बरसात के मौसम में स्क्रब टाइफस और हेपेटाइटिस-ए से बचाव के लिए सतर्क
मण्डी: उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन की अध्यक्षता में मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में पीलिया, स्क्रब टायफस तथा एचपीवी टीकाकरण अभियान की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।
बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त प्रियांशु खाती विशेष रूप से उपस्थित रहे। अपूर्व देवगन ने स्वास्थ्य विभाग सहित सभी संबंधित विभागों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन हिमाचल प्रदेश द्वारा जारी एडवाइजरी का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करने तथा व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।
उपायुक्त ने कहा कि मानसून के दौरान स्क्रब टाइफस के मामलों में वृद्धि की संभावना रहती है। ऐसे में सभी स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता, समय पर जांच, उपचार तथा संदिग्ध मामलों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने पंचायतों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, स्कूलों तथा अन्य विभागों के सहयोग से गांव-गांव लोगों को जागरूक करने के निर्देश भी दिए। उपायुक्त ने कहा कि समय पर उपचार, व्यक्तिगत स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल का उपयोग तथा सामुदायिक जागरूकता ही इन बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने सभी नागरिकों से स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने और किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की।
स्क्रब टाइफस से कैसे करें बचाव: मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ दिनेश ठाकुर ने बताया कि स्क्रब टाइफस एक जीवाणु जनित रोग है, जो संक्रमित माइट (चिगर) के काटने से फैलता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, शरीर व जोड़ों में दर्द, कंपकंपी, शरीर में अकड़न तथा गंभीर स्थिति में शरीर के विभिन्न हिस्सों में गिल्टियां आना शामिल हैं। उन्होंने बताया कि खेतों, झाड़ियों अथवा घास वाले क्षेत्रों में कार्य करते समय पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें, कार्य के बाद स्नान करें, आसपास साफ-सफाई बनाए रखें तथा बुखार आने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में जांच करवाएं। स्क्रब टाइफस की जांच एवं उपचार सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क उपलब्ध है।
हेपेटाइटिस-ए के लक्षण एवं बचाव: उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस-ए दूषित पानी एवं दूषित भोजन के सेवन से फैलने वाला रोग है। इसके प्रमुख लक्षणों में आंखों एवं त्वचा का पीला पड़ना, बुखार, भूख न लगना, उल्टी, गहरे रंग का पेशाब, अत्यधिक कमजोरी तथा पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द शामिल हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने लोगों से अपील की कि पीने के पानी को कम से कम 15 मिनट तक बुलबुले आने तक उबालकर ही उपयोग करें। भोजन बनाने और खाने से पहले तथा शौच के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं। ताजा एवं ढका हुआ भोजन ही खाएं तथा खुले में रखे खाद्य पदार्थों, कटे हुए फलों और दूषित पानी के सेवन से बचें। जल स्रोतों को स्वच्छ रखें और खुले में शौच न करें।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सभी चिकित्सा अधिकारियों को स्क्रब टाइफस के संदिग्ध रोगियों का समय पर उपचार शुरू करने, आवश्यक दवाओं का पर्याप्त भंडारण किया गया है। पुष्ट मामलों को निर्धारित पोर्टल पर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। जिले में तेज बुखार के मामलों में चिकित्सक स्क्रब टायफस की आशंका को गंभीरता से लेते हुए आवश्यकता अनुसार समय पर डॉक्सीसाइक्लिन दवा उपलब्ध करवा दी है, ताकि संक्रमण पर शुरुआती स्तर पर ही प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके। उन्होंने लोगों से अपील की कि खेतों, झाड़ियों अथवा घास वाले क्षेत्रों में जाते समय फुल स्लीव कपड़े पहनें और स्वयं को स्क्रब टायफस से सुरक्षित रखें।
*एचपीवी टीकाकरण 42 प्रतिशत लक्ष्य पूरा: एचपीवी टीकाकरण अभियान की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिला मंडी में अब तक 42 प्रतिशत पात्र बालिकाओं का टीकाकरण पूरा हो चुका है। उपायुक्त ने शेष पात्र बालिकाओं का शीघ्र टीकाकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एचपीवी वैक्सीन बच्चेदानी के मुंह (सर्वाइकल) कैंसर से बचाव का प्रभावी माध्यम है तथा यह टीका जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क उपलब्ध है। उन्होंने अभिभावकों से इस अभियान में सहयोग करने की अपील की।












