बौखलाहट में क्यों जनादेश और जनप्रतिनिधियों का अपमान कर रहे हैं मुख्यमंत्री – जयराम ठाकुर

शिमला : शिमला से जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू हार से बौखलाहट में हैं, इसीलिए जनादेश का लगातार अपमान कर रहे हैं। प्रदेश की जनता ने कांग्रेस को नकार कर भाजपा को जनादेश दिया, यह बात मुख्यमंत्री स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। इसी वजह से वह अब विजयी जनप्रतिनिधियों के साथ अपमानजनक व्यवहार कर रहे हैं। एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री ने जिला परिषद और ब्लॉक समिति के सदस्यों को लेकर अपमानजनक बयान दिया, जो जनादेश का अपमान था। अब उनके शपथ ग्रहण समारोह में भी सरकार द्वारा किया गया कृत्य बेहद शर्मनाक और निंदनीय है। जनप्रतिनिधियों के शपथ ग्रहण समारोह में सदैव ही परिजनों के जाने की परंपरा रही है। यह जनप्रतिनिधि और परिजनों के लिए एक सम्मान का क्षण होता है, जिसे हर कोई एक उत्सव की तरह मनाना चाहता है। लेकिन सरकार ने जिला परिषद सदस्यों के शपथ ग्रहण समारोह में परिजनों और मीडिया को न जाने देकर अपनी बौखलाहट ही दिखाई है। इसी बौखलाहट में लगातार प्रदेश के जनप्रतिनिधियों का अपमान कर रहे हैं और उन्हें नीचा दिखाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं।

जयराम ठाकुर ने कहा कि सूबे के मुखिया होने के नाते मुख्यमंत्री को जनमत का सम्मान करना चाहिए था, लेकिन वह पहले दिन से ही जनमत को नकारने, चुने हुए जनप्रतिनिधियों को प्रताड़ित करने के काम में लगे हुए हैं, जिससे जिला परिषद, ब्लॉक समिति के अध्यक्ष और स्थानीय निकाय के अध्यक्ष के चुनाव में डरा-धमकाकर उनका समर्थन हासिल कर सकें। इसके लिए उन्होंने अपने पद के दुरुपयोग की सारी सीमाएं लांघ दी हैं। भाजपा समर्थित नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों को प्रताड़ित करने के लिए सरकार ने अधिकारियों को काम पर लगाया है। भाजपा समर्थित जनप्रतिनिधियों को परेशान करने की तरह-तरह की संभावनाएं खोजी जा रही हैं, जिससे डरा-धमकाकर उनका समर्थन हासिल किया जा सके। जनता द्वारा जानकारी दिए जाने के बाद भी मुख्यमंत्री जनादेश हथियाने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री और इस काम में लगे अधिकारियों को मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि यह उन्हें बहुत महंगा पड़ेगा।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भाजपा समर्थित नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों को प्रताड़ित करके अपना समर्थन हासिल करने की मंशा से ही मुख्यमंत्री ने स्थानीय निकाय के अध्यक्ष के पद के चुनाव की समयावधि में परिवर्तन कर दिया है। पहले नगर पंचायत और नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव स्थानीय निकाय के सभासदों के चुनाव के 7 दिन के भीतर किए जाने का प्रावधान था। लेकिन नियम-कानून की धज्जियां उड़ाने में महारत हासिल कर चुके मुख्यमंत्री ने यह नियम बदल दिया, जिससे सभासदों को प्रभावित करके अपनी हार को छिपाया जा सके। सरकार का यह कृत्य हर तरीके से लोकतंत्र विरोधी, संविधान विरोधी और जनादेश के खिलाफ है। भारतीय जनता पार्टी मुख्यमंत्री को किसी भी हाल में जनमत की चोरी नहीं करने देगी। हार की बौखलाहट में मुख्यमंत्री चाहे जितने लोकतंत्र विरोधी काम कर लें, उन्हें किसी भी हाल में सफलता नहीं मिलेगी। मुख्यमंत्री झूठ का सहारा लेना छोड़ें, जनादेश को स्वीकार करें एवं जनप्रतिनिधियों का सम्मान करें, इसी में सरकार की भलाई है।

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