बिलासपुर: जुलाई खरीफ मौसम में जिला बिलासपुर के लगभग 24,300 हेक्टेयर क्षेत्र में मक्की की बुवाई की गई है। पिछले चार-पांच वर्षों से जिले में मक्की की फसल पर फॉल आर्मीवर्म का लगातार प्रकोप देखा जा रहा है। यह कीट किसानों की फसल को भारी नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है। इसलिए किसानों को फसल का नियमित निरीक्षण करते हुए प्रारंभिक अवस्था में ही इस कीट का प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करना चाहिए।
यह जानकारी कृषि उपनिदेशक कुलभूषण धीमान ने देते हुए बताया कि फॉल आर्मीवर्म एक अत्यंत विनाशकारी एवं बहुभक्षी कीट है, जिसकी उत्पत्ति उत्तर एवं दक्षिण अमेरिका के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में हुई है। भारत में इसका पहला प्रकोप वर्ष 2018 में कर्नाटक राज्य में दर्ज किया गया था, जिसके बाद यह देश के अधिकांश मक्का उत्पादक राज्यों सहित हिमाचल प्रदेश में भी फैल गया। इस कीट की सूंडियां मक्की की पत्तियों तथा पौधे के मध्य भाग (व्हॉर्ल) को खाकर फसल को गंभीर क्षति पहुंचाती हैं। यदि समय रहते इसका नियंत्रण नहीं किया जाए तो मक्की की उपज में 20 से 30 प्रतिशत अथवा उससे अधिक की कमी आ सकती है।
उन्होंने बताया कि फॉल आर्मीवर्म के प्रभावी प्रबंधन के लिए खेतों का नियमित निरीक्षण, अंड समूहों एवं छोटी सूंडियों का नष्ट करना, फेरोमोन ट्रैप का उपयोग तथा आवश्यकता अनुसार जैविक एवं रासायनिक नियंत्रण अपनाना अत्यंत आवश्यक है। अधिक प्रकोप की स्थिति में केवल कृषि विभाग द्वारा अनुशंसित कीटनाशकों का ही प्रयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि क्लोरएन्ट्रानिलीप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी (कोराजन) का 0.4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव प्रभावी रहता है। छिड़काव इस प्रकार किया जाना चाहिए कि दवा पौधे के मध्य भाग तक पहुंचे, क्योंकि सूंडियां सामान्यतः वहीं छिपी रहती हैं।
कृषि उपनिदेशक ने बताया कि फॉल आर्मीवर्म की निगरानी एवं नियंत्रण के लिए कृषि विभाग बिलासपुर द्वारा जिला कृषि अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों, विषय विशेषज्ञों, उप परियोजना अधिकारी (आत्मा) तथा कृषि विकास अधिकारियों को शामिल करते हुए विशेष निगरानी दल का गठन किया गया है। यह दल किसानों के खेतों का नियमित निरीक्षण कर उन्हें तकनीकी परामर्श प्रदान कर रहा है तथा आवश्यकता अनुसार कीटनाशकों की उपलब्धता भी सुनिश्चित कर रहा है।
उन्होंने बताया कि किसानों की सुविधा के लिए क्लोरएन्ट्रानिलीप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी (कोराजन), इमामेक्टिन बेंजोएट 5 प्रतिशत एसजी तथा स्पिनोसैड 45 प्रतिशत एससी कृषि बिक्री केंद्रों में अनुदान पर उपलब्ध करवा दी गई हैं। इसके अतिरिक्त कृषि विभाग से लाइसेंस प्राप्त कीटनाशक विक्रेताओं के पास भी ये दवाइयां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।












