सोलन: वैज्ञानिक प्रयासों और टिकाऊ पद्धतियों से केवीके ताबो का सेब बागीचे 60.27 लाख रुपये में हुआ नीलाम

सोलन:डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), लाहौल एवं स्पीति-II, ताबो द्वारा टिकाऊ फसल उत्पादन, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और विपणन की दिशा में किए जा रहे निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप इसके सेब बगीचे के फलों की हालिया नीलामी में 60.27 लाख रुपये की राशि प्राप्त हुई। इस बगीचे को बिलासपुर के अश्विनी कुमार ने नीलामी में खरीदा। नीलामी में हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से 15 बोलीदाताओं ने भाग लिया। पिछले वर्ष इस बगीचे की नीलामी 38 लाख रुपये में हुई थी ।

केवीके ताबो के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रभारी डॉ. आर.एस. स्पेहिया ने इस उपलब्धि का श्रेय वैज्ञानिक अंकिता धीमान और केवीके की पूरी टीम के समर्पित प्रयासों को दिया, जो स्पीति के शीत मरुस्थलीय क्षेत्र की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि केवीके टीम ने फसल उत्पादन के उच्च मानकों को बनाए रखते हुए रासायनिक उर्वरकों और पौध संरक्षण दवाओं के उपयोग को न्यूनतम रखने का प्रयास किया है।

उन्होंने बताया कि अधिक उत्पादन प्राप्त करने के साथ-साथ हमारा ध्यान मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने और शीत मरुस्थलीय परिस्थितियों के अनुरूप टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने पर रहा है। इन प्रयासों से स्वस्थ एवं बेहतर उत्पादकता वाले सेब बगीचे को तैयार करने में मदद मिली है। डॉ. स्पेहिया ने कहा कि केवीके ताबो किसानों के बीच टिकाऊ उत्पादन तकनीकों का प्रदर्शन करने के साथ-साथ सेब एवं सब्जियों की खेती के लिए उन्नत उत्पादन पद्धतियों की जानकारी नियमित रूप से किसानों तक पहुंचा रहा है।

केवीके का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि शीत मरुस्थलीय क्षेत्र में कृषि पद्धतियां पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ और किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी हों। उन्होंने कहा कि कृषि आय बढ़ाने में विपणन की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। केवीके द्वारा हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से अधिक संख्या में खरीदारों को आकर्षित करने के प्रयास किए गए, जिसके परिणामस्वरूप नीलामी में 15 बोलीदाताओं ने भाग लिया। उन्होंने केवीके टीम को निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए कुलपति प्रो. एच.एस. बवेजा, निदेशक प्रसार डॉ. डी.पी. शर्मा और निदेशक, आईसीएआर-अटारी, डॉ. परविंदर श्योराण का आभार व्यक्त किया।

केवीके टीम को बधाई देते हुए कुलपति प्रो. एच.एस. बवेजा ने कहा कि यह परिणाम दर्शाता है कि वैज्ञानिक हस्तक्षेप, टिकाऊ उत्पादन पद्धतियों और बाजारोन्मुख दृष्टिकोण के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है। प्रो. बवेजा ने कहा कि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्रों और अनुसंधान केंद्रों का नेटवर्क किसानों तक फसल उत्पादन, पौध संरक्षण, मृदा एवं जल संरक्षण तथा फसल विविधीकरण से संबंधित नवीनतम ज्ञान एवं तकनीकों को पहुंचाने के लिए कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अपने अनुसंधान एवं प्रसार तंत्र के बीच समन्वय को और मजबूत करते हुए हिमाचल प्रदेश की विविध कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप तकनीकों को बढ़ावा देता रहेगा।

केवीके ताबो द्वारा अक्टूबर में किसान मेले का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें स्पीति घाटी के किसानों के लाभ के लिए इसकी तकनीकों और टिकाऊ कृषि पद्धतियों का प्रदर्शन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में लगभग 400 किसानों के भाग लेने की उम्मीद है।

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