सोलन: अनुशासित एवं जिम्मेदार नागरिकों के निर्माण में एनसीसी की भूमिका सराहनीय – प्रो. बावेजा
सोलन: अनुशासित एवं जिम्मेदार नागरिकों के निर्माण में एनसीसी की भूमिका सराहनीय – प्रो. बावेजा
सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के कुलपति प्रो. हरमिंदर सिंह बावेजा ने युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की।
प्रो बावेजा विश्वविद्यालय परिसर में 1 एचपी बॉयज़ बटालियन एनसीसी, सोलन द्वारा आयोजित 10 दिवसीय वार्षिक प्रशिक्षण शिविर (एटीसी-232) के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस शिविर में यूएचएफ, नौणी तथा जिला सोलन के 16 शिक्षण संस्थानों से वरिष्ठ एवं कनिष्ठ वर्ग के 572 एनसीसी कैडेटों ने भाग लिया। प्रतिभागी संस्थानों में राजकीय महाविद्यालय दिगल, अर्की एवं सोलन के अलावा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नारग, रामशहर, अर्की, धर्मपुर, ओच्छघाट, कुठार, मामलीग, कुनिहार, सुबाथू एवं धुंधन, केंद्रीय विद्यालय सुबाथू, एनपीएस धुंधन, अल्पाइन पब्लिक स्कूल, एमआरए डीएवी पब्लिक स्कूल सोलन तथा डीएवी पब्लिक स्कूल, राजगढ़ शामिल रहे।
यह शिविर 1 एचपी बॉयज़ बटालियन एनसीसी, सोलन के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल राजीव थॉमस के नेतृत्व में प्रशासनिक अधिकारी कर्नल ए.एस. सिद्धू, एनसीसी अधिकारियों, एसोसिएट एनसीसी अधिकारियों (एएनओ), शिक्षकों एवं सहयोगी स्टाफ की देखरेख में आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए कर्नल राजीव थॉमस ने शिविर के उद्देश्यों एवं आयोजित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैम्प के दौरान कैडेटों को ड्रिल, शारीरिक प्रशिक्षण, हथियार संचालन, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य जागरूकता, सामाजिक सेवा, नेतृत्व विकास, व्यक्तित्व विकास, सांस्कृतिक गतिविधियों तथा विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का प्रशिक्षण दिया गया।
अपने संबोधन में प्रो. बवेजा ने शिविर के दौरान कैडेटों द्वारा प्रदर्शित अनुशासन, सटीकता एवं टीम भावना की सराहना की। उन्होंने कैडेटों से आह्वान किया कि वे शिविर में सीखे गए अनुशासन, ईमानदारी और समर्पण के मूल्यों को अपने दैनिक जीवन में अपनाएं तथा राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित जिम्मेदार नागरिक बनें। कैडेटों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वास्तविक शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित नहीं होती, बल्कि जीवन कौशल, व्यक्तित्व विकास और अपनी प्रतिभा को पहचानने से भी जुड़ी होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी रुचियों को पहचानने, जीवन कौशल विकसित करने और दृढ़ संकल्प के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि अस्थायी असफलताओं से निराश नहीं होना चाहिए और सफलता मिलने पर आत्मसंतुष्ट होने के बजाय निरंतर उत्कृष्टता की ओर प्रयासरत रहना चाहिए।
समारोह के दौरान प्रो. बवेजा ने शिविर के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। उन्होंने सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए सभी कैडेटों के उत्साहपूर्ण सहभागिता एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की तथा उन्हें शिक्षा, खेल और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में निरंतर उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की निदेशक अनुसंधान डॉ. देविना वैद्य, उद्यानिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. मनीष शर्मा, छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. एस.के. भारद्वाज तथा विशेष कार्य अधिकारी डॉ. अनिल हांडा एवं डॉ. बी.एस. दिल्टा भी उपस्थित रहे।