शिमला: श्रवणी पर्व के साप्ताहिक कार्यक्रम में दयानंद स्कूल शिमला में ‘भजन प्रवाह’ आयोजित

शिमला: श्रवणी पर्व के साप्ताहिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में Dayanand Public School, The Mall, Shimla में आज भक्तिमय एवं आध्यात्मिक वातावरण से ओत-प्रोत ‘भजन प्रवाह’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ अभिभावकगण, शिक्षकगण एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और भक्ति संगीत की मधुर धारा में स्वयं को सराबोर किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की प्रधानाचार्या द्वारा विधिवत दीप प्रज्वलित कर किया गया। दीप प्रज्वलन के साथ ही विद्यालय परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता से भर उठा। इसके पश्चात संगीत की सुरमयी यात्रा का शुभारंभ DAV New Shimla के संगीत अध्यापक हरीश गुप्ता एवं श्री अमित जी की मनमोहक प्रस्तुति से हुआ। दोनों संगीतकारों ने अपनी मधुर एवं भावपूर्ण प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए विद्यालय के विद्यार्थियों ने श्रद्धा एवं समर्पण से परिपूर्ण भजन की प्रस्तुति दी। विद्यार्थियों की सुमधुर आवाज और भावपूर्ण गायन ने उपस्थित जनसमूह की खूब सराहना बटोरी। इसके पश्चात विद्यालय के संगीत अध्यापक डॉ. मनोज ठाकुर ने अपने भजनों की सुमधुर प्रस्तुतियों से ऐसा समा बाँधा कि पूरा वातावरण भक्तिरस में डूब गया। उनके भजनों के साथ श्रोता भी भाव-विभोर होकर भक्ति की लहर में सहभागी बनते दिखाई दिए।

कार्यक्रम के समापन चरण में सामूहिक आरती का आयोजन किया गया। आरती के दौरान पूरा विद्यालय परिसर श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक उल्लास से गूंज उठा। उपस्थित सभी जनों ने सामूहिक रूप से ईश्वर का स्मरण करते हुए कार्यक्रम की दिव्यता को और अधिक बढ़ाया।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की प्रधानाचार्या ने सभी कलाकारों को स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने अपने प्रेरक वचनों में कहा कि संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि यह मन को शांति, सकारात्मकता और संस्कारों से जोड़ने वाली एक सशक्त साचना है। उन्होंने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों एवं भक्ति संगीत की समृद्ध परंपरा से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया।

प्रधानाचार्या ने कार्यक्रम को सफल बनाने वाले सभी कलाकारों, अतिथियों, वरिष्ठ अभिभावकों, अध्यापकों तथा विद्यार्थियों के प्रति हृदय से आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यालयी जीवन में संस्कार, संस्कृति और संवेदनशीलता का सुंदर समावेश करते हैं।

इस प्रकार ‘भजन प्रवाह’ केवल एक संगीत कार्यक्रम न रहकर श्रद्धा, संस्कार, संगीत और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम बन गया। भजनों की मधुर गूंज और आरती की पावन अनुभूति के साथ श्रावणी पर्व का यह आयोजन सभी के मन में एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक स्मृति छोड़ गया।

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