सनातन धर्म को जानिए, केवल मानिए नहीं; सच्ची आध्यात्मिक जागृति ही धर्म परिवर्तन का स्थायी समाधान – स्वामी धीरानंद स्वामी धीरानंद
सनातन धर्म को जानिए, केवल मानिए नहीं; सच्ची आध्यात्मिक जागृति ही धर्म परिवर्तन का स्थायी समाधान – स्वामी धीरानंद स्वामी धीरानंद
शिमला: दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा क्योंथल बैंक्वेट हॉल, शिमला में तीन दिवसीय भगवान शिव कथा का भव्य आयोजन किया गया। कथा के दौरान भगवान शिव की दिव्य लीलाओं, सनातन धर्म के आध्यात्मिक रहस्यों तथा आत्मबोध के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम में भाजपा मीडिया संयोजक कर्ण नंदा, सूद सभा के अध्यक्ष राजीव सूद तथा विकास कपूर विशेष रूप से उपस्थित रहे।
इस अवसर पर संस्थान के स्वामी धीरानंद ने कहा कि भारत संतों, ऋषियों और अवतारों की पावन भूमि है, जहां सनातन धर्म ने पूरी मानवता को ज्ञान, अध्यात्म और जीवन जीने की सही दिशा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि आज भी कुछ लोग ईश्वर के अस्तित्व पर प्रश्न उठाते हैं, जबकि वास्तविक प्रश्न यह नहीं कि ईश्वर है या नहीं, बल्कि यह है कि क्या हमारे पास ऐसी आध्यात्मिक दृष्टि है जिससे ईश्वर का साक्षात्कार किया जा सके। उन्होंने कहा कि पूर्ण गुरु के मार्गदर्शन से ही मनुष्य अपने भीतर स्थित दिव्य चेतना को जागृत कर परमात्मा का अनुभव कर सकता है।
स्वामी धीरानंद ने कहा कि आज समाज के सामने धर्म परिवर्तन, नशाखोरी और सामाजिक विघटन जैसी अनेक चुनौतियां हैं। इनका मूल कारण सनातन धर्म के वास्तविक स्वरूप और उसके आध्यात्मिक ज्ञान से दूर होना है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति केवल परंपरा के आधार पर धर्म को मानता है, वह परिस्थितियों से प्रभावित हो सकता है, लेकिन जो सनातन के ज्ञान और ईश्वर के सत्य का अनुभव कर लेता है, उसका विश्वास कभी डगमगाता नहीं।
उन्होंने समाज से आह्वान किया कि केवल व्यक्तिगत हितों तक सीमित न रहकर सामाजिक बुराइयों के प्रति भी सजग रहें। यदि समाज में फैल रही नशाखोरी, धर्म परिवर्तन और अन्य विकृतियों के प्रति समय रहते जागरूकता नहीं दिखाई गई, तो उनका दुष्प्रभाव प्रत्येक परिवार तक पहुंच सकता है। इसलिए समाज को आत्मरक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण और सनातन मूल्यों के प्रचार-प्रसार के लिए संगठित होकर कार्य करना होगा।
स्वामी धीरानंद ने कहा कि दिव्य ज्योति जागृति संस्थान का उद्देश्य किसी मत या पंथ का प्रचार नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को ईश्वर के साक्षात्कार की दिशा में प्रेरित करना है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे केवल सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति तक सीमित न रहें, बल्कि ईश्वर की प्राप्ति को अपने जीवन का लक्ष्य बनाएं। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य आध्यात्मिक मार्ग पर चलता है, तभी जीवन में वास्तविक शांति, आनंद और आत्मसंतोष प्राप्त होता है।
कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं से तीन दिवसीय शिव कथा का अधिक से अधिक लाभ उठाने तथा सनातन संस्कृति के आध्यात्मिक संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का आह्वान किया गया।