मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना की समीक्षा बैठक आयोजित
शिमला: जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति और मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना की समीक्षा की बैठक उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में वीरवार को आयोजित की गई। बैठक में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, पात्र बच्चों एवं युवाओं को समयबद्ध लाभ सुनिश्चित करने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान उपायुक्त ने कहा कि जिला के सभी बाल देखभाल संस्थानों में पोषण वाटिका तैयार की जाएगी। इसके लिए कृषि विभाग के तहत आत्मा प्रोजेक्ट का सहयोग लिया जाएगा। इस बारे में संबंधित विभागों को दिशा निर्देश जारी कर दिए है। उपायुक्त ने कहा कि पोषण वाटिका में बच्चे कृषि की मूलभूत जानकारियां भी सीखेंगे। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी जागरूक होंगे। उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के अंतर्गत आने वाले प्रत्येक पात्र बच्चे एवं युवा तक योजना का लाभ प्राथमिकता के आधार पर पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि योजना के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, स्वरोजगार, उच्च शिक्षा, विवाह सहायता तथा अन्य कल्याणकारी प्रावधानों का लाभ पूरी पारदर्शिता एवं संवेदनशीलता के साथ उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पात्र लाभार्थियों का अद्यतन डाटा तैयार रखा जाए तथा विभिन्न मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिन मामलों में विभागीय समन्वय की आवश्यकता है, उनका शीघ्र समाधान किया जाए ताकि किसी भी पात्र लाभार्थी को अनावश्यक विलंब का सामना न करना पड़े। जिला में विभिन्न बाल देखभाल संस्थानों में 425 बच्चे रह रहे हैं। इसके साथ ही मिशन वात्सल्य के तहत अप्रैल 2025 से लेकर अभी तक 14 बच्चों को दत्तक माता-पिता मुहैया करवाए गए हैं। इसके अलावा 90 बच्चों को फोस्टर केयर एंड स्पोंसरशिप के तहत राशि मुहैया करवाई गई है। इस वर्ष अप्रैल 2025 से लेकर अभी तक 180 नए प्रवेश बाल देखभाल केंद्रों में हुई है। 80 बच्चों और 56 अभिभावकों की काउंसलिंग की गई है। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत 25 घर लाभार्थियों के बन रहे है, जिन पर 49 लाख रुपए खर्च किए जा रहे है। बैठक में योजना के अंतर्गत विभिन्न मदों में स्वीकृत एवं लंबित मामलों की समीक्षा की गई। साथ ही लाभार्थियों की शिक्षा, स्वास्थ्य, पुनर्वास तथा आर्थिक सहायता से जुड़े मामलों की प्रगति का भी आकलन किया गया। उपायुक्त ने कहा कि मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना प्रदेश सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य निराश्रित एवं जरूरतमंद बच्चों और युवाओं को सुरक्षित, सम्मानजनक तथा आत्मनिर्भर जीवन उपलब्ध कराना है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि योजना के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए तथा प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक समय पर सहायता पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। इस मौके जिला बाल संरक्षण समिति की सदस्य उषा राठौर, किरण औक्टा, जिला कार्यक्रम अधिकारी आईसीडीएस ममता पाॅल, प्रतिभा राठौर सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
पोषण वाटिका क्या है: पोषण वाटिका संस्थान के परिसर में विकसित किया जाने वाला एक छोटा बगीचा है, जिसमें स्थानीय जलवायु के अनुसार पौष्टिक सब्जियां, फल और औषधीय पौधे उगाए जाते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य संस्थान के बच्चा को ताजा, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध करवा कर कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं को कम करना है। पोषण वाटिका में पालक, मेथी, चौलाई, टमाटर, भिंडी, लौकी, गाजर, मूली, मटर, सेम जैसी हरी सब्जियों के साथ-साथ पपीता, अमरूद, नींबू और केला जैसे फलदार पौधे लगाए जाते हैं। तुलसी, पुदीना और एलोवेरा जैसे औषधीय पौधे भी इसका हिस्सा हो सकते हैं। पोषण वाटिका से वर्षभर ताजी एवं पोषण युक्त सब्जियां और फल आसानी से उपलब्ध होते हैं। इससे भोजन में विविधता बढ़ती है, खाद्य पदार्थों पर होने वाला खर्च कम होता है और जैविक खेती को बढ़ावा मिलता है। साथ ही, लोगों में संतुलित आहार, स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता भी बढ़ती है। भारत सरकार के पोषण अभियान के अंतर्गत पोषण वाटिकाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि स्थानीय स्तर पर पोषण सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।