राज्यपाल ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर दिल्ली स्थित हिमाचल एम्पोरियम का किया दौरा
राज्यपाल ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर दिल्ली स्थित हिमाचल एम्पोरियम का किया दौरा
शिमला: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने शुक्रवार को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर हिमाचल प्रदेश के नई दिल्ली में स्थित हिमाचल एम्पोरियम का दौरा किया तथा स्थानीय स्तर पर निर्मित हथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पादों की खरीदारी की। उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि वे भारत के बुनकरों और शिल्पकारों के समर्थन में कम-से-कम एक हथकरघा उत्पाद अवश्य खरीदें। राज्यपाल ने हथकरघा क्षेत्र से जुड़े सभी बुनकरों, शिल्पकारों एवं अन्य लोगों को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनके कौशल, सृजनशीलता और समर्पण ने पीढ़ियों से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखा है तथा देश की पहचान को सशक्त बनाया है। राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश के शिल्पकारों की उत्कृष्ट कारीगरी की सराहना करते हुए कहा कि प्रत्येक हथकरघा उत्पाद भारत की समृद्ध परंपराओं, सांस्कृतिक विविधता और आत्मनिर्भरता की भावना को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों की खरीद केवल आर्थिक गतिविधि नहीं है, बल्कि इससे शिल्पकार परिवारों का सशक्तिकरण, ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा, महिला उद्यमियों को सहयोग तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण को भी मजबूती मिलती है। श्री गुप्ता ने 7 अगस्त के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1905 में इसी दिन स्वदेशी उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई थी। इस आंदोलन के आदर्श आज भी देश के विकास पथ पर प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं और वर्तमान समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने प्रत्येक नागरिक से कम-से-कम एक स्थानीय हथकरघा उत्पाद खरीदने तथा देश के बुनकरों और शिल्पकारों का सक्रिय समर्थन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह छोटा-सा लेकिन सार्थक प्रयास पारंपरिक शिल्प को संरक्षण देगा, सदियों पुरानी कला को जीवित रखेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए भारत की अमूल्य हथकरघा विरासत को सुरक्षित रखने में सहायक होगा। राज्यपाल ने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ पहल केवल स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का अभियान नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय जनआंदोलन है। यह पहल स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने, सतत आजीविका के अवसर, पारंपरिक शिल्पों का संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश की समृद्ध हथकरघा एवं हस्तशिल्प परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश के प्रतिभाशाली बुनकर और शिल्पकार ऐसी अमूल्य विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, जो हिमाचल की विशिष्ट संस्कृति, कलात्मक उत्कृष्टता और पहचान का प्रतीक है। श्री गुप्ता ने कहा कि हथकरघा उत्पाद की प्रत्येक खरीद हमारी सांस्कृतिक विरासत और हजारों शिल्पकार परिवारों की आजीविका में एक महत्वपूर्ण निवेश है। उन्होंने देशवासियों से भारतीय हथकरघा की गौरवशाली विरासत का सम्मान, स्वदेशी शिल्पकला को गर्व के साथ अपनाने और इसे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया।