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मई-जून के दौरान सेब की बीमारियों के निदान के लिए वैज्ञानिक सिफारिशें, सेब उगाने वाले क्षेत्रों के बागवानों को सतर्क रहने की जरूरत

सेब की फसलों में रोग प्रबंधन हेतु परामर्श..

सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के वैज्ञानिक और बागवानी विभाग के अधिकारी और प्रगतिशील किसान हर माह प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बागवानी फसलों के विभिन्न विषयों पर चर्चा करने हेतु ऑनलाइन बैठक करते हैं। इस बैठक के दौरान आने वाले समय में होने वाले बागवानी कार्य और बीमारियों के निदान के लिए परामर्श जारी किया जाता है । इस संबंध  में विश्वविद्यालय के  पादप रोग विज्ञान विभाग, ने सेब में रोगों के प्रभावी प्रबंधन के लिए निम्नलिखित परामर्श जारी किया है।

प्रदेश में हो रही वर्षा के कारण तापमान, आर्द्रता एवं पत्तियों पर नमी जैसी परिस्थितियाँ सेब में पत्ती झुलसा, पत्ती धब्बा, मार्सोनिना लीफ ब्लॉच तथा मृदा जनित रोगों के प्रकोप एवं प्रसार के लिए अत्यंत अनुकूल हैं।

जिन बगीचों में पिछले वर्ष ये रोग पाए गए थे, वहाँ किसानों को विश्वविद्यालय एवं बागवानी विभाग द्वारा अनुशंसित स्प्रे सारिणी के अनुसार फफूंदनाशकों का छिड़काव करने की सलाह दी जाती है। किसानों को पत्ती धब्बा, पत्ती झुलसा, मार्सोनिना लीफ ब्लॉच,व्हाइट रूट  रॉट तथा कॉलर रॉट की नियमित निगरानी करनी चाहिए तथा आवश्यकता अनुसार अनुशंसित स्प्रे सारिणी के अनुसार फफूंदनाशकों का प्रयोग करना चाहिए।

किसानों के लिए निम्नलिखित परामर्श जारी किया जाता है:

  • बगीचों के अंदर तथा आसपास उगने वाले खरपतवारों को नियमित रूप से हटाएँ।
  • अल्टरनेरिया पत्ती धब्बा/झुलसा तथा मार्सोनिना लीफ ब्लॉच के प्रबंधन हेतु आवश्यकता होने पर मेटीराम (Metiram) 600 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी का सुरक्षात्मक छिड़काव करें।
    • जिन बगीचों में इन रोगों का प्रकोप अधिक हो, वहाँ निम्नलिखित फफूंदनाशकों का बारी-बारी से प्रयोग करें: लस्टर (Lustre 5% SE) – 160 मि.ली. प्रति 200 लीटर पानी या कैब्रियो टॉप (Cabrio Top 60 WG) – 200 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी या शमीर (Shamir) – 500 मि.ली. प्रति 200 लीटर पानी या लूना एक्सपीरियंस (Luna Experience) – 126 मि.ली. प्रति 200 लीटर पानी या अवतार (Avtaar) – 500 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी
  • व्हाइट रूट  रॉट (White Root Rot) के प्रबंधन हेतु वर्षा ऋतु के प्रारम्भ से पेड़ के चारों ओर लगभग 15–20 सेमी गहराई तक कार्बेन्डाजिम (Carbendazim) 200 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी के घोल से 3–4 बार ड्रेंचिंग करें।
  • कॉलर रॉट (Collar Rot) के प्रबंधन हेतु वर्षा ऋतु के दौरान तने से लगभग 30 सेमी दूरी पर पूरे वृक्ष बेसिन में मैनकोजेब (Mancozeb) 600 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी के घोल से ड्रेंचिंग करें।
  • सिल्वर लीफ कैंकर (Silver Leaf Canker) अथवा अन्य कैंकर रोगों के प्रबंधन हेतु फल तुड़ाई के 24 घंटे के भीतर क्यूप्रोफिक्स डिस्प्रेस (Cuprofix DISPRESS) 1200 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी का छिड़काव करें।

महत्वपूर्ण सलाह

  • अनुशंसित फफूंदनाशकों के साथ किसी भी अन्य कीटनाशी, रसायन, सूक्ष्म पोषक तत्व, वृद्धि नियामक अथवा हार्मोन को मिलाकर छिड़काव न करें, क्योंकि इससे फाइटोटॉक्सिसिटी (पौधों पर विषाक्त प्रभाव), फल पर रसेटिंग तथा अन्य विकार उत्पन्न हो सकते हैं। यदि इनका प्रयोग आवश्यक हो तो इन्हें अलग-अलग छिड़काव करें।
  • यदि बगीचे में किसी रोग के लक्षण दिखाई दें या किसी प्रकार की तकनीकी जानकारी की आवश्यकता हो, तो किसान रोगग्रस्त पौधों के फोटोग्राफ के साथ अपनी समस्या hodmpp@uhf.ac.in पर भेज सकते हैं।

 

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