपये ब्याज मुक्त ऋण शामिल है और ब्याज वाले कर्ज की राशि 1,43,179 करोड़ रुपये बताई गई थी। मूंगटा ने आगे कहा की यही हाल जयराम ठाकुर जी का था जिनके कार्यकाल में पेपर लीक कोरोना काल के घोटाले आम बात थी । मूंगटा ने सवाल उठाया कि भाजपा नेता दूसरे राज्यों को उपदेश देने से पहले असम की बढ़ती देनदारियों और ब्याज के बोझ पर भी जवाब दें,सुक्खू सरकार की तारीफ़ तो स्वयं इनके नेता शांता कुमार और वर्ल्ड बैंक करता है जो कि जयराम जी और अनुराग ठाकुर जी को हेमंता को बताने की आवश्यकता है । हिमाचल सरकार से इस्तीफा मांगने से पहले भाजपा अपने कार्यकाल का मूल्यांकन करे मूंगटा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की निर्वाचित सरकार से इस्तीफे की मांग करने वाले भाजपा नेताओं को पहले ये पता करना चाहिए की 1 नवंबर की रैली में विरोध एस आई आर का हो रहा था न की ईवीएम का, भाजपा नेताओं को SIR वोट चोरी विधायक चोरी सरकार चोरी पर अपने राजनीतिक आचरण और केंद्र सरकार के कामकाज पर भी आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मताधिकार की सुरक्षा किसी भी लोकतंत्र की बुनियाद है। एस आई आर के माध्यम से मतदाता सूचियों में नाम हटाए जाने को लेकर गंभीर चिंता है। मतदाता सूची से किसी भी योग्य नागरिक का नाम बिना उचित प्रक्रिया और पर्याप्त सुनवाई के नहीं हटना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 31 अक्टूबर 2026 को स्वयं एस आई आर के बाद मतदाता सूची को लेकर सवाल उठाए और दावा किया कि उत्तर प्रदेश में 1.27 करोड़ हिंदू मतदाताओं के नाम सूची में नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पंचायत मतदाता सूची में दर्ज 66 लाख लोगों और सरकारी योजनाओं के 55 लाख लाभार्थियों के नाम विधानसभा मतदाता सूची में नहीं हैं। मूंगटा ने सवाल किया कि जब भाजपा के अपने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एस आई आर के बाद मतदाता सूची में इतनी बड़ी संख्या में नाम गायब होने का दावा कर रहे हैं, तो फिर विपक्ष द्वारा मतदाता सूची की पारदर्शिता पर सवाल उठाने को भाजपा गलत कैसे ठहरा सकती है। क्या अब भाजपा अपने ही मुख्यमंत्री के सवालों का जवाब देगी।उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ के दावों का आधार भी सार्वजनिक होना चाहिए और चुनाव आयोग को हर पात्र नागरिक का मताधिकार सुरक्षित रखने के लिए स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मामले में सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रपत्र 6 में ऑनलाइन जोड़े गए अतिरिक्त विवरणों और उनके प्राधिकरण को लेकर भी सवाल उठे हैं। लोकतंत्र में चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता सर्वोपरि होनी चाहिए। मूंगटा ने पश्चिम बंगाल में एस आई आर के दौरान मतदाता सूची से लाखों नाम हटाए जाने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार लगभग 27 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने के बाद 22 लाख से अधिक लोगों ने अपने नाम दोबारा शामिल करवाने के लिए अपील की।उन्होंने कहा कि यह स्थिति बताती है कि मतदाता सूची में बदलाव के दौरान प्रभावित नागरिकों की शिकायतों का समयबद्ध निपटारा कितना आवश्यक है। चुनाव आयोग के सितंबर 2026 में सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार लगभग 38.31 लाख अपीलें दायर हुई थीं, जिनमें उस समय करीब 1.26 लाख का ही निपटारा हुआ था। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और आम मतदाता के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है। मूंगटा ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता से सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार ही नहीं, बल्कि उसकी जिम्मेदारी भी है। भाजपा को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने दावों, अपने शासनकाल और अपने नेताओं के बयानों पर भी जनता के सामने जवाब देना चाहिए।