धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश में इस साल मानसून सीजन के दौरान भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से हुए नुकसान का आकलन करने कांगड़ा ज़िले पहुंची अंतर-मंत्रालीय केंद्रीय दल (आईएमसीटी) ने सोमवार देर शाम यहां जिला प्रशासन के वरिष्ठ अरिकारियों के साथ बैठक की। इससे पूर्व केंद्रीय दल ने ज़िला के आपदा प्रभावित बोह घाटी का दौरा किया।
बैठक की अध्यक्षता गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव एम. रामचंद्रुडु ने की जिसमें इस साल मानसून के दौरान विभिन्न विभागों को हुए नुकसान और अब तक किए जा चुके राहत एवं पुनर्वास कार्याे के बारे में केंद्रीय टीम को जानकारी दी गई।
बैठक की कार्यवाही का संचालन करते हुए उपायुक्त हेमराज बैरवा ने केंद्रीय दल को अवगत करवाया कि इस साल मानसून के दौरान कांगड़ा जिले में मानव और पशुधन के साथ-साथ सड़कों, पेयजल आपूर्ति व सिंचाई योजनाओं, उर्जा, कृषि, बागवानी, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र को व्यापक नुकसान पहुंचा।
विभिन्न प्रकार की दुर्घटनाओं से 15 लोगों की जान गई और 76 पशु धन का नुकसान भी हुआ। ज़िले के नूरपुर, देहरा और पालमपुर सर्कल में लगभग 854 किलामीटर सड़कें प्रभावित होने से 269.77 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसी तरह, जिला में 428 पेयजल आपूर्ति योजनाएं प्रभावित हुईं जिससे 64.06 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। अभी तक 330 पेयजल योजनाओं को अस्थाई रूप से बहाल किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि जिला की कुल 417 सिंचाई योजनाओं में से 89 योजनाओं को नुकसान पहुंचा और अभी तक 25 प्रतिशत से अधिक योजनाओं को बहाल कर दिया गया है।
हेमराज बैरवा ने बताया कि कांगड़ा जिला में मानसून में बिजली अधोसंरचना को भी काफी नुकसान हुआ। एचटी, एलटी लाइनों के साथ-साथ खम्भों के उखड़ने से राज्य विद्युन निगम को 204.57 लाख रुपये का नुकसान हुआ। विभिन्न फसलें खराब होने से कृषि क्षेत्र को 63.97 लाख रुपये, स्वास्थ्य क्षेत्र को 75 लाख रुपये, शिक्षा क्षेत्र को 2.57 करोड़ रुपये और बागवानी क्षेत्र को 10.73 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
शाहपुर विधनसभा क्षेत्र के अंतर्गत बोह घाटी में 21 जुलाई, 2026 को भारी बारिश से हुए नुकसान की जानकारी देतेे हुए उपायुक्त ने कहा कि घड़गूं गांव केे 22 परिवारों के 95 लोग प्रभावित हुए जिन्हें अस्थाई कैंप में स्थानांतरित कर फौरी राहत प्रदान की गई।
उन्होंने केंद्रीय दल को अवगत करवाया कि पिछले तीन वर्षों में प्राकृतिक आपदा के पीड़ितों को राहत पहुंचाने और उनका पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से विशेष 1.30 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये की है।
उपायुक्त ने केन्द्रीय दल से प्राकृतिक आपदा के अंतर्गत प्रदान की जाने वाली आर्थिक सहायता के मापदंडों में संशोधन की सिफारिश करने का आग्रह किया कि ताकि राज्यों को और अधिक सहायता मिल सके। एम. रामचंद्रुडु ने जानकारी दी कि केंद्र स्तर पर इस दिशा में पहले ही कार्य जारी है जां अंतिम चरण में है। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रदेश हित के मुद्दों को केंद्र सरकार के समक्ष रखा जाएगा।
केंद्रीय दल के अन्य सदस्य जल शक्ति विभाग के निदेशक प्रकाश चन्द, ग्रामीण विकास विभाग के निदेशक रामावतार मीणा, रिमोट सेंसिंग सेंटर, इसरो, हैदराबाद के विज्ञानी डाॅ. शशिवर्धन रेड्डी, मुख्य अभियंता आईपीएच दीपक गर्ग, उप निदेशक कृषि अशोक शर्मा, उप निदेशक शिक्षा अजय संबयाल, एसडीएम धर्मशाला मोहित रत्न, एसडीएम शाहपुर गणेश ठाकुर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी भी बैठक में शामिल थे।