मत्स्य संपदा संरक्षण के लिए विभाग ने किए व्यापक प्रबंध, अवैध शिकार पर होगी कड़ी कार्रवाई
बिलासपुर: हिमाचल प्रदेश के सामान्य जलाशयों, नदियों, नालों तथा उनकी सहायक धाराओं में मछलियों के प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए 16 जून 2026 से 15 अगस्त 2026 तक मछली पकड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इस अवधि के दौरान प्रदेश के सभी सामान्य जल स्रोतों में किसी भी प्रकार के मत्स्य आखेट तथा मछली बिक्री की अनुमति नहीं होगी। यह जानकारी मत्स्य विभाग के निदेशक एवं प्रधान मुख्य मत्स्य संरक्षक विवेक चंदेल ने दी।
उन्होंने बताया कि इस प्रतिबंध का मुख्य उद्देश्य विभिन्न मछली प्रजातियों के प्राकृतिक प्रजनन को सुरक्षित बनाना तथा प्रदेश के मत्स्य संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग 13 हजार मछुआरे प्रत्यक्ष रूप से मत्स्य व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और अपनी आजीविका के लिए इस व्यवसाय पर निर्भर हैं। प्रदेश के पांच प्रमुख जलाशयों—गोविंद सागर, पोंग, चमेरा, कोलडैम तथा रणजीत सागर—का कुल क्षेत्रफल लगभग 43,785 हेक्टेयर है, जहां 6,300 से अधिक मछुआरे कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त लगभग 2,400 किलोमीटर लंबाई वाले सामान्य जल स्रोतों में भी 6,300 से अधिक मछुआरे मत्स्य आखेट से जुड़े हुए हैं। इन सभी परिवारों को निरंतर रोजगार उपलब्ध करवाने तथा प्रदेशवासियों को प्रोटीनयुक्त आहार सुनिश्चित करने में मत्स्य विभाग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
विवेक चंदेल ने बताया कि वर्ष 2025-26 के बंद सीजन के दौरान मत्स्य विभाग द्वारा चलाए गए विशेष अभियान के अंतर्गत प्रदेशभर में अवैध मत्स्य आखेट के 336 मामले पकड़े गए। इन मामलों में 29 किलोग्राम अवैध मछली जब्त की गई तथा विभाग द्वारा 3 लाख 5 हजार 400 रूपए की क्षतिपूर्ति राशि भी वसूल की गई। उन्होंने कहा कि प्रतिबंध अवधि के प्रभावी क्रियान्वयन से मत्स्य संसाधनों के संरक्षण में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त होती है।
उन्होंने बताया कि प्रतिबंध अवधि के दौरान अधिकांश महत्वपूर्ण मछली प्रजातियां प्राकृतिक रूप से प्रजनन करती हैं, जिससे जल स्रोतों में मछली बीज का स्वाभाविक संवर्धन होता है। इसी कारण विभाग द्वारा प्रतिवर्ष दो माह के लिए मछली पकड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया जाता है।
प्रतिबंध अवधि के सफल संचालन तथा अवैध मत्स्य आखेट पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए निदेशक एवं प्रधान मुख्य मत्स्य संरक्षक विवेक चंदेल की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में संयुक्त निदेशक मत्स्य पवन कुमार, उपनिदेशक मत्स्य जय सिंह, उपनिदेशक मत्स्य चंचल ठाकुर सहित विभाग के विभिन्न वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में क्षेत्रीय स्तर पर समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए।
मत्स्य संपदा संरक्षण के लिए प्रदेश के प्रमुख जलाशयों में विशेष कर्मचारी दलों की तैनाती भी की गई है। बिलासपुर जिले में कुल 19 कैंप स्थापित किए गए हैं, जिनमें गोविंद सागर में 16 तथा कोलडैम में 3 कैंप शामिल हैं। इसके अतिरिक्त एक उड़नदस्ता भी तैनात किया गया है। पोंग बांध क्षेत्र में 7 कैंप तथा एक उड़नदस्ता और चंबा क्षेत्र में चमेरा तथा रणजीत सागर जलाशयों में कुल 5 कैंप तथा एक उड़नदस्ता कार्य करेगा। ये सभी दल जल एवं सड़क मार्ग से नियमित गश्त कर मत्स्य संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।
विवेक चंदेल ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि प्रतिबंध अवधि के दौरान किसी भी प्रकार के अवैध मत्स्य आखेट में शामिल न हों तथा मत्स्य संपदा संरक्षण में विभाग का सहयोग करें। उन्होंने बताया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर अधिकतम तीन वर्ष तक के कारावास, पांच हजार रूपए तक के जुर्माने अथवा दोनों दंडों का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंध अवधि में जाल के माध्यम से मछली पकड़ना गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है।